गेंदे की खेती से किसान परिवार ने बदली पारंपरिक राह, फसल विविधीकरण से आय बढ़ने की उम्मीद
खेरवाड़ा के गुड़ा गांव में किसान सरला देवी और नरेश बरंडा ने पारंपरिक खेती के साथ गेंदे की खेती अपनाई। सीएमएस के मार्गदर्शन से शुरू हुई इस पहल से अतिरिक्त आय और बाजार आधारित खेती की उम्मीद जगी है।

तस्वीर में खेत के बीच गेंदे के पौधों के पास खड़ीं महिला किसान सरला देवी और अन्य ग्रामीण नजर आ रही हैं।
खेरवाड़ा, नयागाँव ब्लॉक के गुड़ा निवासी किसान सरला देवी एवं नरेश बरंडा ने पारंपरिक खेती के साथ गेंदे के फूल की खेती अपनाकर फसल विविधीकरण की दिशा में पहल की है। किसान परिवार ने सीएमएस के मार्गदर्शन एवं सहयोग से अपने खेत में गेंदे की खेती शुरू की।
नियमित सिंचाई, निराई-गुड़ाई, पौधों की देखभाल और उचित कृषि प्रबंधन के परिणामस्वरूप खेत में गेंदे के पौधों पर अच्छी फूल-फसल तैयार हुई है। स्थानीय बाजार में गेंदे के फूलों की मांग को देखते हुए किसान परिवार को इससे अतिरिक्त आय प्राप्त होने की उम्मीद है। त्योहारों, धार्मिक आयोजनों और सामाजिक कार्यक्रमों के दौरान फूलों की मांग बढ़ने से किसानों के लिए बेहतर बाजार की संभावना भी रहती है।
किसान सरला देवी ने बताया कि केवल पारंपरिक फसलों पर निर्भर रहने के बजाय बाजार की मांग के अनुरूप नई फसलों को अपनाना जरूरी है। गेंदे की खेती से उन्हें कृषि में नया अनुभव मिला है और भविष्य में इसे बड़े स्तर पर करने की उम्मीद है।
सीएमएफ की ओर से किसानों को फसल विविधीकरण, जलवायु-स्मार्ट कृषि एवं आयवर्धक गतिविधियों से जोड़ने के प्रयास किए जा रहे हैं। सरला देवी एवं नरेश बरंडा की गेंदे की खेती इसी दिशा में एक उदाहरण बनकर सामने आई है।
किसान परिवार की इस पहल से गांव के अन्य किसान भी प्रेरित होकर फूलों सहित अन्य बाजार आधारित फसलों की खेती की ओर आकर्षित हो रहे हैं। यह पहल बताती है कि उचित मार्गदर्शन, मेहनत और बाजार की समझ के साथ खेती को आय का बेहतर माध्यम बनाया जा सकता है।

Dinesh Kumar Jain, Kherwara(Udaipur)
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