पारिवारिक न्यायालय संख्या-1 के एक महत्वपूर्ण निर्णय में पीठासीन अधिकारी व न्यायाधीश पलविन्दर सिंह ने दण्ड प्रक्रिया संहिता की धारा 125 के तहत दायर पत्नी की भरण-पोषण याचिका को खारिज कर दिया। अदालत ने स्पष्ट किया कि जहां पत्नी के पास स्वयं के आय के पर्याप्त साधन मौजूद हैं, वहीं पति शारीरिक रूप से अक्षम होकर दूसरों के रहमोकरम पर जीवन यापन कर रहा है।

प्रार्थीया श्रीमती गजरी बाई ने अपने पति मांगीलाल के विरुद्ध प्रतिमाह 20,000 रुपये भरण-पोषण की मांग करते हुए याचिका प्रस्तुत की थी। याचिका में आरोप लगाया गया कि पति शराब के नशे में मारपीट करता है और उसे घर से निकाल दिया है। साथ ही दावा किया गया कि मांगीलाल चिनाई, ठेकेदारी और खेती के माध्यम से हर महीने लगभग 70 से 80 हजार रुपये कमाता है।

विपक्षी मांगीलाल की ओर से न्यायमित्र श्री भरत प्रजापत और गणेश चौहान ने अदालत में सशक्त पैरवी की। बचाव पक्ष ने तर्क दिया कि पुत्र की मृत्यु के बाद गजरी बाई ने ही मांगीलाल को घर से बाहर निकालकर मकान पर कब्जा कर लिया। न्यायमित्रों ने साक्ष्यों के माध्यम से यह भी स्थापित किया कि पत्नी उसी मकान में रह रही है, जहां वह पिछले 8 से 10 वर्षों से आटा चक्की संचालित कर रही है तथा मकान के 4 से 5 कमरे किराए पर देकर अपनी आजीविका सुचारु रूप से चला रही है।

सुनवाई के दौरान न्यायालय ने प्रस्तुत साक्ष्यों का गहन अवलोकन किया और पति की दयनीय स्थिति पर विशेष ध्यान दिया। रिकॉर्ड में यह सामने आया कि मांगीलाल के दाहिने हाथ की तीन उंगलियां कटी हुई हैं, जिससे वह शारीरिक रूप से अक्षम है और चिनाई या मजदूरी जैसे कार्य करने में असमर्थ है। इसके अतिरिक्त, पुत्र की मृत्यु के बाद वह मानसिक रूप से विक्षिप्त हो गया है और वर्तमान में खेरादीवाड़ा स्थित रामदेवरा मंदिर में शरण लिए हुए है। वह मंदिर परिसर में सीमित रूप से साफ-सफाई का कार्य करता है और पूरी तरह से श्रद्धालुओं तथा आसपास के लोगों द्वारा दिए गए भोजन पर निर्भर है; कई बार उसे भूखे रहना भी पड़ता है।

सभी तथ्यों और साक्ष्यों के सम्यक परीक्षण के बाद न्यायालय ने निष्कर्ष निकाला कि प्रार्थीया पत्नी के पास स्वयं के भरण-पोषण के पर्याप्त साधन उपलब्ध हैं, जबकि विपक्षी पति के पास आय का कोई स्रोत नहीं है और वह जीवित रहने के लिए पूर्णतः दूसरों पर आश्रित है। इन परिस्थितियों को दृष्टिगत रखते हुए न्यायालय ने 16 अप्रैल 2026 को गजरी बाई की भरण-पोषण याचिका को अस्वीकार करते हुए खारिज कर दिया। यह निर्णय भरण-पोषण मामलों में वास्तविक आर्थिक स्थिति और साक्ष्यों के महत्व को रेखांकित करता है।

Pratahkal Bureau

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