खेरवाड़ा के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) में बुधवार को एक बड़ा हादसा टल गया, जब स्वास्थ्य केंद्र की लेखा शाखा के कमरे की जर्जर छत का प्लास्टर अचानक भरभराकर नीचे गिर पड़ा। राहत की बात यह रही कि लेखा शाखा में कार्यरत लेखपाल संदीप मोदी घटना से कुछ ही सेकंड पहले किसी कार्य से अपनी सीट छोड़कर कमरे के दूसरे छोर पर चले गए थे। यदि उस समय वे अपनी सीट पर मौजूद होते तो गंभीर चोट लग सकती थी।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार छत से प्लास्टर बड़े-बड़े टुकड़ों में गिरा, जिससे कमरे में लगा सीलिंग फैन भी टूटकर क्षतिग्रस्त हो गया। नीचे रखी प्लास्टिक की कुर्सियां टूट गईं और कमरे में रखा फर्नीचर भी क्षतिग्रस्त हो गया। घटना के बाद अस्पताल स्टाफ में कुछ समय के लिए अफरा-तफरी का माहौल बन गया।

जानकारी के अनुसार संबंधित कमरा बने हुए लगभग 15 वर्ष हो चुके हैं। अक्टूबर 2010 में इस विंग में निर्मित करीब पांच कमरों को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र को सुपुर्द किया गया था। इस विंग का उद्घाटन तत्कालीन चिकित्सा मंत्री दुरू मियां द्वारा किया गया था। बरसात के मौसम की शुरुआती बारिश के बाद ही छत में नमी आ गई और प्लास्टर उखड़कर गिर पड़ा, जिससे भवन की गुणवत्ता और रखरखाव पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।

अस्पताल कर्मियों के अनुसार केवल लेखा शाखा का कमरा ही नहीं, बल्कि कार्यालय, स्टोर, एक्स-रे कक्ष, ऑपरेशन थिएटर सहित कई अन्य कमरों की स्थिति भी दयनीय बनी हुई है। कई स्थानों पर छतों में दरारें और सीलन होने से कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है।

घटना के तुरंत बाद सीएचसी के वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी एवं प्रभारी डॉक्टर अनिल गोयल ने बीसीएमओ को सूचना देकर अधिशासी अभियंता, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग, एनएचएम उदयपुर को अस्पताल भवन तथा परिसर स्थित अधिकारी एवं कर्मचारी आवास का निरीक्षण कर सुरक्षा प्रमाण पत्र जारी करने के लिए पत्र प्रेषित किया। वहीं बीसीएमओ डॉक्टर अरुण मीणा ने भी घटना का संज्ञान लेते हुए त्वरित कार्रवाई की और अधिशासी अभियंता, सार्वजनिक निर्माण विभाग, खेरवाड़ा को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र खेरवाड़ा के अस्पताल भवन एवं परिसर स्थित समस्त आवासीय भवनों का निरीक्षण कर सुरक्षा प्रमाण पत्र जारी करने के लिए पत्र भेजा।

उल्लेखनीय है कि सीएचसी प्रबंधन विगत वर्षों में कई बार एनएचएम को पत्र लिखकर आवश्यक कार्रवाई की मांग कर चुका है, लेकिन बजट के अभाव में यह कार्य नहीं हो सका। इसके चलते कर्मचारी और चिकित्सक अपनी जान जोखिम में डालकर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र परिसर में कार्य करने को मजबूर हैं। अस्पताल कर्मचारियों एवं स्थानीय लोगों ने संबंधित विभाग से पूरे भवन का तकनीकी निरीक्षण कर जर्जर कमरों की तत्काल मरम्मत कराने की मांग की है, ताकि मरीजों, चिकित्सकों और कर्मचारियों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके तथा भविष्य में किसी अप्रिय घटना से बचा जा सके।

Dinesh Kumar Jain, Kherwara(Udaipur)

Dinesh Kumar Jain, Kherwara(Udaipur)

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