तालाब के अस्तित्व और राजस्व मंडल का निर्णय

उक्त जनहित याचिका के साथ पूर्व के तालाब के अस्तित्व के दस्तावेज एवं माननीय राजस्व मंडल अजमेर के निर्णय की प्रति प्रार्थना पत्र सहित प्रस्तुत की गई। इस निर्णय में स्पष्ट आदेश प्रदान किया गया था कि:

  • उद्यान विभाग के नाम पर दर्ज अंकन हटाया जावे।
  • उक्त भूमि को हेमसागर तालाब के नाम पुनः दर्ज किया जावे।

विवाद का इतिहास और कानूनी पृष्ठभूमि

हेमसागर तालाब पूर्व में सिंचाई विभाग के पास था, जिसे वर्ष 1956 में राज्य सरकार द्वारा उन्नत गेहूं के बीच उत्पादन हेतु कृषि विभाग को आवंटित किया गया था।

  • उक्त आवंटन नियमों के विरुद्ध होने से आवंटन अनुसार नामांकन कारण दर्ज किया गया किंतु स्वीकृत नहीं किया गया।
  • इसके बावजूद हेमसागर तालाब की भूमि कृषि विभाग के नाम पर जमाबंदी में दर्ज कर उसे खातेदारी अधिकार दे दिया गया, जो नियमों के विरुद्ध था।
  • राजस्व न्यायालय मावली में वर्ष 2007 से जन जागरण एवं ग्राम विकास मंच की ओर से कृषि विभाग के नाम खातेदारी को हटाने हेतु कानूनी लड़ाई लड़ी जा रही थी।

अब्दुल रहमान बनाम राज्य निर्णय का संदर्भ

हेमसागर तालाब की भूमि जल भराव क्षेत्र की भूमि किस्म तालाब भूमि होने से खातेदार अधिकार नहीं दिए जा सकते। उक्त तालाब भूमि माननीय उच्च न्यायालय राजस्थान जोधपुर के "अब्दुल रहमान बनाम राज्य में दिए गए निर्णय अनुसार, सन 1947 के बाद तालाब नदी नाले के स्वरूप में यदि कोई परिवर्तन हुआ है तो उसे पुनः उसी रूप में किया जावे।" इसकी पालना हेतु राज्य सरकार को तीन माह का समय दिया था। न्यायालय ने किस्म तालाब की भूमि में निजी खातेदारी या स्वामित्व के अधिकारों का प्रदान किया जाना पूर्णतया विधि विरुद्ध और गलत माना है।


राजस्व रिकॉर्ड में त्रुटियां और सुधार

अपील में राजस्व ग्राम मावली तहसील मावली के आराजी नंबर 557, 559, 561, 794 से 806, 4013, 4032, 4033/794 रकबा 322 बीघा 3 बिस्वा भूमि का विवरण दिया गया।

  • यह भूमि सन 1947 एवं इसके पश्चात राजस्व रिकॉर्ड में किस्म भूमि तालाब पेटा दर्ज थी।
  • जमाबंदी संवत 2060 से 2063 में यह भूमि प्रार्थी कृषि विभाग तहसील मावली के नाम से आवंटन होने से खातेदारी से दर्ज की गई जो बिल्कुल गलत है।
  • विवादित भूमि राजस्थान काश्तकारी अधिनियम 1955 की धारा 16 में वर्णित श्रेणी में है।

अतः उद्यान विभाग के नाम दर्ज विवादित आराजी व पश्चात राजस्व अभिलेख में किए गए इंद्राज को निरस्त करने हेतु रेफरेंस राजस्व मंडल में प्रस्तुत किया गया।


माननीय राजस्व मंडल अजमेर का अंतिम फैसला

माननीय राजस्व मंडल अजमेर ने रिकॉर्ड के आधार पर प्रथम दृष्टया यह साबित पाया कि वादग्रस्त भूमि उद्यान की खातेदारी में दर्ज होने से पहले गैर मुमकिन तालाब अंकित थी। "राजस्व विधियों एवं नियमों के अनुसार गैर मुमकिन तालाब पेटा किस्म की भूमि ना तो आवंटन या नियम हेतु उपलब्ध है और ना ही ऐसी भूमि में किसी भी खातेदारी अधिकारी मिल सकते हैं।"

विभिन्न विधिक प्रावधानों तथा प्रकरण अभिलेख के अवलोकन से माननीय न्यायालय राजस्व मण्डल अजमेर ने निर्णय किया कि:

  • तालाब भूमि में किसी भी प्रकार के खातेदारी इंद्राज प्रारंभ से ही प्रभाव शून्य एवं निरस्तनीय है।
  • उक्त रेफरेंस स्वीकार किया गया।
  • परिणामतः उद्यान विभाग एवं अन्य के नाम निजी खातेदारी को अतदद्वारा निरस्त किया गया।
  • वादग्रस्त भूमि को पूर्व अनुसार पुनः गैर मुमकिन तालाब पेटा दर्ज करने व संबंधी राजस्व अभिलेखों से उद्यान विभाग एवं अन्य के पक्ष में दर्ज समस्त अंकन को विलोपित किए जाने के आदेश प्रदान किए गए।

उच्च न्यायालय में एटॉर्नी जनरल की अंडरटेकिंग

उक्त निर्णय के प्रति मय ठोस आधार माननीय राजस्थान उच्च न्यायालय में प्रस्तुत करने पर प्रतिवादीगण की और से उपस्थित एटॉर्नी जनरल द्वारा अंडरटेकिंग दी गई कि "तालाब में अब दीवार की बजाय पिलर पर सड़क बनाई जाएगी।" इस पर माननीय उच्च न्यायालय ने उक्त अंडरटेकिंग को रिकॉर्ड पर लिया जाकर निर्णय दिया कि प्रतिवादिगण द्वारा उक्त अंडरटेकिंग की पालना सुनिश्चित की जाकर निर्माण किया जावे।


नगरवासियों में हर्ष की लहर

"माननीय न्यायालय राजस्थान उच्च न्यायालय के उक्त निर्णय से जन जागरण एवं नगर विकास मंच तथा समस्त नगरवासी प्रसन्न है कि मावली में स्थित हेमसागर तालाब को बचाने में सफल हुए जिससे प्रकृति को सुरक्षित किया जा सकेगा।"

मंच की और से जनहित याचिका निम्नलिखित सदस्यों द्वारा प्रस्तुत की गई:

  • पन्नालाल जीणावत
  • ललित कुमार वसीटा
  • अकिल अहमद
  • राधा कृष्ण शर्मा
Pratahkal Bureau

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