खेरवाड़ा: रावल समाज के श्मशान घाट पर छायादार शेड का अभाव, अंतिम संस्कार में उमड़ी भीड़ बेहाल
खेरवाड़ा के कलालिया में रावल समाज का श्मशान घाट बुनियादी सुविधाओं के अभाव से जूझ रहा है। तपती धूप और बारिश में अंतिम संस्कार के लिए आने वाले लोग बेहाल हैं। क्या प्रशासन इस संवेदनशील समस्या का समाधान कर आमजन को राहत देगा?

कलालिया के श्मशान घाट पर अंतिम संस्कार के दौरान छायादार शेड न होने से समाजजन खुले में एकत्र होने को मजबूर हैं, जिसके लिए प्रशासन से निर्माण की मांग की गई है।
खेरवाड़ा के कलालिया स्थित रावल (नाथ) समाज के समाधि एवं श्मशान स्थल पर व्यवस्थाओं का घोर अभाव आमजन की आस्था और संवेदनशीलता पर भारी पड़ रहा है। अंतिम संस्कार जैसे अनिवार्य और संवेदनशील अवसर पर यहाँ पहुँचने वाले शोकग्रस्त परिजनों और समाजजनों को तपती धूप और मूसलाधार बारिश के बीच खुले आसमान के नीचे घंटों खड़े रहने को मजबूर होना पड़ रहा है। छायादार शेड की अनुपलब्धता के कारण बुजुर्गों, महिलाओं और बच्चों की परेशानी का आलम यह है कि अंतिम संस्कार की प्रक्रिया के दौरान उन्हें अत्यधिक कष्ट उठाना पड़ता है।
समाज के अध्यक्ष प्रेमनाथ ने चिंता व्यक्त करते हुए बताया कि श्मशान घाट पर बुनियादी सुविधाओं का अभाव लंबे समय से एक गंभीर समस्या बना हुआ है। वर्षा ऋतु और भीषण गर्मी के दौरान यहाँ आने वाले लोग पूरी तरह असुरक्षित और असहाय महसूस करते हैं। समाज के वरिष्ठ सदस्य समुद्र रावल ने इस स्थिति को बेहद दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि अंतिम यात्रा में शामिल होने वाले लोगों के बैठने की कोई व्यवस्था न होने से समाज की गरिमा और संवेदनाओं को ठेस पहुँचती है। इस पीड़ा को साझा करते हुए निचला खेरवाड़ा के प्रबुद्ध नागरिक शिवकुमार जोशी, प्रदीप जोशी और शंकरलाल पंचाल ने भी स्थानीय प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं।
इन नागरिकों ने संयुक्त रूप से बंजारिया ग्राम पंचायत और संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों से मांग की है कि जनहित को सर्वोपरि रखते हुए श्मशान घाट पर तत्काल प्रभाव से स्थायी छायादार शेड का निर्माण सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह केवल एक निर्माण कार्य नहीं, बल्कि अंतिम संस्कार में आने वाले लोगों के प्रति मानवीय दृष्टिकोण अपनाने की आवश्यकता है। समाजजनों को प्रशासन से उम्मीद है कि इस संवेदनशील मामले की गंभीरता को समझते हुए जल्द ही सकारात्मक कार्रवाई की जाएगी, ताकि शोक की घड़ी में शामिल होने वाले लोगों को मौसम की मार से राहत मिल सके। श्मशान घाट पर छाया के अभाव में तपती धूप के बीच समाजजनों की तस्वीरें स्थिति की भयावहता को स्वतः ही बयां कर रही हैं।

Dinesh Kumar Jain, Kherwara(Udaipur)
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