खेरवाड़ा। आदिवासी अंचल के ऐतिहासिक और प्रशासनिक महत्व को नए सिरे से स्थापित करने की मांग ने एक बार फिर स्थानीय स्तर पर चर्चा को तेज कर दिया है। खेरवाड़ा स्थित मेवाड़ भील कोर (एमबीसी) मुख्यालय को महत्वपूर्ण दर्जा प्रदान किए जाने की मांग को लेकर अरावली वॉलंटियर्स सोसायटी राजस्थान ने प्रशासन के समक्ष औपचारिक पहल करते हुए ज्ञापन सौंपा।

यह ज्ञापन सोसायटी के संस्थापक समन्वयक एस.के. यूसुफ जई के नेतृत्व में ग्रामीण सेवा शिविर खेरवाड़ा के प्रभारी को सौंपा गया। ज्ञापन में वर्ष 1836 में स्थापित मेवाड़ भील कोर (एमबीसी) के ऐतिहासिक महत्व का उल्लेख करते हुए खेरवाड़ा को विशेष महत्व देने की आवश्यकता पर जोर दिया गया।

ज्ञापन में कहा गया कि पंचायतों के पुनर्गठन के दौरान राजनीतिक कारणों से खेरवाड़ा पंचायत का दायरा सीमित कर दिए जाने के कारण क्षेत्र की पहचान और विकास प्रभावित हुआ है। सोसायटी का कहना है कि आदिवासी क्षेत्र के इस प्रमुख केंद्र को अपेक्षित प्रशासनिक और विकासात्मक प्राथमिकता नहीं मिल सकी।

संगठन ने यह भी उल्लेख किया कि राष्ट्रीय राजमार्ग-48 (एनएच-48) पर स्थित होने के कारण खेरवाड़ा नगर तेजी से विकसित हो रहा है और क्षेत्रीय स्तर पर इसका प्रशासनिक तथा ऐतिहासिक महत्व लगातार बढ़ रहा है। इसके बावजूद नगर की महत्वपूर्ण भूमि एवं उपलब्ध संसाधनों का समुचित उपयोग नहीं हो पाया है।

ज्ञापन में नगर के विभिन्न हिस्सों में लंबे समय से लंबित भूमिहीन एवं गरीब परिवारों के पट्टों से जुड़े मामलों के समाधान की आवश्यकता भी उठाई गई। सोसायटी ने मांग की कि खेरवाड़ा के ऐतिहासिक, सामाजिक और प्रशासनिक महत्व को ध्यान में रखते हुए मेवाड़ भील कोर (एमबीसी) मुख्यालय को महत्वपूर्ण दर्जा प्रदान किया जाए।

संगठन का मानना है कि इस निर्णय से क्षेत्रीय विकास को नई दिशा मिल सकती है और आदिवासी समाज को दीर्घकालिक लाभ प्राप्त हो सकेगा। अब इस मांग पर प्रशासनिक स्तर पर आगे क्या कदम उठाए जाते हैं, इस पर क्षेत्र की निगाहें बनी हुई हैं।

Dinesh Kumar Jain, Kherwara(Udaipur)

Dinesh Kumar Jain, Kherwara(Udaipur)

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