औद्योगिक भू-खण्डों की लीज एक्सटेंशन प्रक्रिया में वर्षों से लंबित प्रकरणों और प्रशासनिक देरी के खिलाफ लघु उद्योग भारती, सुखेर इकाई ने जिला कलेक्टर गौरव अग्रवाल को ज्ञापन सौंपकर त्वरित समाधान की मांग उठाई। संगठन ने लीज एक्सटेंशन और किराया पुनर्निरीक्षण की वर्तमान प्रक्रिया को जटिल बताते हुए इसे जिला कलेक्टर स्तर पर ही पूर्ण करने की मांग की है।

लघु उद्योग भारती के अध्यक्ष विजय गोघा एवं सचिव हिमांशु मेहता ने बताया कि राजस्थान भू-राजस्व नियम 1959 के तहत उद्योग स्थापित करने के लिए 99 वर्ष की लीज प्रदान की जाती है। इस व्यवस्था में प्रत्येक 30 वर्ष पश्चात अधिकतम 25 प्रतिशत तक किराया पुनर्निरीक्षण का प्रावधान निर्धारित है। उन्होंने कहा कि वर्तमान में लीज एक्सटेंशन एवं किराया पुनर्निरीक्षण के लिए उद्यमियों द्वारा कलेक्टर कार्यालय में आवेदन करने के बाद फाइलों को जिला उद्योग केंद्र सहित अन्य विभागों में भेज दिया जाता है। विभागीय प्रक्रिया के कारण प्रकरण वर्षों तक लंबित पड़े रहते हैं, जिससे उद्यमियों को मानसिक और आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

ज्ञापन में मांग की गई कि 99 वर्ष की लीज में 30 वर्ष बाद नियमानुसार 25 प्रतिशत किराया वृद्धि लेकर जिला कलेक्टर स्तर पर ही लीज एक्सटेंशन की प्रक्रिया पूरी की जाए। साथ ही अनावश्यक विभागों में फाइल भेजने की प्रक्रिया समाप्त कर प्रशासनिक प्रणाली को सरल और समयबद्ध बनाया जाए, ताकि उद्योगों से जुड़े मामलों का शीघ्र निस्तारण हो सके।

इस दौरान उपाध्यक्ष दीपक जैन, महानगर कोषाध्यक्ष अनिल कटारिया, हितेश पटेल सहित कई कार्यकारिणी सदस्य उपस्थित रहे। लघु उद्योग भारती ने स्पष्ट किया कि प्रक्रिया में सुधार होने से उद्यमियों को राहत मिलेगी और औद्योगिक गतिविधियों को भी गति प्राप्त होगी।

Pratahkal Bureau

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