दूसरों की कमियां तलाशने के बजाय करें आत्म-समीक्षा, अहंकार विष के समान: कोमल मुनि
खेरोदा के जैन स्थानक भवन में चातुर्मास धर्मसभा में कोमल मुनि ने परनिंदा, चुगली और अहंकार से दूर रहने का संदेश दिया। हर्षित मुनि ने श्रावक-श्राविका के 21 गुणों पर प्रकाश डाला।

तस्वीर में बाईं ओर कोमल मुनि म.सा. और दाईं ओर हर्षित मुनि खेरोदा के जैन स्थानक भवन में मंच पर बैठे हुए नजर आ रहे हैं।
खेरोदा कस्बे के जैन स्थानक भवन में चातुर्मास के दौरान आयोजित धर्मसभा में मेवाड़ उप-प्रवर्तक गुरुदेव कोमल मुनि म.सा. ने श्रावक-श्राविकाओं को परनिंदा, चुगली और दूसरों की पंचायती से दूर रहने की प्रेरणा दी। उन्होंने कहा कि दूसरों की कमियां तलाशने में समय व्यर्थ करने के बजाय मनुष्य को स्वयं की समीक्षा कर अपनी कमजोरियों को सुधारना चाहिए।
धर्मसभा को संबोधित करते हुए मुनि श्री ने कहा कि दूसरों को धोखा देकर कभी सच्चा सुख प्राप्त नहीं किया जा सकता। शास्त्रों का मूल सार यही है कि जो हमारे साथ अच्छा करता है, वह हमारा शुभचिंतक है और बुरा करने वाला अपने कर्मों का फल खुद भुगतता है। ऐसे में व्यक्ति को दूसरों के दोष तलाशने के बजाय आत्म-सुधार पर ध्यान देना चाहिए।
उन्होंने कहा कि शारीरिक बल तो पशु भी बढ़ा लेते हैं, लेकिन मानव जीवन की वास्तविक सार्थकता अपनी आंतरिक आत्मिक शक्ति और सहनशीलता को बढ़ाने में है। अहंकार को विष के समान बताते हुए मुनि श्री ने कहा कि अहंकार करने वाला कभी अमर नहीं रहा। जीवन में सुख और दुख दोनों ही क्षणिक हैं, इसलिए दुख में विचलित नहीं होना चाहिए और सुख में अहंकार नहीं करना चाहिए। हर परिस्थिति में समभाव बनाए रखना ही उचित है।
श्रावक-श्राविका के 21 गुणों पर प्रकाश
सभा में अध्ययनशील, सेवारत्न हर्षित मुनि ने श्रावक-श्राविका के 21 गुणों का विस्तार से वर्णन किया। उन्होंने कहा कि एक सच्चे श्रावक को अनीति, अन्याय और अनाचार से सदैव दूर रहना चाहिए। श्रावक का चरित्र और प्रतिष्ठा इतनी निष्कलंक होनी चाहिए कि उस पर कभी कोई संदेह न कर सके।
उन्होंने कहा कि श्रावकों को दान के लिए सदैव तत्पर रहना चाहिए और श्रमण-श्रमणियों को भक्ति भाव से सुपात्र दान देना चाहिए।
धर्मसभा के दौरान वर्द्धमान जैन श्रावक संघ के अध्यक्ष सुनील कूकड़ा सहित समाज के कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे। इस अवसर पर भिंडर, भटेवर, वाना सहित आसपास के विभिन्न क्षेत्रों से बड़ी संख्या में गुरुभक्तों ने उपस्थित होकर संतों के दर्शन-वंदन का लाभ लिया और प्रवचनों को आत्मसात किया।
फोटो 01 जैन स्थानक भवन में प्रवचन देते हुए मुनि श्री

Budhi prakash parashar (Udaipur)
नाम: बुद्धि प्रकाश पाराशर
वर्तमान पद: सीनियर पत्रकार (प्रातःकाल)
कार्यक्षेत्र: कस्बा खेरोदा (तहसील: भींडर, जिला: उदयपुर, राजस्थान)
बीट (मुख्य विषय): राजनीति, क्राइम, शिक्षा, प्रशासन, स्वास्थ्य एवं अन्य स्थानीय समाचार
परिचय
बुद्धि प्रकाश पाराशर राजस्थान के उदयपुर जिले के खेरोदा क्षेत्र के एक वरिष्ठ पत्रकार हैं। वह मुख्य रूप से कस्बा खेरोदा, भींडर तहसील और आसपास के ग्रामीण व शहरी इलाकों को कवर करते हैं। उनके कार्यक्षेत्र में स्थानीय राजनीति, कानून-व्यवस्था (क्राइम), शिक्षा, स्वास्थ्य, प्रशासन और जनहित से जुड़े सभी मुख्य विषय शामिल हैं।
पत्रकारिता का अनुभव (Work Experience)
बुद्धि प्रकाश पाराशर जी को मीडिया क्षेत्र में 30 साल का लंबा और व्यापक अनुभव है:
- वह साल 2000 से लगातार 'प्रातःकाल' समाचार पत्र से जुड़े हुए हैं।
- उन्हें 'राजस्थान पत्रिका' के साथ भी काम करने का लंबा अनुभव रहा है।
शैक्षणिक योग्यता (Education)
उन्होंने अपनी शिक्षा स्नातक (Graduate) स्तर तक पूरी की है।
