उदयपुर। शहर के दक्षिणी क्षेत्र में भूमि माफियाओं का जाल तेजी से फैलता जा रहा है। उदयपुर-अहमदाबाद बाईपास टच बड़ीगढ़ कोटडियां फलां गांव में करोड़ों रुपये की बिलानाम जमीन पर कब्जों का सिलसिला जारी है। चौंकाने वाली बात यह है कि इस अवैध जमीन सौदेबाज़ी में भाजपा के कुछ दिग्गज नेताओं के नाम भी सामने आ रहे हैं, जिन्होंने न केवल कब्जों में सहयोग किया बल्कि अपने और अपने समर्थकों के नाम से प्लॉट तक आवंटित करवा लिए।

जानकारी के अनुसार, सरकार बदलने के बाद स्थानीय स्तर पर सक्रिय हुए कुछ नेताओं और भूमाफियाओं ने मिलकर बड़ीगढ़ क्षेत्र में बिलानाम जमीन पर फर्जी कागजात तैयार करवाकर कब्जे शुरू कर दिए। बताया जा रहा है कि जमीन की बिक्री के लिए महज 500 रुपए के स्टाम्प पेपर पर एग्रीमेंट किए जा रहे हैं, जिनके आधार पर फौरी रूप से कब्जे दे दिए जा रहे हैं। इन सौदों में कई हज़ार वर्गफीट भूमि बेची जा चुकी है।

सूत्रों का कहना है कि इन अवैध गतिविधियों में शहर और देहात दोनों क्षेत्रों के कुछ प्रमुख भाजपा नेता भी शामिल हैं। उन्होंने अपने प्रभाव का उपयोग कर प्रशासनिक स्तर पर कार्रवाई को दबवाने का प्रयास किया। मामला उदयपुर विकास प्राधिकरण (यूडीए) तक पहुंच चुका है, लेकिन अब तक किसी भी स्तर पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। यूडीए और स्थानीय प्रशासन की चुप्पी से भूमाफियाओं के हौसले और भी बुलंद हैं।

स्थानीय निवासियों का कहना है कि यह क्षेत्र शहर के विस्तार और निवेश के लिहाज से बेहद संवेदनशील है। यदि इस तरह के कब्जे जारी रहे तो भविष्य में न केवल सरकारी भूमि का बड़ा हिस्सा अवैध हाथों में चला जाएगा, बल्कि शहर की विकास योजनाएं भी प्रभावित होंगी।

जमीन कब्जे और फर्जी सौदों की शिकायतें लगातार सामने आने के बावजूद कार्रवाई का अभाव प्रशासनिक निष्क्रियता पर सवाल उठाता है। यह मामला अब केवल भूमि विवाद नहीं, बल्कि राजनीतिक और प्रशासनिक गठजोड़ का गंभीर उदाहरण बन चुका है, जो उदयपुर की भूमि सुरक्षा व्यवस्था पर गहरा प्रश्नचिह्न छोड़ता है।

Pratahkal Bureau

Pratahkal Bureau

प्रातःकाल ब्यूरो, प्रातःकाल न्यूज़ की वह समर्पित संपादकीय टीम है, जो सटीक, सामयिक और निष्पक्ष समाचार पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध है। हमारा ब्यूरो राजनीति, समाज, अर्थव्यवस्था और राष्ट्रीय मामलों में सत्यापित रिपोर्टिंग, गहन विश्लेषण और जिम्मेदार पत्रकारिता पर अपना ध्यान केंद्रित करता है।

Next Story