खेरोदा। सम्यक् ज्ञान का वास्तविक महत्व तभी है, जब वह व्यक्ति के जीवन और आचरण में दिखाई दे। केवल सैद्धांतिक ज्ञान से आध्यात्मिक उन्नति संभव नहीं है, बल्कि ज्ञान को व्यवहार में उतारना आवश्यक है। यह संदेश खेरोदा कस्बे के वर्द्धमान जैन श्रावक संघ के तत्वावधान में आयोजित धर्मसभा में मेवाड़ प्रवर्तक कोमल मुनि म.सा. ने दिया। धर्मसभा में अध्ययनशील, सेवारत्न हर्षित मुनि म.सा. का भी पावन सान्निध्य रहा।

धर्मसभा को संबोधित करते हुए कोमल मुनि म.सा. ने कहा कि सम्यक् ज्ञान केवल सिद्धांतों तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि व्यक्ति के आचरण में पूरी तरह परिलक्षित होना चाहिए। जब तक ज्ञान जीवन और व्यवहार में नहीं उतरता, तब तक वह मात्र भाव-रूप में ही रहता है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि जिस प्रकार किसी नगर या शासन की सुव्यवस्था के लिए राजा का होना अनिवार्य है, उसी प्रकार जीवन रूपी शासन को संचालित करने के लिए सम्यक्त्व आवश्यक है। सम्यक्त्व के बिना आत्मा की आध्यात्मिक उन्नति संभव नहीं है।

धर्म के वास्तविक स्वरूप की व्याख्या करते हुए मुनिश्री ने कहा कि विपरीत और कठिन परिस्थितियों में भी धैर्य तथा संयम बनाए रखकर जीवन जीना ही सच्चा धर्म है। धर्म दुखों के अथाह सागर से पार लगाने वाला पावन धाम है, जिसमें जीवन के समस्त संतापों को हरने की सामर्थ्य है।

कर्म बंधन की विवेचना करते हुए कोमल मुनि ने कहा कि मनुष्य केवल बाहरी सांसारिक गतिविधियों के कारण ही नहीं, बल्कि मन में उठने वाले अशुद्ध और कलुषित विचारों से भी प्रतिक्षण नए कर्मों का संचय करता रहता है। जीवन में संकीर्ण सोच रखना, न स्वयं आगे बढ़ना और न ही दूसरों की उन्नति सहन करना, कायरता का परिचायक है।

वर्तमान समय की विडंबना पर चिंता व्यक्त करते हुए मुनिश्री ने कहा कि आज का मानव सफलता प्राप्त करने के लिए पुरुषार्थ करने के बजाय व्यर्थ की चिंताओं और फिक्र में उलझा रहता है। यह प्रवृत्ति वर्तमान युग की सबसे बड़ी विडंबना बन चुकी है। उनके संदेश में ज्ञान, सम्यक्त्व, संयम और पुरुषार्थ को आध्यात्मिक जीवन के महत्वपूर्ण आधार के रूप में रेखांकित किया गया।

धर्मसभा में अध्ययनशील, सेवारत्न हर्षित मुनि म.सा. ने श्री उत्तराध्ययन सूत्र का वाचन और विवेचन किया। उन्होंने नमि राजर्षि के पावन प्रसंग पर प्रकाश डालते हुए बताया कि देवराज इंद्र द्वारा पूछे गए गहन प्रश्नों का नमि राजर्षि ने अत्यंत भावपूर्ण और स्पष्ट उत्तर दिया था। उनका प्रत्येक समाधान वैराग्य और विरति के मार्ग पर आगे बढ़ने वाली मुमुक्षु आत्माओं के लिए आधारशिला के समान है।

इस अवसर पर वर्द्धमान जैन श्रावक संघ के अध्यक्ष सुनील कूकड़ा, मंत्री मुकेश डांगी और संयोजक अरविंद बड़ाला सहित बड़ी संख्या में समाजजन तथा श्रावक-श्राविकाएं उपस्थित रहे। धर्मसभा में मुनिश्री के प्रवचनों के माध्यम से सम्यक् ज्ञान को आचरण में उतारने, कठिन परिस्थितियों में संयम बनाए रखने और आध्यात्मिक उन्नति के लिए पुरुषार्थ करने का संदेश दिया गया।

Budhi prakash parashar (Udaipur)

Budhi prakash parashar (Udaipur)

नाम: बुद्धि प्रकाश पाराशर

वर्तमान पद: सीनियर पत्रकार (प्रातःकाल)

कार्यक्षेत्र: कस्बा खेरोदा (तहसील: भींडर, जिला: उदयपुर, राजस्थान)

बीट (मुख्य विषय): राजनीति, क्राइम, शिक्षा, प्रशासन, स्वास्थ्य एवं अन्य स्थानीय समाचार

परिचय 

बुद्धि प्रकाश पाराशर राजस्थान के उदयपुर जिले के खेरोदा क्षेत्र के एक वरिष्ठ पत्रकार हैं। वह मुख्य रूप से कस्बा खेरोदा, भींडर तहसील और आसपास के ग्रामीण व शहरी इलाकों को कवर करते हैं। उनके कार्यक्षेत्र में स्थानीय राजनीति, कानून-व्यवस्था (क्राइम), शिक्षा, स्वास्थ्य, प्रशासन और जनहित से जुड़े सभी मुख्य विषय शामिल हैं।

पत्रकारिता का अनुभव (Work Experience)

बुद्धि प्रकाश पाराशर जी को मीडिया क्षेत्र में 30 साल का लंबा और व्यापक अनुभव है:

  • वह साल 2000 से लगातार 'प्रातःकाल' समाचार पत्र से जुड़े हुए हैं।
  • उन्हें 'राजस्थान पत्रिका' के साथ भी काम करने का लंबा अनुभव रहा है।

शैक्षणिक योग्यता (Education)

उन्होंने अपनी शिक्षा स्नातक (Graduate) स्तर तक पूरी की है।

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