गोविंद गुरु के आदर्शों पर चलकर भारतीय संस्कृति को संजोएं: खेरवाड़ा में आचार्य प्रशिक्षण शिविर
खेरवाड़ा में आयोजित प्रशिक्षण शिविर में जनजाति महापुरुष गोविंद गुरु के बलिदान और भारतीय शिक्षा पद्धति की जड़ों पर मंथन किया गया। जानिए कैसे आचार्य अपने संस्कारों से समाज को नई दिशा देने का संकल्प ले रहे हैं।

खेरवाड़ा स्थित विद्या निकेतन में आयोजित प्रशिक्षण शिविर में वक्ता नवीन कुमार झा आचार्यों को भारतीय शिक्षा प्रणाली और जनजाति समाज के गौरवशाली इतिहास से अवगत कराते हुए।
खेरवाड़ा में विद्या भारती जनजाति समिति राजस्थान के तत्वावधान में विद्या निकेतन माध्यमिक विद्यालय में नवनियुक्त आचार्यों के लिए एक विशेष प्रशिक्षण शिविर का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य आचार्यों को भारतीय शिक्षा पद्धति की जड़ों और जनजाति महापुरुषों के संघर्षों से परिचित कराना था। कार्यक्रम के मुख्य वक्ता, चित्तौड़ प्रांत के निरीक्षक नवीन कुमार झा ने भारतीय शिक्षा प्रणाली की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि पर प्रकाश डालते हुए बताया कि किस प्रकार औपनिवेशिक काल में लॉर्ड मैकाले द्वारा 2 फरवरी 1935 को लागू की गई शिक्षा पद्धति का उद्देश्य भारतीय मानस को उसकी संस्कृति से विमुख करना था। उन्होंने जोर देकर कहा कि उपनिषद, वेद और महाभारत पर आधारित भारत की प्राचीन शिक्षा व्यवस्था संपूर्ण मानवता के लिए प्रेरणा है और हमारी संस्कृति ही विश्व में श्रेष्ठ है।
वक्ताओं ने जनजाति समाज के गौरवशाली इतिहास का स्मरण करते हुए बिरसा मुंडा के संघर्षों और 1871 के उस दमनकारी कानून का उल्लेख किया, जिसके तहत जनजाति समाज को 'जन्मजात अपराधी' घोषित कर उनके अधिकारों को कुचलने का प्रयास किया गया था। इस दौर में समाज को दिशा देने के लिए गोविंद गुरु का योगदान अतुलनीय रहा। उन्होंने 20 दिसंबर 1898 को 'सभ्य सभा' की स्थापना कर जनजाति बंधुओं में एकता, प्रेम और भक्ति का संचार किया और समाज की रक्षा के लिए 1500 बलिदानियों के साथ अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया। कार्यक्रम की अध्यक्षता निर्मल कोठारी ने की, जबकि विद्या भारती जनजाति समिति के सह-सचिव कल्पेश ठाकुर और जीवराज भाई साहब ने विशेष उपस्थिति दर्ज कराई। कार्यक्रम का संचालन अमर लाल मीणा ने किया और समापन पर वक्ताओं ने यह संदेश दिया कि धन से बड़ा चरित्र होता है, अतः आचार्यों को गोविंद गुरु के त्याग और सेवा के आदर्शों को अपने जीवन में उतारकर भावी पीढ़ी का निर्माण करना चाहिए।

Dharnendra Jain( Kherwara)
नाम: धरणेन्द्र जैन
वर्तमान पद: सीनियर रिपोर्टर (प्रातः काल दैनिक, खेरवाड़ा विधानसभा)
कार्यक्षेत्र: खेरवाड़ा विधानसभा क्षेत्र (खेरवाड़ा, ऋषभदेव, और नयागांव उपखंड क्षेत्र, जिला उदयपुर, राजस्थान)
बीट (मुख्य विषय): राजनीति, क्राइम, प्रशासन सहित सभी क्षेत्रों की खबरें
अनुभव: 30 वर्ष से अधिक
परिचय
धरणेन्द्र जैन उदयपुर जिले के खेरवाड़ा विधानसभा क्षेत्र के एक अत्यंत अनुभवी और वरिष्ठ पत्रकार हैं। वर्तमान में वह 'प्रातः काल दैनिक' में सीनियर रिपोर्टर के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। वह मुख्य रूप से खेरवाड़ा, ऋषभदेव और नयागांव उपखंड क्षेत्र को कवर करते हैं। धरणेन्द्र जैन राजनीति, क्राइम, स्थानीय प्रशासन सहित क्षेत्र के सभी प्रमुख विषयों पर नियमित रूप से समाचार लिखते हैं।
पत्रकारिता का अनुभव (Work Experience)
धरणेन्द्र जैन को पत्रकारिता के क्षेत्र में तीन दशकों (30 वर्ष) से अधिक का व्यापक और लंबा अनुभव है:
- वह साल 1995 से पत्रकारिता क्षेत्र में निरंतर कार्यरत हैं।
- उन्होंने वर्ष 1998 से 2018 तक लगातार 20 वर्षों तक 'दैनिक भास्कर' में खेरवाड़ा विधानसभा क्षेत्र के लिए सीनियर रिपोर्टिंग की है।
- वर्ष 2018 से वह लगातार 'प्रातः काल' समाचार पत्र से जुड़े हुए हैं और क्षेत्र की कमान संभाल रहे हैं।
शैक्षणिक योग्यता (Education)
उन्होंने वाणिज्य स्नातक (B.Com) की डिग्री हासिल की है।
