फतहनगर: कोटा-असारवा ट्रेन का प्रतिदिन संचालन और अतिरिक्त कोच की मांग
स्थानीय नागरिकों और जनप्रतिनिधियों ने रेलवे मंत्रालय से कोटा-असारवा ट्रेन को प्रतिदिन चलाने और अहमदाबाद-इंदौर रेल में सामान्य कोच बढ़ाने की मांग की है।

फतहनगर। क्षेत्रीय यात्रियों की चिर-परिचित समस्याओं के समाधान की दिशा में एक बार फिर मुखर आवाजें उठी हैं। कोटा से अहमदाबाद के असारवा जंक्शन के बीच संचालित होने वाली ट्रेन को सप्ताह में केवल दो दिन के बजाय प्रतिदिन चलाने और अहमदाबाद–इंदौर के बीच चलने वाली रेल में अतिरिक्त सामान्य कोच जोड़ने की मांग ने जोर पकड़ लिया है। इन दोनों मांगों के पूर्ण होने से न केवल क्षेत्र के यात्रियों को भारी राहत मिलेगी, बल्कि रेलवे की आय में भी उल्लेखनीय वृद्धि की प्रबल संभावनाएं हैं।
वर्तमान समय में कोटा–असारवा ट्रेन का संचालन सप्ताह में केवल दो दिन ही हो पा रहा है। कोटा से यह ट्रेन मंगलवार एवं शुक्रवार को रवाना होती है, जबकि असारवा से वापसी में यह बुधवार एवं शनिवार को चलती है। सीमित फेरों के कारण यात्रियों को भारी असुविधा का सामना करना पड़ रहा है। स्थानीय जनप्रतिनिधियों एवं यात्रियों का तर्क है कि कोटा–असारवा रेल मार्ग पर शिक्षा, रोजगार, व्यापार और चिकित्सा जैसे अनिवार्य कार्यों से बड़ी संख्या में लोगों का प्रतिदिन आवागमन होता है। ट्रेन के केवल दो दिन उपलब्ध रहने के कारण यात्रियों को मजबूरन अपने कार्यक्रम बदलने पड़ते हैं या फिर महंगे वैकल्पिक साधनों का सहारा लेना पड़ता है। दैनिक संचालन सुनिश्चित होने से क्षेत्रीय कनेक्टिविटी मजबूत होगी और व्यापारिक गतिविधियों को नई गति प्राप्त होगी।
इसके साथ ही, अहमदाबाद से इंदौर के बीच संचालित होने वाली रेलगाड़ी में भी यात्री दबाव निरंतर बना हुआ है। यात्रियों का कहना है कि इस ट्रेन के सामान्य श्रेणी के डिब्बों में हमेशा अत्यधिक भीड़ रहती है, जिसके कारण यात्रियों को घंटों खड़े होकर लंबी दूरी तय करने के लिए विवश होना पड़ता है। सफर की इस दुश्वारी को देखते हुए यात्रियों ने रेलवे प्रशासन से अहमदाबाद–इंदौर ट्रेन में कम से कम दो अतिरिक्त सामान्य कोच जोड़ने की पुरजोर मांग की है। इससे भीड़ का दबाव कम होगा और आम यात्रियों का सफर सुगम बन सकेगा।
क्षेत्र के जागरूक नागरिकों, सामाजिक संगठनों एवं जनप्रतिनिधियों ने रेलवे मंत्रालय से इन दोनों मांगों पर शीघ्र सकारात्मक निर्णय लेने की अपील की है। उनका स्पष्ट मानना है कि यदि रेलवे प्रशासन इन कदमों को गंभीरता से लेता है, तो न केवल जनमानस की परेशानियां दूर होंगी, बल्कि रेलवे की छवि और राजस्व में भी सकारात्मक सुधार देखने को मिलेगा।

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