श्रुत पंचमी महापर्व पर जैन मंदिरों में गूंजा जिनवाणी आराधना का स्वर, श्रद्धालुओं ने किया शास्त्र पूजन
खेरवाड़ा में श्रुत पंचमी महापर्व पर जैन मंदिरों में विशेष धार्मिक आयोजन हुए। श्रद्धालुओं ने जिनवाणी और आगम ग्रंथों की पूजा-अर्चना कर ज्ञान परंपरा के प्रति अपनी आस्था व्यक्त की। जानिए इस पर्व का महत्व।

जैन धर्म के प्रमुख ज्ञान पर्व श्रुत पंचमी महापर्व के अवसर पर खेरवाड़ा कस्बे के विभिन्न जैन मंदिर श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक उल्लास से सराबोर नजर आए। ज्ञान और जिनवाणी की महिमा को समर्पित इस विशेष पर्व पर श्रद्धालुओं ने आगम ग्रंथों एवं शास्त्रों की विधिवत पूजा-अर्चना कर ज्ञान परंपरा के प्रति अपनी गहरी आस्था व्यक्त की।
प्रातःकाल से ही मंदिरों में धार्मिक अनुष्ठानों का दौर शुरू हो गया। श्रद्धालुओं ने जिनवाणी माता की आराधना, शास्त्र वंदना, विशेष पूजन एवं अभिषेक जैसे आयोजनों में उत्साहपूर्वक भाग लिया। पूरे वातावरण में भक्ति और ज्ञान साधना का भाव स्पष्ट रूप से दिखाई दिया। श्रुत पंचमी को जैन धर्म में ‘ज्ञान का जन्मोत्सव’ माना जाता है, इसलिए इस दिन जिनवाणी और आगम साहित्य के संरक्षण एवं अध्ययन के महत्व को विशेष रूप से स्मरण किया जाता है।
इस अवसर पर समाज के पदाधिकारियों ने श्रद्धालुओं को श्रुत पंचमी के ऐतिहासिक और आध्यात्मिक महत्व से अवगत कराया। उन्होंने बताया कि भगवान महावीर की दिव्य वाणी को सुरक्षित रखने में आचार्य धरसेन, आचार्य पुष्पदंत एवं आचार्य भूतबलि का योगदान अतुलनीय रहा है। उनके अथक प्रयासों के कारण जैन आगम, दर्शन और सिद्धांत आज भी सुरक्षित रूप से उपलब्ध हैं और आने वाली पीढ़ियों तक पहुंच रहे हैं।
कार्यक्रम के दौरान श्रद्धालुओं को ज्ञान, स्वाध्याय और अध्ययन के महत्व पर भी प्रकाश डाला गया। सकल दिगम्बर जैन समाज के महामंत्री भूपेंद्र जैन ने कहा कि शास्त्र केवल धार्मिक ग्रंथ नहीं हैं, बल्कि वे जीवन को सही दिशा प्रदान करने वाले ज्ञान के अमूल्य स्रोत हैं। उन्होंने बताया कि श्रुत पंचमी का पर्व ज्ञान के संरक्षण, अध्ययन और उसके व्यापक प्रसार का संदेश देता है।
श्रुत पंचमी महापर्व के अवसर पर श्रद्धालुओं ने जिनवाणी के प्रति अपनी श्रद्धा अर्पित करते हुए शास्त्र पूजन किया तथा धर्म प्रभावना से जुड़े विभिन्न कार्यक्रमों में सहभागिता निभाई। आयोजन में सकल दिगम्बर जैन समाज के बड़ी संख्या में अनुयायी उपस्थित रहे। ज्ञान और आध्यात्मिक चेतना को समर्पित यह पर्व श्रद्धालुओं के लिए प्रेरणा, आस्था और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण का महत्वपूर्ण माध्यम बनकर उभरा।

Pratahkal Bureau
प्रातःकाल ब्यूरो, प्रातःकाल न्यूज़ की वह समर्पित संपादकीय टीम है, जो सटीक, सामयिक और निष्पक्ष समाचार पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध है। हमारा ब्यूरो राजनीति, समाज, अर्थव्यवस्था और राष्ट्रीय मामलों में सत्यापित रिपोर्टिंग, गहन विश्लेषण और जिम्मेदार पत्रकारिता पर अपना ध्यान केंद्रित करता है।
