खेरवाड़ा: ग्रामीण सेवा शिविर में 322 से अधिक ग्रामीणों को मिला सरकारी योजनाओं का संबल
खेरवाड़ा के बावलवाड़ा में आयोजित ग्रामीण सेवा शिविर में 322 से अधिक लोगों को सरकारी योजनाओं का लाभ मिला। स्वास्थ्य जांच से लेकर राजस्व कार्यों के निस्तारण तक, जानें कैसे प्रशासन ने आमजन के द्वार पहुंचकर बदली लोगों की तकदीर।

खेरवाड़ा के बावलवाड़ा में आयोजित शिविर में प्रशासनिक अधिकारी ग्रामीणों को सरकारी योजनाओं के तहत लाभ प्रदान करते हुए।
खेरवाड़ा के ग्राम पंचायत बावलवाड़ा में आयोजित ग्रामीण सेवा शिविर लोक कल्याण की भावना का एक जीवंत उदाहरण बनकर उभरा, जहाँ प्रशासनिक तत्परता ने सैंकड़ों ग्रामीणों के जीवन में खुशहाली का नया संचार किया। राज्य सरकार के दिशा-निर्देशों के अनुरूप आयोजित इस शिविर का मुख्य उद्देश्य शासन की विभिन्न योजनाओं को सीधे आमजन के द्वार तक पहुँचाना था, ताकि उन्हें अपने छोटे-छोटे कार्यों के लिए दफ्तरों के चक्कर न काटने पड़ें। शिविर के दौरान विभागीय अधिकारियों ने संवेदनशीलता दिखाते हुए मौके पर ही प्रकरणों के निस्तारण की प्रक्रिया को गति दी, जिससे ग्रामीणों में व्यवस्था के प्रति विश्वास सुदृढ़ हुआ।
इस शिविर में राजस्व, स्वास्थ्य और पशुपालन जैसे महत्वपूर्ण विभागों की सक्रिय भागीदारी रही। आंकड़ों पर गौर करें तो शिविर के दौरान 15 नामांतरण, 8 शुद्धिकरण, 3 फार्मर रजिस्ट्री, 4 पेंशन सत्यापन, 2 पालनहार योजना, 6 प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना, 11 जन्म प्रमाण पत्र, 3 मृत्यु पंजीकरण और 1 विवाह पंजीयन जैसे कार्य सफलतापूर्वक संपादित किए गए। स्वास्थ्य विभाग ने अपनी जिम्मेदारी निभाते हुए 88 लोगों का स्वास्थ्य परीक्षण किया, जबकि पशुपालन विभाग ने मंगला पशु बीमा योजना के तहत 41 पशुपालकों को लाभान्वित किया और 140 पशुओं का उपचार कर उन्हें नई जीवन संजीवनी दी। इसके अतिरिक्त, स्वामित्व योजना एवं पट्टा पुनर्विधिमान से संबंधित लंबित मामलों पर भी प्रभावी कार्रवाई की गई।
कार्यक्रम में भाजपा मंडल अध्यक्ष वालसिंह चौहान, विकास अधिकारी, नायब तहसीलदार, सहायक विकास अधिकारी अरुण सिंह और अन्य ब्लॉक स्तरीय अधिकारियों की उपस्थिति ने प्रशासनिक गंभीरता को रेखांकित किया। साथ ही, उपखंड प्रभारी जयदीप फड़िया और मंडल महामंत्री भावेश उपाध्याय ने भी व्यवस्थाओं का जायजा लिया। इस आयोजन की सफलता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि बड़ी संख्या में उपस्थित ग्रामीणों ने न केवल योजनाओं का लाभ उठाया, बल्कि प्रशासन की इस जनहितैषी पहल की मुक्त कंठ से सराहना भी की। यह शिविर केवल कागजी खानापूर्ति नहीं, बल्कि उन अंतिम छोर पर बैठे लोगों के लिए एक सार्थक प्रयास साबित हुआ, जिन्हें सरकारी मदद की सबसे अधिक आवश्यकता थी।

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