भारत सरकार के महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के तत्वावधान में संचालित 'बाल विवाह मुक्त भारत अभियान' के अंतर्गत राजस्थान के मावली क्षेत्र में सामाजिक चेतना की नई लहर देखी गई। विकल्प संस्थान एवं स्थानीय उपखंड प्रशासन के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस व्यापक जागरूकता कार्यक्रम ने ग्रामीण अंचलों में बाल विवाह जैसी गहरी जड़ें जमा चुकी सामाजिक कुरीति पर कड़ा प्रहार किया। अभियान के दौरान क्षेत्र के विभिन्न ग्रामों में नुक्कड़ नाटकों और शपथ ग्रहण समारोहों के माध्यम से भविष्य की नींव को सुरक्षित करने का आह्वान किया गया।

अभियान की कार्ययोजना के अनुसार, ग्राम लदानी, वासनी केला, ओग्णाखेड़ा एवं वासनी माफी में नुक्कड़ नाटकों का मंचन किया गया। कलाकारों ने अपनी मर्मस्पर्शी और प्रभावशाली प्रस्तुतियों के माध्यम से ग्रामीणों को बाल विवाह के गंभीर दुष्परिणामों, विशेषकर स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रतिकूल प्रभाव, शिक्षा में बाधा और सामाजिक पिछड़ेपन के प्रति सरल भाषा में जागरूक किया। इस दौरान पोस्टर, बैनर एवं पम्पलेट वितरित कर जनजागरूकता का प्रसार किया गया। कार्यक्रम की सफलता का प्रमाण तब मिला जब 985 किशोर-किशोरियों सहित ग्रामीणों ने स्वेच्छा से बाल विवाह रोकने का सामूहिक संकल्प लिया।

विशेष रूप से ग्राम लदानी स्थित राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय में प्रधानाचार्य ने विद्यार्थियों एवं उपस्थित ग्रामीणों को बाल विवाह न करने और समाज में इसे रोकने हेतु शपथ दिलाई। इस महत्वपूर्ण अवसर पर विकल्प संस्थान के प्रतिनिधि जितेन्द्र बिलवाल, मीना खटीक, रीना बंजारा, कुसुम, इंद्रा एवं कोमल योगेश्वरी सक्रिय रूप से उपस्थित रहे। आयोजकों ने स्पष्ट संदेश दिया कि बाल विवाह के विरुद्ध यह संघर्ष केवल कानूनी प्रक्रिया तक सीमित नहीं है, अपितु यह समाज की सामूहिक सोच और नैतिक जिम्मेदारी का विषय है। यदि ऐसे प्रयास निरंतर जारी रहे, तो प्रत्येक बच्चा बिना किसी सामाजिक बंधन के अपने सपनों को साकार कर सकेगा, जो इस अभियान का मूल उद्देश्य है।

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