मावली नगर पालिका: सफाई कर्मचारियों के भुगतान में अनियमितता का खुलासा
हाजिरी रजिस्टर में 38 नाम होने के बावजूद 46 का भुगतान किया जा रहा है, जिससे सरकारी खजाने को प्रतिमाह लाखों रुपये की चपत लग रही है।

नगर पालिका द्वारा फरवरी माह की भरी गई हाजिरी


मावली नगर पालिका में सफाई व्यवस्था के नाम पर बड़े स्तर पर वित्तीय अनियमितता का गंभीर मामला सामने आया है। प्रारंभिक जांच में खुलासा हुआ है कि वास्तविक कर्मचारियों से अधिक संख्या में भुगतान उठाकर सरकारी धन का दुरुपयोग किया जा रहा है, जिससे पूरे सिस्टम की पारदर्शिता पर सवाल खड़े हो गए हैं।
नगर पालिका द्वारा फरवरी माह का किया गया भुगतान
जांच में सामने आया कि हाजिरी रजिस्टर में केवल 38 कर्मचारियों की उपस्थिति दर्ज है, जबकि ठेकेदार द्वारा 46 कर्मचारियों का भुगतान लिया जा रहा है। कई कर्मचारी गैरहाजिर होने के बावजूद उनकी उपस्थिति दर्ज की जा रही है और कुछ मामलों में रिश्तेदारों के नाम जोड़कर फर्जी हाजिरी बनाई गई है। यह स्थिति “कागजों में सफाई, जमीन पर गंदगी” की कहावत को चरितार्थ करती नजर आ रही है।
वित्तीय आंकड़ों के अनुसार प्रति कर्मचारी ₹9000 वेतन के आधार पर कुल ₹5,67,958 प्रतिमाह का भुगतान किया जा रहा है। इसके अलावा ईपीएफ ₹53,820 और ईएसआई ₹13,455 जोड़ा जाए तो हर महीने लगभग ₹72,000 का अतिरिक्त भुगतान सामने आ रहा है, जो सालाना लाखों रुपये के संभावित घोटाले की ओर संकेत करता है। इस पूरे प्रकरण में सबसे बड़ा सवाल यह है कि 8 कर्मचारी कहां हैं। यदि वे मौजूद हैं तो रजिस्टर में नाम क्यों नहीं, और यदि नहीं हैं तो भुगतान किसे और क्यों किया जा रहा है।
सूत्रों के अनुसार बिना अधिकारियों की जानकारी के इतना बड़ा फर्जीवाड़ा संभव नहीं माना जा रहा है। ठेकेदार और जिम्मेदार अधिकारियों के बीच कमीशनखोरी की आशंका से भी इनकार नहीं किया जा सकता। इस बीच कस्बे में सफाई व्यवस्था बदहाल बनी हुई है। गली-मोहल्लों में गंदगी का अंबार है और नियमित सफाई का अभाव आमजन में असंतोष बढ़ा रहा है। एक ओर पूरा भुगतान हो रहा है, दूसरी ओर काम अधूरा है, जो सीधे तौर पर जनता के साथ अन्याय की स्थिति को दर्शाता है।
मामले में हाजिरी रजिस्टर की प्रतिलिपि, मासिक भुगतान का विवरण, ठेकेदार का अनुबंध एवं शर्तें, ईपीएफ एवं ईएसआई जमा रिकॉर्ड तथा कर्मचारियों की उपस्थिति और कार्यस्थल विवरण जैसे दस्तावेज महत्वपूर्ण जांच बिंदु माने जा रहे हैं।
कस्बेवासियों ने निष्पक्ष और उच्च स्तरीय जांच की मांग उठाई है। साथ ही दोषी अधिकारियों और ठेकेदार पर सख्त कार्रवाई, सरकारी राशि की रिकवरी और सफाई व्यवस्था को पारदर्शी बनाने की मांग की जा रही है। यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो मामला सरकारी धन के दुरुपयोग, भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और फर्जी दस्तावेज तैयार करने जैसे गंभीर अपराधों के अंतर्गत आ सकता है।
इस बीच पिछले दो दिनों से कस्बे में सफाई कार्य पूरी तरह ठप है। नगर पालिका में कथित घोटाले के बावजूद सफाई व्यवस्था के नाम पर कोई कार्य नहीं हो रहा है। आरोप है कि ठेकेदार फर्जी तरीके से भुगतान उठा रहा है, जिसमें अधिकारियों की मिलीभगत सामने आ रही है। सफाई कर्मचारियों को कम तनख्वाह दी जा रही है और नगर पालिका के कर्मचारी मनीष की हठधर्मिता के कारण कर्मचारी परेशान हैं। मावली में डेपुटेशन पर लगा एक कर्मचारी, जो अधिशासी अधिकारी का खास बताया जा रहा है, उसकी कार्यशैली को लेकर भी असंतोष है। आरोप है कि अधिकारी अपनी मर्जी से आते-जाते हैं, जिससे व्यवस्था और अधिक बिगड़ गई है।
स्थिति से परेशान सफाई कर्मचारियों ने दो दिनों से हड़ताल कर दी है। इस मामले में नगर पालिका अधिकारियों से संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उन्होंने फोन उठाना भी उचित नहीं समझा। पूरे घटनाक्रम ने मावली की सफाई व्यवस्था, प्रशासनिक जवाबदेही और वित्तीय पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

Pratahkal Bureau
प्रातःकाल ब्यूरो, प्रातःकाल न्यूज़ की वह समर्पित संपादकीय टीम है, जो सटीक, सामयिक और निष्पक्ष समाचार पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध है। हमारा ब्यूरो राजनीति, समाज, अर्थव्यवस्था और राष्ट्रीय मामलों में सत्यापित रिपोर्टिंग, गहन विश्लेषण और जिम्मेदार पत्रकारिता पर अपना ध्यान केंद्रित करता है।



