शुकदेव जन्म, राजा परीक्षित के वैराग्य और भागवत महिमा के प्रसंगों से गूंजा कथा पंडाल, श्रद्धालु हुए भावविभोर
खेरवाड़ा में आयोजित संगीतमय श्रीमद्भागवत कथा के द्वितीय दिवस पर शुकदेव जन्म, राजा परीक्षित के वैराग्य और भागवत महिमा के दिव्य प्रसंगों का भावपूर्ण वर्णन हुआ। कथा में उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़ आध्यात्मिक संदेशों से अभिभूत नजर आई।

खेरवाड़ा के पुराना बस स्टैंड स्थित टाक कलेक्शन हॉल में सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु महिलाएं कथा श्रवण करती हुईं।
खेरवाड़ा। कस्बे के पुराना बस स्टैंड स्थित टाक कलेक्शन के ऊपर हॉल में आयोजित सात दिवसीय संगीतमय श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ के द्वितीय दिवस पर श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक चेतना का अद्भुत संगम देखने को मिला। चित्रकूट धाम के प्रसिद्ध कथाव्यास अंकित महाराज ने अपने ओजस्वी एवं भावपूर्ण प्रवचनों से श्रद्धालुओं को भागवत के दिव्य प्रसंगों से जोड़ते हुए धर्म और वैराग्य का संदेश दिया।
मंगलवार को आयोजित कथा के दौरान व्यासपीठ से राजा परीक्षित और श्री शुकदेव जी महाराज के दिव्य संवाद का विस्तृत एवं मार्मिक वर्णन किया गया। कथाव्यास ने बताया कि महर्षि वेदव्यास के पुत्र श्री शुकदेव जी जन्म से ही पूर्णतः विरक्त थे। भगवान के आश्वासन के पश्चात ही उन्होंने माता के गर्भ से बाहर आने का निर्णय लिया। उनके जन्म और वैराग्य से जुड़े अद्भुत प्रसंगों का वर्णन सुनकर कथा पंडाल में उपस्थित श्रद्धालु भावविभोर हो उठे।
कथा के दौरान राजा परीक्षित को प्राप्त श्राप और उनके जीवन के केवल सात दिन शेष रहने के प्रसंग को भी विस्तारपूर्वक प्रस्तुत किया गया। कथाव्यास ने बताया कि मृत्यु का समय निकट जानकर राजा परीक्षित ने सांसारिक मोह-माया का त्याग कर श्री शुकदेव जी महाराज की शरण ग्रहण की और जीवन के अंतिम क्षणों में मनुष्य के कर्तव्यों के संबंध में महत्वपूर्ण प्रश्न किए।
इन प्रश्नों के उत्तर में श्री शुकदेव जी महाराज द्वारा दिए गए उपदेशों का वर्णन करते हुए कथाव्यास ने कहा कि मनुष्य को जीवन के अंतिम समय में समस्त सांसारिक आसक्तियों का त्याग कर भगवान नारायण का स्मरण करना चाहिए। उन्होंने श्रीमद्भागवत महापुराण की महिमा का वर्णन करते हुए इसे साक्षात भगवान का स्वरूप बताया तथा कहा कि जो व्यक्ति श्रद्धा और भक्ति भाव से इसका श्रवण करता है, उसे जन्म-मरण के बंधनों से मुक्ति प्राप्त होती है।
कथा के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे। पूरा वातावरण भक्ति रस से सराबोर रहा और श्रद्धालुओं ने कथा श्रवण कर आध्यात्मिक ज्ञान एवं धर्मोपदेश का लाभ प्राप्त किया। कथा के इन प्रेरणादायी प्रसंगों ने उपस्थित जनसमुदाय को जीवन के वास्तविक उद्देश्य, वैराग्य और ईश्वर स्मरण के महत्व का संदेश प्रदान किया।

Dinesh Kumar Jain, Kherwara(Udaipur)
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