मावली में सामुदायिक मुखियाओं के प्रशिक्षण हेतु केआरपी कार्यशाला संपन्न: शिक्षा के सुदृढ़ीकरण पर दिया जोर
मावली में समग्र शिक्षा के तहत सामुदायिक मुखियाओं के प्रशिक्षण हेतु एक दिवसीय संयुक्त केआरपी कार्यशाला का सफल आयोजन हुआ। सीबीईओ सुख लाल गुर्जर के निर्देशन में आयोजित इस प्रशिक्षण में दक्ष प्रशिक्षकों ने नामांकन, वित्तीय प्रबंधन, पीएम श्री योजना और डिजिटल नवाचारों पर प्रकाश डाला। मावली और खेमली ब्लॉक के 60 से अधिक पीईईओ और अधिकारियों ने विद्यालय विकास और सामुदायिक सहभागिता को सुदृढ़ करने का संकल्प लिया।

मावली, 7 जनवरी 2026। राजस्थान के शैक्षिक ढांचे को सामुदायिक सहभागिता से मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए मावली और खेमली ब्लॉक के पीईईओ एवं यूसीईईओ के लिए एक दिवसीय संयुक्त केआरपी (की-रिसोर्स पर्सन) प्रशिक्षण का सफल आयोजन किया गया। समग्र शिक्षा के तत्वावधान में आयोजित यह दो दिवसीय गैर-आवासीय प्रशिक्षण कार्यक्रम महात्मा गांधी राजकीय विद्यालय, मावली गाँव में संपन्न हुआ, जिसका मुख्य उद्देश्य राजकीय विद्यालयों के प्रबंधन में सामुदायिक मुखियाओं की सक्रिय भूमिका सुनिश्चित करना और नवाचारों के माध्यम से शिक्षण व्यवस्था को उन्नत बनाना रहा।
कार्यशाला का शुभारंभ मुख्य ब्लॉक शिक्षा अधिकारी (सीबीईओ) मावली, सुख लाल गुर्जर के कुशल निर्देशन में राष्ट्र गीत के साथ हुआ, जिसने उपस्थित संभागियों में देशप्रेम और कर्तव्यबोध का संचार किया। इस उच्च स्तरीय प्रशिक्षण सत्र में मावली एवं खेमली ब्लॉक के समस्त पीईईओ तथा यूसीईईओ ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। दक्ष प्रशिक्षक के रूप में वरिष्ठ अध्यापक ओम प्रकाश खटीक (चीरवा) एवं व्याख्याता दर्शन मेनारिया (महात्मा गांधी विद्यालय खेरोदा) ने अपनी विषय विशेषज्ञता के माध्यम से प्रतिभागियों को विभिन्न तकनीकी और व्यावहारिक पहलुओं से अवगत कराया। कार्यक्रम के सफल क्रियान्वयन में व्याख्याता जगदीश चंद्र सिंघल ने पंजीकरण एवं शिक्षण सामग्री वितरण की व्यवस्था संभाली, जबकि प्रोजेक्टर एवं डिजिटल माध्यमों का सुचारू संचालन कंप्यूटर ऑपरेटर शंकर लाल द्वारा किया गया।
प्रशिक्षण के दौरान प्रशिक्षकों ने सामुदायिक गतिशीलता की अवधारणा पर गहराई से प्रकाश डालते हुए विद्यालयों में नामांकन वृद्धि, विद्यार्थियों के ठहराव और नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करने की रणनीतियों पर चर्चा की। इस दौरान नि: शुल्क और अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 एवं राज्य नियम 2011 के प्रावधानों को विस्तार से समझाया गया। सुरक्षा और बाल संरक्षण जैसे संवेदनशील विषयों पर अभिभावक-शिक्षक संवाद के महत्व को रेखांकित किया गया। संभागियों को एक 'श्रेष्ठ एसएमसी' के संकेतों और एसएमसी/एसडीएमसी के कर्तव्यों से परिचित कराया गया, ताकि विद्यालय विकास योजना के निर्माण में भौतिक मानकों और शैक्षिक उपलब्धियों का सही संतुलन बनाया जा सके।
कार्यशाला में समग्र शिक्षा के अंतर्गत प्राप्त होने वाले अनुदान, वित्तीय नियमों और जटिल लेखा प्रक्रियाओं के बारे में भी गहन प्रशिक्षण दिया गया। साथ ही, ज्ञान संकल्प पोर्टल, पूर्व विद्यार्थी एवं दानदाता सम्मेलन, पीएम श्री योजना, आंगनबाड़ी समन्वय, और शाला जल स्वच्छता जैसे कार्यक्रमों पर विशेष सत्र आयोजित किए गए। आधुनिक युग की आवश्यकताओं को देखते हुए डिजिटल टूल्स, समावेशी शिक्षण विधियां, एफएलएन, व्यावसायिक शिक्षा, विद्यालयों की स्टार रैंकिंग और शाला दर्पण पोर्टल के प्रभावी उपयोग जैसे नवाचारों को मॉड्यूल के माध्यम से सिखाया गया। प्रशिक्षण सत्र का समापन राष्ट्र गान के साथ हुआ, जो भविष्य में एक सशक्त और शिक्षित समाज निर्माण के संकल्प को प्रदर्शित करता था। इस महत्वपूर्ण अवसर पर संदर्भ व्यक्ति सोहन लाल बुनकर, पंकज जोशी, चुन्नी लाल अहीर, और दीपक सैन सहित कुल 60 प्रतिभागी और समग्र शिक्षा कार्यालय का स्टाफ मौजूद रहा।

Pratahkal Bureau
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