खेरोदा। विलुप्त होती अरावली पर्वतमाला के संरक्षण को लेकर देशभर में उठ रही चिंताओं के बीच खेरोदा में एक महत्वपूर्ण पहल सामने आई है। राष्ट्रीय मानवाधिकार पर्यावरण सुरक्षा एवं भ्रष्टाचार निवारण संगठन द्वारा ‘अरावली बचाओ’ अभियान के अंतर्गत राठौड़ फार्म हाउस पर एक विशेष बैठक का आयोजन किया गया, जिसने पर्यावरण संरक्षण को लेकर गंभीर और निर्णायक विमर्श को जन्म दिया।

बैठक की अध्यक्षता संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष बालू सिंह झाला ने की, जबकि प्रदेश अध्यक्ष मोड़ सिंह राठौड़ मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। कार्यक्रम का उद्देश्य केवल संवाद तक सीमित नहीं रहा, बल्कि अरावली पर्वतमाला के लगातार हो रहे क्षरण पर सरकार और न्यायपालिका का ध्यान आकृष्ट करना भी रहा। बैठक में इस बात पर गहन चर्चा हुई कि किस प्रकार अरावली का अस्तित्व न केवल पर्यावरणीय संतुलन, बल्कि लाखों लोगों के जीवन, जलस्तर और जैव विविधता से जुड़ा हुआ है।

बैठक के दौरान सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया गया कि अरावली संरक्षण को लेकर भारत के राष्ट्रपति और देश के मुख्य न्यायाधीश को पत्र लिखकर तत्काल हस्तक्षेप की मांग की जाएगी। पत्र में देशहित और जनहित को सर्वोपरि रखते हुए अरावली से जुड़े अब तक लिए गए निर्णयों पर पुनर्विचार का आग्रह किया जाएगा। संगठन ने स्पष्ट किया कि अरावली केवल एक पर्वतमाला नहीं, बल्कि पशु-पक्षियों का प्राकृतिक आवास और राजस्थान सहित भारत के तीन राज्यों की जीवनरेखा है।

संगठन के पदाधिकारियों ने गंभीर स्वर में आगाह किया कि यदि समय रहते इस मुद्दे पर ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो यह एक बड़े आंदोलन का रूप ले सकता है। उनका कहना था कि आज पूरी दुनिया की नजर अरावली के संरक्षण पर टिकी है और भारत की जिम्मेदारी वैश्विक स्तर पर भी महत्वपूर्ण है।

बैठक में उपाध्यक्ष जय नारायण लबाना, महिला उपाध्यक्ष निर्मला राठौड़, जगदीश आचार्य, मीठालाल जारोली, जिला अध्यक्ष मुकेश शर्मा, महासचिव सहित संगठन के कई अन्य सदस्य और पदाधिकारी उपस्थित रहे। सभी ने एक स्वर में अरावली को बचाने के लिए संगठित और संवैधानिक प्रयास जारी रखने का संकल्प दोहराया।

Pratahkal Bureau

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