उदयपुर। भारतीय संस्कृति के पुनर्जागरण की भावना को साकार करते हुए संत आसाराम बापू द्वारा प्रेरित श्री योग वेदान्त सेवा समिति के तत्वावधान में शुक्रवार को महर्षि दधीचि विद्यालय, उदयपुर में दिव्य प्रेरणा प्रकाश ज्ञान प्रतियोगिता का भव्य आयोजन किया गया। इस ज्ञानोत्सव में शहर और आसपास के क्षेत्रों से सैकड़ों बालक-बालिकाओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।

प्रतियोगिता की तैयारी के लिए एक माह पूर्व प्रतिभागियों को ‘दिव्य प्रेरणा प्रकाश’ महान ग्रंथ अध्ययन हेतु प्रदान किया गया था। प्रतियोगिता के दिन बच्चों ने उसी ग्रंथ से संबंधित प्रश्नोत्तरी के उत्तर देकर अपने अध्ययन, एकाग्रता और संस्कृति के प्रति समर्पण का परिचय दिया।

श्री योग वेदान्त सेवा समिति के अध्यक्ष शंकर तेजवानी ने बताया कि यह प्रतियोगिता न केवल उदयपुर में, बल्कि पूरे भारतवर्ष में आयोजित की जा रही है और इसे प्रतिवर्ष परंपरागत रूप से जारी रखा जाएगा। उन्होंने कहा कि इस आयोजन का प्रमुख उद्देश्य देश के बच्चों को भारतीय संस्कृति की ओर उन्मुख करना और विदेशी जीवनशैली के अंधानुकरण से दूर रखकर उन्हें ब्रह्मचर्य, संस्कार और आत्मानुशासन की दिशा में प्रेरित करना है।

कार्यक्रम के दौरान आश्रम संचालिका साध्वी सुशीला दीदी ने बच्चों को संबोधित करते हुए कहा कि यदि विद्यार्थी कम आयु में ही ब्रह्मचर्य का महत्व समझ लें, तो वे भविष्य में स्वामी विवेकानंद और महर्षि दयानंद सरस्वती जैसे महान व्यक्तित्व बन सकते हैं। उन्होंने बच्चों को सत्संग, साधना और सद्ग्रंथों के अध्ययन को जीवन का अभिन्न हिस्सा बनाने की प्रेरणा दी।

कार्यक्रम का समापन उत्साह और प्रेरणा से भरे माहौल में हुआ। आयोजकों ने यह विश्वास जताया कि इस प्रकार की प्रतियोगिताएँ आने वाली पीढ़ियों में भारतीय संस्कृति के प्रति गौरव और नैतिक मूल्यों के प्रति आस्था को पुनर्स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएँगी।

Pratahkal Bureau

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