मानगढ़ धाम: राष्ट्रीय स्मारक घोषित करने की उठी मांग
वनवासी कल्याण परिषद ने राष्ट्रपति और पीएम के नाम उपखंड अधिकारी को सौंपा ज्ञापन, भील समाज के बलिदान को राष्ट्रीय पहचान देने की मांग

खेरवाड़ा में मानगढ़ धाम को राष्ट्रीय स्मारक घोषित करने की मांग को लेकर उपखंड अधिकारी को ज्ञापन सौंपते राजस्थान वनवासी कल्याण परिषद के प्रतिनिधि।
खेरवाड़ा में वागड़ के जलियांवाला बाग कहे जाने वाले मानगढ़ धाम को राष्ट्रीय स्मारक घोषित करने की मांग को लेकर राजस्थान वनवासी कल्याण परिषद ने आवाज उठाई है। परिषद के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल ने राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री के नाम उपखंड अधिकारी को ज्ञापन सौंपकर मानगढ़ धाम के ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक महत्व के अनुरूप इसके संरक्षण और विकास की मांग की।
ज्ञापन में बताया गया कि मानगढ़ धाम की घटना जलियांवाला बाग हत्याकांड से भी छह वर्ष पूर्व हुई थी और इसे उससे भी अधिक विभत्स एवं हृदय विदारक घटनाओं में से एक माना जाता है। जलियांवाला बाग हत्याकांड में आधिकारिक रूप से 379 लोगों की जान गई थी। ज्ञापन में मानगढ़ धाम के संघर्ष और बलिदानों को राष्ट्रीय इतिहास में उचित पहचान दिलाने की आवश्यकता पर जोर दिया गया।
ज्ञापन के अनुसार, दक्षिण राजस्थान के भील समाज का यह आंदोलन अपनी राष्ट्रीय अस्मिता की रक्षा, सामंती शोषण तथा जबरन धर्मांतरण की गतिविधियों के प्रतिकार के उद्देश्य से हुआ था। मानगढ़ धाम पर जनजाति समुदाय ने स्वतंत्रता और अपनी अस्मिता की रक्षा के लिए संघर्ष किया तथा बलिदान दिए। इन ऐतिहासिक घटनाओं और बलिदानों को ध्यान में रखते हुए राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग द्वारा भी उक्त स्थल को धरोहर के रूप में मान्यता प्रदान किए जाने की संस्तुति की जा चुकी है।
प्रतिनिधिमंडल ने मांग की कि मानगढ़ धाम को राष्ट्रीय स्मारक घोषित किया जाए तथा इसके ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व को देखते हुए स्थल का संरक्षण एवं विकास सुनिश्चित किया जाए। इससे मानगढ़ धाम से जुड़े जनजातीय संघर्ष और बलिदानों को राष्ट्रीय स्तर पर उचित पहचान मिल सकेगी।
ज्ञापन देने पहुंचे प्रतिनिधिमंडल में क्षेत्र के पूर्व विधायक नानालाल अहारी, पूर्व प्रधान अमृतलाल डामोर, वनवासी कल्याण परिषद की प्रांतीय उपाध्यक्ष माया परमार, जिला संरक्षक विमल कोठारी, जनजाति सुरक्षा मंच के जिला संयोजक शंकर लाल डामोर, जनजाति सुरक्षा मंच की सह जिला संयोजक लक्ष्मी देवी आहारी, वनवासी कल्याण परिषद के संपर्क प्रमुख सुभाष फेरा, जिला संगठन मंत्री ईश्वरलाल आमलिया, समाजसेवी पारस जैन, तहसील अध्यक्ष दिनेश अहारी, राजेंद्र दरंगा, गोविंद गरासिया, बजरंग अग्रवाल, विक्रांत कोठारी, अमित कलाल, प्रमोद अग्रवाल और सुरेश पलात सहित वनवासी कल्याण परिषद के बड़ी संख्या में सदस्य उपस्थित रहे।

Dharnendra Jain( Kherwara)
नाम: धरणेन्द्र जैन
वर्तमान पद: सीनियर रिपोर्टर (प्रातः काल दैनिक, खेरवाड़ा विधानसभा)
कार्यक्षेत्र: खेरवाड़ा विधानसभा क्षेत्र (खेरवाड़ा, ऋषभदेव, और नयागांव उपखंड क्षेत्र, जिला उदयपुर, राजस्थान)
बीट (मुख्य विषय): राजनीति, क्राइम, प्रशासन सहित सभी क्षेत्रों की खबरें
अनुभव: 30 वर्ष से अधिक
परिचय
धरणेन्द्र जैन उदयपुर जिले के खेरवाड़ा विधानसभा क्षेत्र के एक अत्यंत अनुभवी और वरिष्ठ पत्रकार हैं। वर्तमान में वह 'प्रातः काल दैनिक' में सीनियर रिपोर्टर के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। वह मुख्य रूप से खेरवाड़ा, ऋषभदेव और नयागांव उपखंड क्षेत्र को कवर करते हैं। धरणेन्द्र जैन राजनीति, क्राइम, स्थानीय प्रशासन सहित क्षेत्र के सभी प्रमुख विषयों पर नियमित रूप से समाचार लिखते हैं।
पत्रकारिता का अनुभव (Work Experience)
धरणेन्द्र जैन को पत्रकारिता के क्षेत्र में तीन दशकों (30 वर्ष) से अधिक का व्यापक और लंबा अनुभव है:
- वह साल 1995 से पत्रकारिता क्षेत्र में निरंतर कार्यरत हैं।
- उन्होंने वर्ष 1998 से 2018 तक लगातार 20 वर्षों तक 'दैनिक भास्कर' में खेरवाड़ा विधानसभा क्षेत्र के लिए सीनियर रिपोर्टिंग की है।
- वर्ष 2018 से वह लगातार 'प्रातः काल' समाचार पत्र से जुड़े हुए हैं और क्षेत्र की कमान संभाल रहे हैं।
शैक्षणिक योग्यता (Education)
उन्होंने वाणिज्य स्नातक (B.Com) की डिग्री हासिल की है।
