खेरवाड़ा क्षेत्र स्थित राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय, मगरा के लिए वर्ष 2026 एक युगान्तकारी अध्याय लेकर आया है। वर्ष 1968 में अपनी स्थापना के बाद से ही भूमि के मालिकाना हक की बाट जोह रहे इस शिक्षण संस्थान को 58 वर्षों के लंबे और चुनौतीपूर्ण इंतजार के बाद आधिकारिक तौर पर भूमि का पट्टा प्राप्त हो गया है। दशकों से कानूनी एवं तकनीकी उलझनों में फंसी यह समस्या प्रशासनिक अधिकारियों की तत्परता और संयुक्त प्रयासों से हल हुई है, जिससे स्थानीय ग्रामीणों और विद्यालय परिवार में हर्ष की लहर दौड़ गई है।

ग्राम पंचायत मगरा में आयोजित एक विशेष समारोह के दौरान इस ऐतिहासिक उपलब्धि को अंतिम रूप दिया गया। इस जटिल मामले को सुलझाने में विकास अधिकारी मदनलाल लोहार, तहसीलदार रेवत राम, मुख्य ब्लॉक शिक्षा अधिकारी ज्योति प्रकाश पटेल और प्रशासक उर्मिला देवी ने न केवल व्यक्तिगत रुचि ली, बल्कि सभी आवश्यक प्रक्रियाओं को समयबद्ध तरीके से पूर्ण भी कराया। अधिकारियों के आपसी समन्वय ने न केवल दशकों पुराने गतिरोध को समाप्त किया, बल्कि विद्यालय को भूमि का वैध अधिकार भी दिलाया।

पट्टा प्राप्त न होने के कारण विद्यालय परिसर में नए भवन निर्माण, मरम्मत और अन्य बुनियादी ढांचागत विकास कार्यों में निरंतर बाधाएं आ रही थीं, जिससे विद्यार्थियों को शैक्षणिक असुविधाओं का सामना करना पड़ रहा था। पट्टा मिलने के बाद अब अत्याधुनिक सुविधाओं से युक्त नए विद्यालय भवन के निर्माण का मार्ग पूरी तरह से प्रशस्त हो गया है। यह विकास क्षेत्र के सैकड़ों छात्र-छात्राओं के लिए बेहतर शैक्षिक वातावरण सुनिश्चित करेगा। विद्यालय प्रशासन और स्थानीय ग्रामीणों ने इस उपलब्धि को बच्चों के उज्ज्वल भविष्य की मजबूत नींव बताते हुए संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की है।

Dinesh Kumar Jain, Kherwara(Udaipur)

Dinesh Kumar Jain, Kherwara(Udaipur)

दिनेश कुमार जैन पत्रकारिता जगत का एक अनुभवी और विश्वसनीय नाम हैं। उन्होंने पिछले लगभग 8 वर्षों से प्रिंट मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय रहकर जनहित से जुड़े मुद्दों, प्रशासनिक गतिविधियों, ग्रामीण विकास, सामाजिक सरोकारों तथा स्थानीय समस्याओं को प्रमुखता से उठाया है।

उन्होंने जनवरी 2020 से प्रतिष्ठित समाचार पत्र दैनिक नवज्योति में संवाददाता, खेरवाड़ा एवं नयागांव ब्लॉक (जिला उदयपुर) के रूप में कार्य करते हुए तहसील एवं ब्लॉक स्तर की खबरों को प्रभावी ढंग से पाठकों तक पहुंचाया। इससे पूर्व वे लगभग दो वर्षों तक राजस्थान पत्रिका से भी जुड़े रहे, जहां उन्होंने क्षेत्रीय पत्रकारिता में महत्वपूर्ण योगदान दिया।

खेरवाड़ा, नयागांव तथा आसपास के ग्रामीण एवं आदिवासी क्षेत्रों की जमीनी समस्याओं, विकास कार्यों, शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि एवं सामाजिक मुद्दों पर उनकी विशेष पकड़ रही है। निष्पक्ष, तथ्यपरक और जनहित आधारित पत्रकारिता उनकी पहचान है।

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