तुलसी अमृत संस्थान में आयोजित कार्यक्रम में विद्यार्थियों ने कविता पाठ किया और वक्ताओं ने महाराणा प्रताप के सामाजिक सद्भाव व सांस्कृतिक योगदान पर प्रकाश डाला।

Maharana Pratap की वीरता, त्याग और राष्ट्रभक्ति के प्रसंगों से शनिवार को कानोड का वातावरण गुंजायमान रहा। नगर पालिका क्षेत्र स्थित तुलसी अमृत निकेतन संस्थान द्वारा संचालित तुलसी अमृत उच्च प्राथमिक विद्यालय में राणा प्रताप जयंती श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाई गई। कार्यक्रम की अध्यक्षता रेखा त्रिपाठी ने की, जबकि प्रथम सहायक लक्ष्मण सिंह मुख्य अतिथि एवं प्रधानाध्यापक दीपक शर्मा मुख्य वक्ता रहे।

कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों ने महाराणा प्रताप के जीवन से जुड़े विभिन्न प्रसंगों पर आधारित कविताएं प्रस्तुत कर शौर्य, स्वाभिमान और मातृभूमि के प्रति समर्पण का संदेश दिया। मुख्य वक्ता प्रधानाध्यापक दीपक शर्मा ने महाराणा प्रताप के संघर्षपूर्ण जीवन का उल्लेख करते हुए कहा कि सर्वस्व अर्पण करने के बाद भी उनके मन में मातृभूमि के लिए और अधिक समर्पण का भाव बना रहा। इसी प्रसंग को जोड़ते हुए उन्होंने “तन समर्पित, मन समर्पित...” गीत भी सुनाया।

दीपक शर्मा ने कहा कि महाराणा प्रताप का अभावपूर्ण जीवन भी आजादी के मार्ग में बाधा नहीं बन सका। उन्होंने Hakim Khan Sur का प्रसंग सुनाते हुए बताया कि प्रताप सामाजिक सद्भाव और सौहार्दपूर्ण व्यक्तित्व के महान पोषक थे। उन्होंने महाराणा प्रताप के कलात्मक और सांस्कृतिक जीवन से जुड़े अनेक प्रसंगों का उल्लेख करते हुए कहा कि उनके दरबारी पंडित Pandit Chakrapani महान भूगर्भ शास्त्री थे, जिन्होंने हरवी पद्धति विकसित की, जिसका उपयोग आज आधुनिक युग में भी किया जा रहा है।

कार्यक्रम का संचालन गजेंद्र सिंह ने किया। विद्यालय परिसर में आयोजित इस आयोजन ने विद्यार्थियों और उपस्थितजनों के बीच राष्ट्रभक्ति, त्याग और सामाजिक समरसता का संदेश प्रभावी रूप से पहुंचाया।

Pratahkal Bureau

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