लुनावतो का खेड़ा में श्री हरिहर बालाजी मंदिर की चौथी वर्षगांठ संपन्न
लुनावतो का खेड़ा गांव में बालयोगी महंत निरंजन गिरी जी महाराज के सानिध्य में आयोजित धार्मिक महोत्सव में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए।

तस्वीर में लुनावतो का खेड़ा में श्री हरिहर बालाजी मंदिर की वर्षगांठ पर आयोजित शोभायात्रा के दौरान महंत निरंजन गिरी जी महाराज और उपस्थित ग्रामीण दिख रहे हैं।
लुनावतो का खेड़ा गांव में आध्यात्मिक ऊर्जा का अभूतपूर्व संगम देखने को मिला, जहाँ श्री हरिहर बालाजी मंदिर की चतुर्थ वर्षगांठ के उपलक्ष्य में आयोजित भव्य धार्मिक महोत्सव ने समूचे क्षेत्र को भक्ति के रंग में रंग दिया। श्री श्री 1008 बालयोगी महंत निरंजन गिरी जी महाराज के दिव्य सानिध्य में संपन्न हुए इस आयोजन ने न केवल आस्था की एक नई मिसाल कायम की, बल्कि सामाजिक एकता और सामूहिक सहभागिता के एक प्रेरक अध्याय का भी सूत्रपात किया।
महोत्सव का शुभारंभ एक भव्य कलश यात्रा के साथ हुआ, जिसमें लगभग 250 महिलाओं और श्रद्धालुओं ने पूरी श्रद्धा के साथ सहभागिता की। भक्ति गीतों की स्वर लहरियों और धर्मपरायण नारों के बीच निकली इस यात्रा का ग्रामीणों द्वारा विभिन्न स्थानों पर भावभीनी अगवानी की गई। धार्मिक अनुष्ठानों के क्रम में सुंदरकांड पाठ का आयोजन किया गया, जिसने वातावरण को आध्यात्मिक गरिमा से ओतप्रोत कर दिया।
सांस्कृतिक संध्या के रूप में आयोजित भजन संध्या कार्यक्रम इस उत्सव का मुख्य आकर्षण रही। प्रसिद्ध भजन गायक नारायण लोलावत एवं हरीश जोशी (झाड़ोल) की मखमली आवाज़ में प्रस्तुत भजनों ने उपस्थित जनसमूह को भाव-विभोर कर दिया। देर रात तक भक्तजन भक्ति के सागर में गोते लगाते रहे और पूरा परिसर जयकारों से गुंजायमान रहा। आयोजन के समापन पर आयोजित महाप्रसादी में लगभग 1500 श्रद्धालुओं ने सम्मिलित होकर प्रसाद ग्रहण किया। व्यवस्थाओं के सुचारू संचालन के लिए ग्रामीणों और आयोजन समिति द्वारा किए गए प्रबंधों की व्यापक सराहना की गई।
इस गौरवपूर्ण आयोजन को मूर्त रूप देने में प्रवीण पोरवाल, शंकर गायरी, हितेश, वीरमदेव, रणजीत सिंह, शेर सिंह राणावत, भंवर सिंह, किशन वेद, भूरी लाल, मोहन सिंह, मोहन पुर्बिया, विमला, हेमराज पटेल, अनिल नाथ और हरजी राम समेत समस्त ग्रामवासियों का योगदान अविस्मरणीय रहा। आयोजन समिति ने सभी आगंतुकों और सहयोगियों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की। यह धार्मिक महोत्सव केवल एक आयोजन तक सीमित न रहकर, भविष्य के लिए सामाजिक समरसता और सामूहिक उत्तरदायित्व का एक सशक्त प्रतीक बनकर उभरा है।

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