स्थानीय महात्मा गांधी राजकीय अंग्रेजी माध्यम विद्यालय, खेरोदा में गुरुवार को विश्व वन्यजीव कोष (WWF) के संयुक्त तत्वावधान में विश्व गौरैया दिवस की पूर्व संध्या पर एक गरिमामय जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। 'हाऊस स्पैरो' अर्थात घरेलू गौरैया के अस्तित्व पर मंडराते संकट और उनके संरक्षण के प्रति जन-चेतना जागृत करने के उद्देश्य से आयोजित इस कार्यक्रम का संयोजन स्थानीय व्याख्याता दर्शन मेनारिया द्वारा किया गया। व्याख्याता मेनारिया ने सभा को संबोधित करते हुए स्पष्ट किया कि प्रतिवर्ष 20 मार्च को वैश्विक स्तर पर यह दिवस मनाया जाता है, क्योंकि बढ़ते शहरीकरण, अनियंत्रित प्रदूषण और तेजी से बदलते पर्यावरण के कारण इस नन्हीं पक्षी की संख्या में निरंतर गिरावट दर्ज की जा रही है।

कार्यक्रम की अध्यक्षता विद्यालय की प्रधानाचार्य रीता त्रिवेदी ने की, जबकि मुख्य अतिथि के रूप में विख्यात पर्यावरण प्रेमी हितेश जायसवाल उपस्थित रहे। विशिष्ट अतिथि के रूप में लोकेश पंवार एवं उप प्रधानाचार्य सीपी आचार्य ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। मुख्य अतिथि हितेश जायसवाल ने चीन के ऐतिहासिक घटनाक्रम का संदर्भ देते हुए एक अत्यंत गंभीर पक्ष साझा किया। उन्होंने बताया कि किस प्रकार 1950 के दशक में माओत्से तुंग के शासनकाल के दौरान गौरैया के सामूहिक विनाश के भयावह परिणाम सामने आए थे, जिससे फसलें पूरी तरह चौपट हो गईं और भीषण अकाल के कारण लाखों लोगों को अपने प्राण गंवाने पड़े। अंततः पारिस्थितिकी तंत्र और 'फूड चेन' को पुनर्जीवित करने के लिए पुनः इन पक्षियों को लाना पड़ा। यह ऐतिहासिक उदाहरण वर्तमान परिप्रेक्ष्य में गौरैया की उपयोगिता और महत्ता को सिद्ध करने के लिए पर्याप्त है।

प्रधानाचार्य रीता त्रिवेदी ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए समस्त पशु-पक्षियों और वनस्पति जगत के प्रति संवेदनशील बनने का आह्वान किया। इसी क्रम में पर्यावरणविद दर्शन मेनारिया ने भारतीय संस्कृति की प्राचीन संरक्षण परंपराओं पर प्रकाश डालते हुए बताया कि यहाँ लोग अपने नाखून काटकर भी खुले में इसलिए नहीं फेंकते थे कि कहीं प्रजनन काल में पक्षी इन्हें आहार समझकर अपने शावकों को न खिला दें, जिससे उनके जीवन को खतरा हो सकता है। उप प्राचार्य सीपी आचार्य ने कहा कि शिक्षण संस्थान ही वह सर्वोत्तम मंच हैं जहाँ से बालकों में संरक्षण की आदतों को रोपा जा सकता है। कार्यक्रम को व्याख्याता रघुनाथ सिंह राठौड़ एवं वरिष्ठ अध्यापक राजू कस्वां ने भी संबोधित कर विद्यार्थियों का मार्गदर्शन किया। विद्यालय की छात्रा प्रिया सेन ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि किस प्रकार प्रातःकाल की सैर के दौरान गौरैया की चहचहाहट उसके पूरे दिन को ऊर्जावान बना देती है।

आयोजन के अंत में उपस्थित समस्त जनसमूह ने गौरैया के संरक्षण का सामूहिक संकल्प लिया। चारभुजा सेवा संस्थान द्वारा इस अवसर पर "गौरैया बचाओ" के विशेष बैज वितरित किए गए, जो आकर्षण का केंद्र रहे। साथ ही, हितेश जायसवाल द्वारा निर्मित कृत्रिम 'स्पैरो नेस्ट' (कृत्रिम घोंसलों) की एक प्रदर्शनी भी लगाई गई, जिससे विद्यार्थियों को घर पर सुरक्षित आवास प्रदान करने की प्रेरणा मिली। इस अवसर पर व्याख्याता मंजू व्यास, प्रिया रजक, प्रीति बिरावत, सुमन चौबीसा, प्रिय सोनी, रविन्द्र सिंह राणावत, वीरेंद्र नवल, एवं कपिल पाटीदार सहित विद्यालय का समस्त स्टाफ उपस्थित रहा। यह कार्यक्रम न केवल एक आयोजन था, बल्कि लुप्त होती गौरैया को पुनः आंगन में बुलाने की एक सशक्त मुहिम के रूप में संपन्न हुआ।

Ruturaj Ravan

Ruturaj Ravan

यह प्रातःकाल मल्टीमीडिया में वेबसाइट मैनेजर और सोशल मीडिया एक्जीक्यूटिव के रूप में कार्यरत हैं, और पिछले तीन वर्षों से पत्रकारिता व डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इससे पूर्व उन्होंने दैनिक प्रहार में वेबसाइट प्रबंधन और सोशल मीडिया के लिए रचनात्मक कंटेंट निर्माण और रणनीतियों में अनुभव अर्जित किया। इन्होंने कोल्हापुर के छत्रपति शिवाजी महाराज विश्वविद्यालय से स्नातक और हैदराबाद के सत्या इंस्टीट्यूट से उच्च शिक्षा पूरी की। इन्हें SEO मैनेजमेंट, सोशल मीडिया और उससे संबंधित रणनीतियाँ तैयार करने में व्यापक अनुभव है।

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