करोड़ों की जमीन पर कब्जे का खुलासा: भाजपा पदाधिकारियों के नाम से 500 रुपए के एग्रीमेंट पर प्लॉट सौदेबाज़ी
उदयपुर के गोवर्धनविलास क्षेत्र में करोड़ों की बिलानाम जमीन पर कब्जे का बड़ा खुलासा हुआ है। भाजपा पदाधिकारियों के नाम से 500 रुपए के स्टॉम्प पेपर पर एग्रीमेंट बनाकर प्लॉट खरीदने-बेचने के दस्तावेज सामने आए हैं। मामले में मंडल अध्यक्ष ने आरोपों से इंकार किया है, लेकिन दस्तावेजों से विवाद गहराया है।

उदयपुर। शहर के गोवर्धनविलास क्षेत्र के ट्रांसपोर्ट नगर के पास स्थित बड़ीगढ़ कोटड़ियां फलां इलाके में करोड़ों की बिलानाम और आबादी भूमि पर कब्जे का सनसनीखेज मामला सामने आया है। आश्चर्यजनक रूप से यह जमीन महज़ 500 रुपए के स्टॉम्प पेपर पर हुए एग्रीमेंट के आधार पर खरीदी-बेची गई बताई जा रही है। सामने आए दस्तावेजों में भाजपा के एक मंडल अध्यक्ष और एक अन्य वरिष्ठ भाजपा नेता के पुत्र के नाम इन प्लॉटों के एग्रीमेंट दर्ज हैं, जिसके बाद से इलाके में राजनीतिक हलचल तेज हो गई है।
सूत्रों के अनुसार, यह भूमि अहमदाबाद बाईपास से सटी हुई है और लंबे समय से विवादित बताई जा रही है। सरकार बदलने के बाद कथित तौर पर भाजपा नेताओं के समर्थन से स्थानीय भू-माफियाओं ने इस बिलानाम जमीन पर कब्जे शुरू किए। बताया जाता है कि इन नेताओं की शह पर सरकारी और आबादी भूमि के हिस्सों को अलग-अलग नामों से बेचना शुरू किया गया। अब इसी क्षेत्र में भाजपा शहर मंडल अध्यक्ष अमृतलाल मेनारिया और भाजपा शहर उपाध्यक्ष तखतसिंह शक्तावत के पुत्र देवेन्द्र सिंह शक्तावत के नाम दो एग्रीमेंट सामने आए हैं।
दस्तावेज़ों के अनुसार, अमृतलाल मेनारिया ने 500 रुपए के स्टॉम्प पेपर पर 1700 वर्गफीट का प्लॉट हिम्मत गमेती नामक व्यक्ति से 5 लाख 70 हजार रुपए में खरीदा दिखाया गया है। वहीं देवेन्द्र सिंह शक्तावत के नाम 1800 वर्गफीट का भूखंड हेमा गमेती नामक व्यक्ति से 3 लाख रुपए में खरीदा जाना दर्ज है। दोनों सौदे 500 रुपए के स्टॉम्प पेपर पर किए गए और इनमें से एक दस्तावेज़ को नोटरी करवाया गया है। आश्चर्य की बात यह है कि इन एग्रीमेंट्स में न तो आराजी नंबर है, न खसरा नंबर, और न ही कोई स्पष्ट सीमा-निर्धारण—जो किसी वैध भूमि सौदे के लिए आवश्यक होता है।
जानकारों के मुताबिक, इन अधूरे एग्रीमेंट्स का इस्तेमाल केवल कब्जे को वैध ठहराने के लिए किया गया प्रतीत होता है। यदि यह भूमि पंचायत या सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज होती, तो उसके लिए पट्टा या लीज़ जारी होना आवश्यक था, परंतु ऐसा कोई दस्तावेज उपलब्ध नहीं मिला है। इससे यह संदेह गहराता जा रहा है कि यह पूरा मामला सरकारी भूमि पर अवैध कब्जे से जुड़ा हुआ है।
मामले में जब भाजपा मंडल अध्यक्ष अमृतलाल मेनारिया से संपर्क किया गया, तो उन्होंने किसी भी तरह का एग्रीमेंट करने से साफ इनकार किया। मेनारिया का कहना है कि “किसी ने मेरे नाम और दस्तावेजों का दुरुपयोग किया है।” हालांकि दस्तावेजों में उनका नाम स्पष्ट रूप से दर्ज है, जिससे विवाद और गहरा गया है।
स्थानीय सूत्रों का कहना है कि बड़ीगढ़ कोटड़ियां फलां इलाके में कई अन्य भाजपा नेताओं के भी हजारों वर्गफीट क्षेत्र में कब्जे हैं, जिन पर बाउंड्रीवाल तक खड़ी कर दी गई है। बताया जा रहा है कि इन कब्जों में से अधिकांश नेताओं ने अपने समर्थकों या परिचितों के नाम से जमीनें लेकर कब्जा जमाया हुआ है और अब केवल सरकारी पट्टे मिलने का इंतजार किया जा रहा है, ताकि ये कब्जे कानूनी रूप ले सकें।
यह खुलासा न केवल राजनीतिक गलियारों में हलचल पैदा कर रहा है बल्कि यह सवाल भी उठा रहा है कि आखिर सरकारी और बिलानाम जमीनों पर इस तरह के सौदे कैसे हो रहे हैं और प्रशासन अब तक इस पूरे प्रकरण पर मौन क्यों है।
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Pratahkal Bureau
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