मनुष्य ज्ञान को भूलता जा रहा, धन का मान बढ़ाता जा रहा: कोमल मुनि
खेरोदा के जैन स्थानक भवन में कोमल मुनि ने ज्ञान, धन, संतोष, संयम और आत्म-कल्याण पर प्रवचन देते हुए जीवन का मार्ग बताया।

तस्वीर में खेरोदा के जैन स्थानक भवन में चातुर्मास के दौरान उप प्रवर्तक कोमल मुनि श्रद्धालुओं को प्रवचन देते हुए नजर आ रहे हैं।
खेरोदा कस्बे के जैन स्थानक भवन में चल रहे चातुर्मास के दौरान उप प्रवर्तक गुरुदेव कोमल मुनि ने प्रभावशाली प्रवचन में जीवन के गूढ़ सत्यों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि आज का मनुष्य जीवन के असली मूल्य को भूलता जा रहा है। मनुष्य ज्ञान को विस्मृत कर रहा है और धन का मान बढ़ाता जा रहा है। वह अंदर से शून्य और बाहर से ढोंग को अपना रहा है। मृत्यु हर पल नजदीक आ रही है और निरंतर संदेश दे रही है, लेकिन जीव इस सत्य को बिसारकर अज्ञानता के अंधेरे में धंसता चला जा रहा है।
कोमल मुनि ने विशेष रूप से कहा कि मनुष्य जीवन में अपनी गलती स्वीकार करना नहीं सीखता, जिससे वैर और विवाद बढ़ते हैं। उन्होंने कहा कि जीवन में सच्चा सुख पाना है तो संतोष, संयम और समता रूपी धन को धारण करना होगा, क्योंकि आत्म-धन के समान संसार में कोई दूसरा श्रेष्ठ धन नहीं है।
कोमल मुनि जी महाराज साहब ने जीवन की सबसे बड़ी विसंगतियों में शामिल तुलना और अपेक्षा पर भी गहरी चोट की। उन्होंने बताया कि तुलना एक गहरा अंधकार है, जो कई पापों का मूल आधार और सुंदर रिश्तों को तोड़ने वाली आफत है। इसी प्रकार, दूसरों से अपेक्षा रखना आत्मा के लिए तीव्र दावानल के समान है, जो सुंदर रिश्तों को खंडित कर देती है।
उन्होंने समझाया कि सेवा और त्याग का फल मांगना व्यर्थ है, क्योंकि इनका असली फल निष्काम भाव और ध्यान से ही प्राप्त होता है। इंसान केवल प्रशंसा सुनने का आदी हो चुका है और निंदा सुनते ही धैर्य खो देता है, जो आध्यात्मिक विकास में सबसे बड़ा बाधक है। उन्होंने कहा कि धन और मान के अहंकार को छोड़कर, अपनी गलतियों को सुधारते हुए निस्वार्थ भाव से आत्म-कल्याण के मार्ग पर आगे बढ़ना ही असली मानव जीवन है।
इस पावन वेला में अध्ययनशील एवं सेवारत्न हर्षित मुनि जी ने भी श्रावक के 21 गुणों की विस्तृत विवेचना करते हुए मार्गदर्शन किया। उन्होंने विशेष रूप से रेखांकित किया कि "निग्रंथ प्रवचन सार, बाकी सब व्यर्थ" श्रावक का एक प्रमुख गुण है। साथ ही, उन्होंने श्रद्धालुओं को पूरी विधि-विधान और श्रद्धा के साथ प्रवचन श्रवण करने की सही विधि से अवगत कराया, जिससे श्रावक अपने जीवन को धार्मिक और अनुशासित बना सके।
वर्द्धमान जैन श्रावक संघ अध्यक्ष सुनील कूकड़ा ने बताया कि जैन संत परंपरा से जुड़े इस प्रेरणादायक अवसर पर राजमल मेहता पिता फकीर चंद्र मेहता खेरोदा द्वारा ली गई ग्यारह की तपस्या की सभी ओर से अत्यंत अनुमोदना की गई। इससे समाज और धर्म प्रेमियों में हर्ष का माहौल रहा।
कोमल मुनि महाराज साहब और हर्षित मुनि के ओजस्वी वचनों के माध्यम से आयोजित यह अवसर उपस्थित समाज को आत्म-चिंतन, संतोष और संयम का मार्ग दिखाने वाला ऐतिहासिक और प्रेरणादायी अवसर सिद्ध हुआ।

Budhi prakash parashar (Udaipur)
नाम: बुद्धि प्रकाश पाराशर
वर्तमान पद: सीनियर पत्रकार (प्रातःकाल)
कार्यक्षेत्र: कस्बा खेरोदा (तहसील: भींडर, जिला: उदयपुर, राजस्थान)
बीट (मुख्य विषय): राजनीति, क्राइम, शिक्षा, प्रशासन, स्वास्थ्य एवं अन्य स्थानीय समाचार
परिचय
बुद्धि प्रकाश पाराशर राजस्थान के उदयपुर जिले के खेरोदा क्षेत्र के एक वरिष्ठ पत्रकार हैं। वह मुख्य रूप से कस्बा खेरोदा, भींडर तहसील और आसपास के ग्रामीण व शहरी इलाकों को कवर करते हैं। उनके कार्यक्षेत्र में स्थानीय राजनीति, कानून-व्यवस्था (क्राइम), शिक्षा, स्वास्थ्य, प्रशासन और जनहित से जुड़े सभी मुख्य विषय शामिल हैं।
पत्रकारिता का अनुभव (Work Experience)
बुद्धि प्रकाश पाराशर जी को मीडिया क्षेत्र में 30 साल का लंबा और व्यापक अनुभव है:
- वह साल 2000 से लगातार 'प्रातःकाल' समाचार पत्र से जुड़े हुए हैं।
- उन्हें 'राजस्थान पत्रिका' के साथ भी काम करने का लंबा अनुभव रहा है।
शैक्षणिक योग्यता (Education)
उन्होंने अपनी शिक्षा स्नातक (Graduate) स्तर तक पूरी की है।
