मावली: बड़ियार ग्राम पंचायत में मनरेगा घोटाला, बिना हाथों वाले व्यक्ति के नाम पर भी निकाला लाखों का बजट
मावली की बड़ियार ग्राम पंचायत में मनरेगा घोटाले का बड़ा खुलासा हुआ है। यहाँ बिना हाथों वाले व्यक्ति और गुजरात में नौकरी कर रहे लोगों के नाम पर लाखों का भुगतान उठाने का गंभीर मामला सामने आया है। भरत सिंह राव की शिकायत ने पंचायत प्रशासन और मेटों की मिलीभगत को उजागर किया है। पढ़िए कैसे पात्र मजदूरों का हक मारकर अपात्रों के खातों में सरकारी धन डाला जा रहा है।

मावली। राजस्थान के उदयपुर जिले की मावली तहसील के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत बड़ियार से भ्रष्टाचार का एक ऐसा सनसनीखेज मामला सामने आया है, जिसने सरकारी तंत्र की पारदर्शिता और ईमानदारी पर गंभीर सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं। महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा), जो गरीबों के हक और रोजगार का सबसे बड़ा सहारा मानी जाती है, यहाँ भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ती नजर आ रही है। ग्रामीणों और मुख्य शिकायतकर्ता भरत सिंह राव द्वारा किए गए खुलासे ने पंचायत प्रशासन और मेटों के बीच के उस गठजोड़ को उजागर कर दिया है, जो अपात्रों के जरिए सरकारी खजाने में बड़ी सेंध लगा रहे हैं।
इस फर्जीवाड़े का सबसे हृदयविदारक और चौंकाने वाला पहलू वह है जहाँ मानवीय संवेदनाओं को ताक पर रखकर एक दिव्यांग व्यक्ति के नाम का दुरुपयोग किया गया। रिकॉर्ड के मुताबिक, तेजराम गाडरी (जॉब कार्ड संख्या-176) को ₹59,979 का भुगतान किया गया है, जबकि वास्तविकता यह है कि तेजराम के दोनों हाथ ही नहीं हैं। बिना हाथों के शारीरिक श्रम करना किसी भी रूप में संभव नहीं है, फिर भी कागजों पर उन्हें मस्टररोल में उपस्थित दिखाकर भारी-भरकम राशि डकार ली गई। यह मामला केवल यहीं नहीं थमता; पंचायत में कार्यरत जल मित्र किशन गाडरी को भी नियमों के विरुद्ध ₹19,467 का अवैध भुगतान किया गया है। वहीं, मरतडी सरकारी स्कूल में पोषाहार बनाने वाली सुशीला कुंवर, जो पहले से ही सरकारी मानदेय प्राप्त कर रही हैं, उनके नाम पर भी ₹46,207 का मनरेगा भुगतान उठा लिया गया।
भ्रष्टाचार की जड़ें इतनी गहरी हैं कि जो लोग वर्तमान में राजस्थान में हैं ही नहीं, उनके खातों में भी मजदूरी का पैसा भेजा जा रहा है। शिकायत के अनुसार, कई ग्रामीण गुजरात में नौकरी कर रहे हैं और कभी कार्यस्थल पर उपस्थित नहीं हुए, लेकिन पंचायत प्रशासन और मेटों की मिलीभगत से उनकी फर्जी हाजिरी लगाई जा रही है। इतना ही नहीं, जो वास्तविक मजदूर कड़ी धूप में पसीना बहा रहे हैं, उनके साथ भी शोषण का खेल जारी है। आरोप है कि इन गरीब मजदूरों के साप्ताहिक भुगतान में से ₹200 की अवैध वसूली की जा रही है। ग्रामीणों का कहना है कि सरपंच द्वारा कुछ विशेष व्यक्तियों को जॉब कार्ड एकत्र करने के लिए नियुक्त किया गया है, जो अपने परिवार के सदस्यों के नाम पर फर्जी हाजिरी भरकर सरकारी धन का खुलेआम गबन कर रहे हैं।
इस व्यापक धांधली के कारण बड़ियार पंचायत के पात्र और जरूरतमंद श्रमिक अपने संवैधानिक हक से वंचित हो रहे हैं। शिकायतकर्ता भरत सिंह राव ने प्रशासन से पुरजोर मांग की है कि इस पूरे प्रकरण की उच्च स्तरीय जांच कमेटी गठित कर निष्पक्ष जांच करवाई जाए। उन्होंने फर्जीवाड़े में लिप्त मेटों को ब्लैक लिस्ट करने और भविष्य में पारदर्शिता के लिए श्रमिकों की उपस्थिति का आधार कार्ड से अनिवार्य सत्यापन करने की मांग उठाई है। अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस संगठित भ्रष्टाचार के खिलाफ क्या सख्त कदम उठाता है और दोषियों को सलाखों के पीछे भेज पाता है या नहीं।

Pratahkal Bureau
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