मावली (उदयपुर)। मावली उपखंड के जेवाणा ग्राम पंचायत स्थित बाल मेवाड़ आदर्श उच्च प्राथमिक विद्यालय में आयोजित 'विज्ञान एवं खाद्य मेले' ने क्षेत्र में बौद्धिक क्रांति का शंखनाद कर दिया है। शिक्षा और तकनीक के अद्भुत संगम वाले इस गरिमामयी कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ पदेन प्रारंभिक शिक्षा अधिकारी एवं राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय की प्रधानाचार्या श्रीमती गंगा विजयवर्गीय तथा संतोष जी सर के कर-कमलों द्वारा फीता काटकर किया गया। उद्घाटन के क्षणों से ही विद्यालय परिसर में बिखरी बच्चों की मुस्कान और उनके वैज्ञानिक दृष्टिकोण ने उपस्थित जनसमूह को यह सोचने पर मजबूर कर दिया कि प्रतिभा केवल महानगरों की मोहताज नहीं होती, बल्कि जेवाणा जैसे ग्रामीण आंचल की मिट्टी में भी असाधारण मेधा निवास करती है।

मेले का मुख्य आकर्षण विद्यार्थियों द्वारा निर्मित वे अत्याधुनिक वैज्ञानिक मॉडल रहे, जो भविष्य की तकनीक और वर्तमान की समस्याओं के समाधान की एक सजीव झांकी प्रस्तुत कर रहे थे। नन्हे वैज्ञानिकों ने श्वसन तंत्र की जटिल कार्यप्रणाली से लेकर ज्वालामुखी के विध्वंसक स्वरूप और सौरमंडल की अनंत गहराइयों को बड़े ही सजीव ढंग से मॉडल्स के माध्यम से प्रदर्शित किया। प्रदर्शनी में अपतित ड्रिलिंग, सेंसर ऑटो मशीन, वाटर प्यूरिफाइंग सिस्टम, जलचक्र और पृथ्वी पर दिन-रात होने की वैज्ञानिक प्रक्रिया जैसे विषयों पर केंद्रित प्रोजेक्ट्स ने विशेषज्ञों और अभिभावकों को दांतों तले उंगली दबाने पर मजबूर कर दिया।

इस अवसर पर ग्रामीणों का उत्साह चरम पर रहा। कार्यक्रम की भव्यता का साक्षी बनने के लिए रूपेंद्र व्यास, कुसुमलता व्यास, भैरूशंकर जाट, शंकर जाट, पूरण जाट, गोपाल जाट, दिनेश जाट, कालूलाल जाट, प्रभुलाल शर्मा, पुरण गाडरी, रमेश चौधरी, लियाकत हुसैन, गोवर्धन लोहार और बंसीलाल जाट सहित सैकड़ों ग्रामीण एवं मातृशक्ति उपस्थित रही। विद्यालय परिवार से देवकृष्ण पालीवाल, बाबूलाल जीनगर, भैरूलाल परमार, वीणा श्रीमाली, धापू लोहार, भागवन्ति सालवी, आशा लोहार, नेहा टांक, सीमा प्रजापत, अंजली प्रजापत और रानी श्रीमाली ने अपनी सक्रिय सहभागिता से आयोजन को सफल बनाया।

संस्था प्रधान ताराचंद पालीवाल ने इस सफल आयोजन पर हर्ष व्यक्त करते हुए कहा कि इस मेले का मुख्य उद्देश्य छात्रों के भीतर छिपी वैज्ञानिक चेतना को जागृत करना और उन्हें शोध की दुनिया के प्रति प्रेरित करना है। उन्होंने शिक्षकों और छात्रों के अथक परिश्रम की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे मंच छात्रों को नई दिशा खोजने का संकल्प दिलाते हैं। वहीं, विज्ञान शिक्षिका आशा लोहार ने मेले के महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया कि यह आयोजन केवल एक प्रतिस्पर्धा नहीं, बल्कि आलोचनात्मक सोच और रचनात्मकता को विकसित करने का एक सशक्त माध्यम है। इस आयोजन ने न केवल जेवाणा को एक नई पहचान दी है, बल्कि यह संदेश भी प्रसारित किया है कि यदि ग्रामीण क्षेत्र के बच्चों को सही मार्गदर्शन और अवसर मिले, तो वे वैश्विक स्तर पर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा सकते हैं।

Pratahkal Bureau

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