मावली के आसोलिया की मादड़ी में ग्रामीणों ने किया 60 वृक्षों का रोपण
मावली के देवरा वनी परिसर में स्थानीय ग्रामीणों ने 'नीम नारायण संकल्प' के तहत 10 फीट ऊंचे पौधे लगाए, सुरक्षा के लिए फंड भी जुटाया।

तस्वीर में मावली के आसोलिया की मादड़ी गांव में ग्रामीण परिवार के साथ मिलकर वृक्षारोपण करते हुए दिख रहे हैं।
पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक अनुकरणीय मिसाल पेश करते हुए मावली के निकटवर्ती गांव आसोलिया की मादड़ी के निवासियों ने 'नीम नारायण संकल्प' के तहत एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है। स्थानीय देवरा वनी परिसर में आयोजित इस वृहद वृक्षारोपण कार्यक्रम के दौरान ग्रामीणों ने 10 फीट ऊंचाई वाले 60 परिपक्व वृक्षों का रोपण कर प्रकृति के प्रति अपने गहरे जुड़ाव को प्रदर्शित किया। भीषण गर्मी और तपती धूप को मात देते हुए गांव के हर वर्ग ने अपनी सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की, जिससे यह कार्यक्रम केवल एक वृक्षारोपण न रहकर पर्यावरण और आध्यात्मिक चेतना का महाकुंभ बन गया।
इस अनूठी पहल की नींव दस दिन पूर्व चित्तौड़गढ़ सांसद श्रीमान सी.पी. जोशी के कर-कमलों द्वारा कल्पवृक्ष का जोड़ा लगाकर रखी गई थी। उस समय उपजी प्रेरणा को मूर्त रूप देते हुए ग्रामीणों ने वृक्षों की सुरक्षा और रखरखाव हेतु स्वैच्छिक रूप से एक लाख पचास हजार रुपये का फंड एकत्रित किया है, जो समुदाय की दूरदर्शिता को दर्शाता है। ग्रामीणों के इस उत्साह और समर्पण से प्रभावित होकर सांसद श्री जोशी ने परिसर की सुरक्षा हेतु चारदीवारी का निर्माण कराने का आधिकारिक आश्वासन दिया है। यह सुरक्षा कवच भविष्य में इन पौधों को विशाल वृक्ष बनने तक सुरक्षित रखने की गारंटी प्रदान करेगा।
वृक्षारोपण के दौरान का दृश्य अत्यंत भावपूर्ण था, जहां लोग अपने परिवारों के साथ उपस्थित हुए और पेड़ों को तिलक लगाकर उनका वंदन किया। स्थानीय मातृशक्ति का विशेष सहयोग और गीतों की मधुर स्वर लहरियों के बीच दिनभर चलता रहा यह कार्य सामाजिक एकजुटता का प्रतीक बन गया। हल्की वर्षा की बूंदों ने भी इस पुनीत कार्य में अपनी सहभागिता दर्ज कराई। ग्रामीणों का यह सामूहिक प्रयास न केवल क्षेत्र को हरा-भरा बनाने के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि यह उन तमाम गांवों के लिए एक प्रेरणा दीप है जो पर्यावरण को बचाने के लिए निरंतर संघर्षरत हैं। आसोलिया की मादड़ी के निवासियों की यह जागरूकता यह सिद्ध करती है कि जब जनशक्ति एकनिष्ठ होकर किसी कार्य का बीड़ा उठाती है, तो वह न केवल पर्यावरण में सुधार लाती है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए एक हरित विरासत भी सुनिश्चित करती है।

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