उदयपुर। देव उठनी एकादशी के पावन अवसर पर शनिवार को भगवान विष्णु चार माह की योगनिद्रा से जागे, जिसके साथ ही शुभ व मांगलिक कार्यों का आरंभ हो गया। चार महीने तक चलने वाले चातुर्मास के समापन के बाद अब विवाह, गृह प्रवेश, यज्ञोपवीत, मुंडन संस्कार और नए व्यवसायों की शुरुआत जैसे मांगलिक आयोजन पूरे उत्साह के साथ प्रारंभ होंगे।

शहर में देव उठनी एकादशी की सुबह से ही धार्मिक उल्लास का वातावरण देखने को मिला। मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना की गई, तो श्रद्धालु भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की आराधना में लीन नजर आए। परंपरा के अनुसार, देवशयन एकादशी से देवउठनी एकादशी तक भगवान विष्णु योगनिद्रा में रहते हैं, और उनके जागरण के साथ ही शुभ कार्यों पर लगी रोक समाप्त मानी जाती है।

देव उठनी एकादशी के साथ ही शादियों का सीजन भी जोर पकड़ने लगा है। इस वर्ष विवाह के सात से आठ शुभ मुहूर्त होने के कारण उदयपुर के बाजारों में खास चहल-पहल देखने को मिल रही है। बाजारों में कपड़ा, ज्वेलरी, इलेक्ट्रॉनिक्स और गिफ्ट आइटम्स की दुकानों पर खरीदारों की भीड़ उमड़ रही है। व्यापारियों के चेहरों पर लंबे समय बाद रौनक लौट आई है।

शहर के टेंट हाउस, हलवाई, मैरिज गार्डन और डेकोरेटरों की बुकिंग पहले ही फुल हो चुकी है। ज्योतिषियों और पंडितों के पास भी मांग बढ़ गई है, जिनकी तिथियों की बुकिंग कई सप्ताह पहले ही पूरी हो चुकी थी।

देव उठनी एकादशी का आगमन न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि यह सामाजिक और पारिवारिक उत्सवों की नई शुरुआत का भी संकेत देता है। विष्णु जागरण के साथ ही पूरा शहर फिर से मांगलिक उल्लास में सराबोर हो उठा है, मानो चार महीनों की प्रतीक्षा के बाद जीवन में पुनः शुभता और आनंद का प्रवाह लौट आया हो।

Pratahkal Bureau

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