मावली: बडियार ग्राम पंचायत में मनरेगा के नाम पर 'महाघोटाला', बिना हाथ वाले श्रमिक के नाम पर भी उठा लिए हजारों रुपये
मावली की बडियार ग्राम पंचायत में मनरेगा घोटाले का बड़ा खुलासा! बिना हाथ वाले व्यक्ति और सरकारी स्कूल की कुक के नाम पर भी उठा ली गई नरेगा की मजदूरी। भारत सिंह राव की शिकायत पर भ्रष्टाचार की खुली पोल, अब ग्रामीणों ने की उच्च स्तरीय जांच और दोषियों को ब्लैक लिस्ट करने की मांग। पढ़ें पूरी रिपोर्ट।

मावली। उदयपुर जिले की मावली तहसील के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत बडियार में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) योजना भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ती नजर आ रही है। ग्रामीणों ने इस योजना में बड़े स्तर पर वित्तीय अनियमितताओं और फर्जीवाड़े का आरोप लगाते हुए प्रशासन से उच्च स्तरीय जांच की गुहार लगाई है। भारत सिंह राव द्वारा उजागर की गई इस हकीकत ने सिस्टम की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं, जिसमें फर्जी हाजिरी से लेकर सरकारी कर्मचारियों तक को श्रमिक बताकर सरकारी खजाने में सेंध लगाने के सनसनीखेज दावे किए गए हैं।
शिकायत के अनुसार, भ्रष्टाचार का जाल इतना गहरा है कि गुजरात में रहने वाले लोगों के नाम पर भी यहां जॉब कार्ड बनवाकर नियमित रूप से भुगतान उठाया जा रहा है। सबसे चौंकाने वाला मामला तेजराम गाडरी का सामने आया है, जिनके दोनों हाथ नहीं हैं, फिर भी कागजों में उन्हें शारीरिक श्रम करते दिखाकर 59,979 रुपये का भुगतान कर दिया गया। यह अकेला मामला नहीं है; सरकारी सेवाओं में कार्यरत लोग भी मनरेगा की बहती गंगा में हाथ धो रहे हैं। सुशीलाकुंवर, जो मरतडी सरकारी स्कूल में पोषाहार बनाने का कार्य करती हैं और स्कूल से चेक के माध्यम से वेतन प्राप्त करती हैं, उनके नाम पर भी मनरेगा से 46,207 रुपये का भुगतान उठा लिया गया।
इतना ही नहीं, ग्राम पंचायत में जल मित्र के पद पर कार्यरत किशन गाडरी, जो पंचायत से 3,500 रुपये मासिक वेतन ले रहे हैं, उनके खाते में भी मनरेगा से 19,467 रुपये ट्रांसफर किए गए हैं। आरोप है कि किशन गाडरी अलग-अलग जॉब कार्डों का सहारा लेकर साल भर सरकारी धन की लूट में सहयोग कर रहे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि सरपंच ने प्रत्येक वार्ड में जॉब कार्ड एकत्रित करने के लिए विशेष लोग नियुक्त कर रखे हैं, जो अपने परिवार के सदस्यों के नाम पर फर्जी तरीके से काम दिखाकर मजदूरी हड़प रहे हैं। वहीं दूसरी ओर, वास्तविक जरूरतमंद मजदूरों को 100 दिन के रोजगार की गारंटी से वंचित रखा जा रहा है और काम करने वाले श्रमिकों की मजदूरी से भी प्रति सप्ताह 200 रुपये की अवैध वसूली की जा रही है।
इस पूरे प्रकरण को लेकर ग्रामीणों में भारी आक्रोश है। मांग की गई है कि एक विशेष जांच कमेटी का गठन कर इस पूरे घोटाले की तह तक जाया जाए। दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्यवाही करने, फर्जीवाड़े में शामिल मेटों को ब्लैक लिस्ट करने और जॉब कार्ड धारकों की उपस्थिति का आधार कार्ड एवं फोटो से भौतिक सत्यापन कराने की मांग प्रमुखता से उठाई गई है। अब देखना यह है कि प्रशासन इन पुख्ता सबूतों के बाद बडियार पंचायत के जिम्मेदार पदों पर बैठे लोगों पर क्या शिकंजा कसता है।

Pratahkal Bureau
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