खेरवाड़ा। नगर के प्रसिद्ध राम मंदिर के सभागार में आयोजित दिव्य राम कथा के पांचवें दिन आध्यात्मिक वातावरण भक्ति के रस में सराबोर नजर आया। मध्यप्रदेश से पधारे प्रख्यात कथा वाचक वीरेंद्र शास्त्री ने अपनी ओजस्वी वाणी से भगवान श्रीराम के बाल स्वरूप, उनकी शिक्षा-दीक्षा और अहिल्या उद्धार के प्रसंगों का अत्यंत जीवंत एवं भावपूर्ण वर्णन किया। व्यास पीठ से उपदेश देते हुए शास्त्री ने विश्वामित्र के नाम के गूढ़ अर्थ को स्पष्ट करते हुए कहा कि जो समस्त संसार अथवा विश्व का मित्र हो, वही सच्चा विश्वामित्र कहलाता है।

कथा के दौरान वीरेंद्र शास्त्री ने श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि मनुष्य अपनी पांच कर्मेन्द्रियों, पांच ज्ञानेन्द्रियों और पांच प्राणों के माध्यम से निरंतर राम नाम का स्मरण कर सकता है। उन्होंने राम की महिमा का गुणगान करते हुए बताया कि प्रभु श्रीराम मारने वाले भी हैं और तारने वाले भी। उन्होंने ताड़का, सुबाहु और मारीच के संदर्भ में कहा कि ताड़का दुराचार की प्रतीक है, जबकि सुबाहु और मारीच बुरे मित्रों एवं दुखों को दर्शाते हैं। शास्त्री ने अनाथ होने की परिभाषा को स्पष्ट करते हुए कहा कि जो परमात्मा को नहीं पहचानता वह दीन है, और जिसका कोई नाथ नहीं, वह अनाथ है। वहीं, जो स्वयं को ही अपना सर्वस्व मानता है, वह भी अनाथ की श्रेणी में आता है।

अहिल्या प्रसंग पर प्रकाश डालते हुए कथा वाचक ने कहा कि अहिल्या वास्तव में पत्थर नहीं बनी थीं, बल्कि वे मानवीय संवेदनाओं से शून्य होकर पत्थर समान हो गई थीं। उन्होंने स्पष्ट किया कि जिसे देह का अभिमान नहीं होता, वही विदेह कहलाता है। शास्त्री ने कथा को आगे बढ़ाते हुए बताया कि गुरु वशिष्ठ द्वारा यज्ञोपवीत संस्कार संपन्न कराने के उपरांत भगवान राम समस्त विद्याओं में पारंगत हुए। इसके बाद महर्षि विश्वामित्र उन्हें और लक्ष्मण को अपने आश्रम ले गए, जहां मार्ग में श्रीराम ने ताड़का एवं सुबाहु का वध किया तथा मारीच को अपने बाण से सौ योजन दूर फेंक दिया। तत्पश्चात उन्होंने गौतम ऋषि की पत्नी अहिल्या का उद्धार कर उन्हें पुनः चेतना प्रदान की। कथा के अंत में श्रीराम और लक्ष्मण के साथ जनकपुर प्रस्थान के प्रसंग ने भक्तों को भावविभोर कर दिया।

दिव्य राम कथा के प्रवक्ता जगदीश व्यास ने बताया कि इस पावन अवसर पर भजनों और नृत्य प्रस्तुतियों ने श्रद्धालुओं को भक्ति के सागर में डुबो दिया। कथा के दौरान बजरंग अग्रवाल, अवधेश अग्रवाल, ललित व्यास, रमेश कलाल, द्वारका प्रसाद सिंधी और महावीर जांगिड़ सहित अनेक गणमान्य नागरिकों ने चरण-थोक रस्म अदा की। कथा के समापन पर महाआरती की गई, जिसके उपरांत उपस्थित भक्तों में महाप्रसाद का वितरण किया गया। इस आयोजन ने खेरवाड़ा के श्रद्धालुओं के मन में राम भक्ति की एक नई अलख जगा दी है।

Pratahkal Newsroom

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