कानोड़ निवासी महज 14 वर्ष की अल्पायु में नन्हे तपस्वी श्री महाक्रम जारोली, आत्मज श्री विक्रम जी जारोली ने इस वर्ष चैत्री नवपद ओली तप की कठिन आराधना को सानंद संपन्न कर समाज का गौरव बढ़ाया है। महज 14 वर्ष की वय में नन्हे तपस्वी श्री महाक्रम जारोली ने इस वर्ष चेत्री नवपद ओली तप आराधना सानंद सम्पन्न की है।

रसनेंद्रिय पर विजय और प्रेरणा

जैन धर्म में रसनेंद्रिय पर विजय पाना अत्यंत दुष्कर कार्य माना जाता है, जिसे महाक्रम ने अपनी दृढ़ इच्छाशक्ति से सिद्ध किया। "बड़ा ही कठिन होता है रसनेंदि पर विजय पाना !" उन्होंने यह प्रेरणा अपनी दादी जी श्रीमती कंचनलता से प्राप्त की। "इन्होंने अपनी दादी जी श्रीमती कंचनलता से प्रेरित होकर ये पांचों विग्रह त्याग करने की मन में ठानी और सानंद मुस्कराते हुए चेत्री नवपद आराधना पूरी की!"

समाज में हर्ष की लहर

इस अद्भुत तपस्या की जानकारी मिलते ही पूरे क्षेत्र में हर्ष का माहौल है। जैन समाज के श्रावक श्राविकाओं ने आपके उत्तम स्वास्थ्य की कामना करते हुए, आपके तप त्याग में उत्तरोत्तर प्रगति की मंगल कामना की है। महाक्रम जारोली की इस तपस्या की चहुंओर बहुत बहुत अनुमोदना की जा रही है।

Pratahkal Bureau

Pratahkal Bureau

प्रातःकाल ब्यूरो, प्रातःकाल न्यूज़ की वह समर्पित संपादकीय टीम है, जो सटीक, सामयिक और निष्पक्ष समाचार पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध है। हमारा ब्यूरो राजनीति, समाज, अर्थव्यवस्था और राष्ट्रीय मामलों में सत्यापित रिपोर्टिंग, गहन विश्लेषण और जिम्मेदार पत्रकारिता पर अपना ध्यान केंद्रित करता है।

Next Story