सीएमएफ के सहयोग से खेरवाड़ा के किसान दंपति ने जैविक खेती से लिखी सफलता की नई इबारत
खेरवाड़ा के एक छोटे से गाँव राबिया में किसान दंपति ललिता देवी और अशोक निनोमा ने जैविक खेती से कैसे बदली अपनी तकदीर? जानिए कैसे सीएमएफ संस्था के सहयोग से आधुनिक तकनीकों को अपनाकर यह दंपति क्षेत्र के अन्य किसानों के लिए एक प्रेरणास्रोत बन गया है।

तस्वीर में उदयपुर के खेरवाड़ा स्थित राबिया गांव में ललिता देवी अपने खेत में भिंडी की जैविक खेती कर रही हैं, जिससे परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है।
खेरवाड़ा तहसील की ग्राम पंचायत सुन्दरा के ग्राम राबिया में रहने वाले किसान दंपति श्रीमती ललिता देवी एवं श्री अशोक निनोमा ने आधुनिक और जैविक कृषि पद्धतियों के माध्यम से आत्मनिर्भरता की एक प्रेरणादायक मिसाल पेश की है। सीएमएफ संस्था के तकनीकी मार्गदर्शन और प्रशिक्षण से प्रेरित होकर इस दंपति ने पारंपरिक खेती के बजाय वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाते हुए भिंडी सहित विभिन्न प्रकार की सब्जियों का उत्पादन शुरू किया। इस पहल ने न केवल उनके खेतों की उत्पादकता में वृद्धि की है, बल्कि फसल की गुणवत्ता में भी उल्लेखनीय सुधार सुनिश्चित किया है।
ललिता देवी एवं अशोक निनोमा के अनुसार, वैज्ञानिक और जैविक कृषि तकनीकों के प्रयोग से न केवल उनकी उत्पादन लागत में कमी आई है, बल्कि मिट्टी की उर्वरता को सुरक्षित रखने में भी सहायता मिली है। दंपति ने जैविक खाद और प्राकृतिक कीट प्रबंधन जैसी विधियों को अपनाकर खेती को अधिक टिकाऊ बनाया है। स्थानीय बाजार में उनकी उपजों की बढ़ती मांग और गुणवत्तापूर्ण सब्जियों के कारण उन्हें अपनी मेहनत का उचित मूल्य भी प्राप्त हो रहा है। विशेष रूप से भिंडी की फसल से प्राप्त होने वाली नियमित आय ने उनके परिवार की आर्थिक स्थिति को सुदृढ़ करने के साथ-साथ दैनिक आवश्यकताओं की पूर्ति को सुगम बना दिया है।
यह उपलब्धि क्षेत्र के अन्य किसानों के लिए एक सकारात्मक उदाहरण के रूप में उभरकर सामने आई है। ललिता देवी और अशोक निनोमा का सफल अनुभव यह सिद्ध करता है कि आधुनिक कृषि तकनीक और जैविक खेती का समावेश अपनाकर किसान अपनी आजीविका को सशक्त एवं आत्मनिर्भर बना सकते हैं। उनकी यह यात्रा खेती को केवल एक व्यवसाय नहीं, बल्कि एक प्रगतिशील जीवन शैली के रूप में अपनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

Dinesh Kumar Jain, Kherwara(Udaipur)
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