सुखविपाक सूत्र: युवाचार्य महेन्द्र ऋषि ने कहा- आत्मिक शांति में ही सच्चा सुख
पावनधाम में आयोजित धर्मसभा में श्रद्धालुओं ने श्रमणसंघीय युवाचार्य महेन्द्र ऋषिजी म.सा. को आदर की चादर ओढ़ाकर भावभीना वंदन व सम्मान किया।

फतहनगर के अम्बेश गुरु मेमोरियल संस्थान पावनधाम में आयोजित धर्मसभा के दौरान श्रमणसंघीय युवाचार्य महेन्द्र ऋषिजी महाराज साहिब (दाएं से दूसरे) को आदर की चादर ओढ़ाकर सम्मानित करते संस्थान के पदाधिकारी और श्रद्धालु।
अम्बेश गुरु मेमोरियल संस्थान पावनधाम में शुक्रवार को आयोजित धर्मसभा में श्रमणसंघीय युवाचार्य महेन्द्र ऋषिजी म.सा. ने सुखविपाक सूत्र का गहन विवेचन करते हुए कहा कि जीवन का वास्तविक आनंद बाहरी वैभव, भौतिक साधनों और क्षणिक सुविधाओं में नहीं, बल्कि आत्मा की शांति, संयम, सद्कर्म और पुण्य जागरण में निहित है। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में मनुष्य सुख की तलाश बाहरी साधनों में कर रहा है, जबकि वास्तविक सुख का स्रोत आत्मिक निर्मलता और अंतर्मन का संतुलन है।
युवाचार्यश्री ने कहा कि सुखविपाक सूत्र यह संदेश देता है कि पूर्व जन्मों और वर्तमान जीवन में किए गए शुभ कर्मों का परिणाम ही जीवन में सुख, शांति और अनुकूलता के रूप में प्राप्त होता है। जब व्यक्ति धर्म, दया, विनम्रता, सेवा, त्याग और संयम को जीवन में स्थान देता है, तभी उसके भीतर आत्मिक आनंद का उदय होता है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि केवल धन, पद और प्रतिष्ठा से स्थायी सुख प्राप्त नहीं किया जा सकता। यदि मन अशांत हो, विचार विकृत हों और व्यवहार कठोर हो, तो बाहरी उपलब्धियां भी जीवन को आनंदमय नहीं बना सकतीं।
धर्मसभा को संबोधित करते हुए युवाचार्यश्री ने कहा कि सुखविपाक सूत्र कर्म सिद्धांत की गहराई को उजागर करता है। “जैसा कर्म, वैसा परिणाम” इसी मूल संदेश को यह सूत्र प्रतिपादित करता है। शुभ भाव, मधुर व्यवहार, करुणा और धर्म आराधना जीवन को सुखमय बनाते हैं, जबकि क्रोध, अहंकार, लोभ और हिंसा अंततः दुःख का कारण बनते हैं। उन्होंने कहा कि आज आवश्यकता इस बात की है कि व्यक्ति बाहरी प्रतिस्पर्धा से अधिक अपने अंतर्मन को सुधारने का प्रयास करे। आत्मचिंतन, स्वाध्याय और धर्म साधना ही जीवन को वास्तविक आनंद और संतोष प्रदान कर सकती है।
इस दौरान धर्मसभा में अम्बेश-सौभाग्य-मदन परम्परा का नेतृत्व कर रहे उपप्रवर्तक कोमल मुनिजी एवं हर्षित मुनिजी म.सा. आदि ठाणा की पावन निश्रा में अम्बेश गुरु मेमोरियल संस्थान पावनधाम की ओर से पावनधाम प्रमुख प्रकाशचन्द सिंघवी, महामंत्री दिनेश सिंघवी, नितिन सेठिया, पारसमल बाफना, गणेश मेहता, आशीष पीपाड़ा, मनोज कोठारी, निलेश पोखरणा और बाबूलाल उनिया सहित अनेक श्रद्धालुओं ने युवाचार्य महेन्द्र ऋषिजी म.सा. को आदर की चादर ओढ़ाकर भावभीना वंदन-सम्मान किया।
कार्यक्रम में हितमित भाषी हितेन्द्र ऋषिजी म.सा., उपप्रवर्तिनी दिव्यज्योति जी म.सा., वर्धमान तप आराधिका प्रफुला जी m.सा., उपप्रवर्तिनी विजयप्रभा जी म.सा., उपप्रवर्तिनी मंजूल ज्योति जी म.सा., महासती शीतलजी एवं साध्वी एष्णा श्रीजी म.सा. ने “केसरिया… केसरिया…” की मंगलमयी स्वर लहरियों के बीच भावपूर्ण अनुमोदना प्रदान की।
कार्यक्रम के दौरान युवाचार्य महेन्द्र ऋषिजी म.सा. ने उपप्रवर्तिनी विजयप्रभा जी म.सा. को आदर की चादर प्रदान कर सम्मानित किया। वहीं विजयप्रभा जी महासती एवं विद्याश्री जी ने प्रमुख साध्वीवृंद को शॉल ओढ़ाकर अभिनंदन किया।
धर्मसभा के अंत में पावनधाम संस्थान के प्रमुख प्रकाशचन्द सिंघवी के नेतृत्व में पदाधिकारियों ने वर्ष 2028 में फतहनगर स्थित अम्बेश गुरु मेमोरियल संस्थान पावनधाम में युवाचार्य महेन्द्र ऋषिजी म.सा. आदि ठाणा के चातुर्मास हेतु जोरदार विनती रखी। साथ ही जानकारी दी गई कि युवाचार्य महेन्द्र ऋषिजी म.सा. के नियमित प्रवचन प्रतिदिन प्रातः 9 बजे से 10 बजे तक पावनधाम में आयोजित होंगे। धार्मिक आस्था, गुरु भक्ति और आत्मजागरण से ओतप्रोत यह आयोजन श्रद्धालुओं के लिए आध्यात्मिक प्रेरणा का केंद्र बना रहा।

Pratahkal Bureau
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