उदयपुर।

ट्रांसपोर्ट नगर के पास स्थित बड़ीगढ़ कोटडियां फलां क्षेत्र में करोड़ों रुपये मूल्य की बिलानाम जमीन पर कब्जे और कथित राजनीतिक मिलीभगत का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। अहमदाबाद बाईपास से सटी इस उच्च मूल्य वाली जमीन पर अब एक नई ‘बस्ती’ आकार ले चुकी है — जहां कभी विरल आबादी के कुछ घर ही नजर आते थे।

जानकारी के अनुसार, इस क्षेत्र की जमीन पर लंबे समय से भाजपा से जुड़े कुछ नेताओं की नजर थी। जैसे ही प्रदेश की सत्ता बदली, वैसे ही यहां जमीन पर कब्जे की गतिविधियां तेज हो गईं। स्थानीय भूमाफियाओं ने कथित रूप से नेताओं की शह पर प्लॉटिंग शुरू कर दी और देखते ही देखते करोड़ों की जमीन टुकड़ों में बंटकर बिकने लगी। बताया जा रहा है कि पहले इन माफियाओं ने बड़े नेताओं के लिए विशाल भूखंड आरक्षित रखे, फिर बची हुई जमीन को एग्रीमेंट के आधार पर स्थानीय लोगों और बाहरी निवेशकों को बेच डाला।

सिर्फ दो वर्षों में स्थिति यह हो गई कि जहां पहले सन्नाटा था, अब वहां पक्के मकानों की कतारें और विकसित कॉलोनी जैसी स्थिति दिखाई देने लगी है। फिलहाल भी भूमाफियाओं ने इलाके में प्लॉट मार्किंग कर रखी है और खरीदारों की प्रतीक्षा में हैं। जमीन लेने वाले भी इस विश्वास में हैं कि यहां बड़े-बड़े राजनीतिक नामों की हिस्सेदारी है, इसलिए उनके कब्जे को कोई चुनौती नहीं दे सकता।

सूत्रों के अनुसार, इस पूरे प्रकरण की जानकारी उदयपुर विकास प्राधिकरण (यूडीए) तक भी पहुंची है, मगर वहां से अब तक कोई ठोस कार्रवाई सामने नहीं आई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि प्रशासन ने समय रहते हस्तक्षेप नहीं किया, तो यह क्षेत्र अवैध कॉलोनियों का केंद्र बन सकता है।

यह मामला न केवल जमीनों के अवैध कब्जे और राजनीतिक संरक्षण के गठजोड़ पर गंभीर सवाल उठाता है, बल्कि यह भी दिखाता है कि नियामक संस्थाओं की निष्क्रियता कैसे शहर के विकास और कानून व्यवस्था पर गहरी चोट कर रही है।

Pratahkal Bureau

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