खेरोदा: वार्ड रचना में बदलाव की मांग, ग्रामीण विकास परिषद ने उपखण्ड अधिकारी को सौंपा ज्ञापन
खेरोदा ग्रामीण विकास परिषद ने भींडर उपखण्ड अधिकारी को ज्ञापन सौंपकर आगामी चुनाव से पूर्व मोहल्ला आधारित नई वार्ड रचना की मांग की है। अध्यक्ष वैद्य रामेश्वरलाल जनवा और मंत्री सोहनलाल पाराशर ने वर्तमान वार्ड व्यवस्था की विसंगतियों को दूर कर भौगोलिक एकरूपता लाने पर जोर दिया ताकि स्थानीय विकास कार्य सुचारू हो सकें। यह कदम प्रशासनिक सुदृढ़ीकरण और जनहित में अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

खेरोदा। आगामी ग्राम पंचायत चुनावों की सुगबुगाहट के बीच खेरोदा में स्थानीय प्रशासन और निर्वाचन व्यवस्था को लेकर एक महत्वपूर्ण मांग उठने लगी है। क्षेत्र के चहुंमुखी विकास और जनसुविधाओं को प्राथमिकता देते हुए खेरोदा ग्रामीण विकास परिषद ने वर्तमान वार्ड व्यवस्था की विसंगतियों को दूर करने के लिए हुंकार भरी है। परिषद ने स्पष्ट किया है कि यदि धरातल पर विकास की कड़ियों को जोड़ना है, तो वार्डों का सीमांकन केवल कागजी न होकर मोहल्ला आधारित भौगोलिक धरातल पर होना अनिवार्य है।
इस गंभीर विषय को लेकर ग्रामीण विकास परिषद ने भींडर के उपखण्ड अधिकारी के नाम एक औपचारिक पत्र प्रेषित कर अपना पक्ष मजबूती से रखा है। परिषद के अध्यक्ष वैद्य रामेश्वरलाल जनवा और मंत्री सोहनलाल पाराशर के नेतृत्व में सौंपे गए इस मांग पत्र में वर्तमान व्यवस्था की उन खामियों को उजागर किया गया है जो लंबे समय से आम जनता के लिए सिरदर्द बनी हुई हैं। पत्र में बताया गया कि मौजूदा व्यवस्था में कई स्थानों पर एक ही गली या मोहल्ले के मकानों को अलग-अलग वार्डों में बांट दिया गया है। यह विखंडन न केवल सामाजिक ताने-बाने को प्रभावित करता है, बल्कि प्रशासनिक दृष्टि से भी विकास कार्यों में बाधा उत्पन्न करता है।
नेताओं का तर्क है कि जब एक ही मोहल्ले के मतदाता अलग-अलग वार्ड पंच चुनते हैं, तो सामूहिक समस्याओं के निराकरण में बड़ी जटिलता आती है। सड़क निर्माण, नालियों की सफाई और प्रकाश व्यवस्था जैसे बुनियादी कार्यों के लिए मोहल्लेवासी एकजुट होकर मांग नहीं रख पाते, क्योंकि उनकी सुनवाई अलग-अलग जनप्रतिनिधियों के पास होती है। इससे संसाधनों का असंतुलित वितरण होता है और विकास की गति धीमी पड़ जाती है।
परिषद ने प्रशासन से पुरजोर अपील की है कि आगामी चुनावों से पूर्व प्रस्तावित नई वार्ड रचना को पूरी तरह से 'मोहल्ला आधारित' स्वरूप दिया जाए। इस बदलाव से एक वार्ड के सभी मतदाता एक ही भौगोलिक इकाई का हिस्सा होंगे, जिससे वार्ड पंच के लिए अपने क्षेत्र की समस्याओं को समझना और योजनाएं बनाना सरल होगा। यह मांग केवल एक प्रशासनिक सुधार नहीं, बल्कि स्थानीय लोकतंत्र को जमीनी स्तर पर सशक्त बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। यदि प्रशासन इस पर गंभीरता से विचार करता है, तो खेरोदा की ग्राम पंचायत व्यवस्था भविष्य में विकास का एक नया मॉडल पेश कर सकती है।

Budhi prakash parashar (Udaipur)
नाम: बुद्धि प्रकाश पाराशर
वर्तमान पद: सीनियर पत्रकार (प्रातःकाल)
कार्यक्षेत्र: कस्बा खेरोदा (तहसील: भींडर, जिला: उदयपुर, राजस्थान)
बीट (मुख्य विषय): राजनीति, क्राइम, शिक्षा, प्रशासन, स्वास्थ्य एवं अन्य स्थानीय समाचार
परिचय
बुद्धि प्रकाश पाराशर राजस्थान के उदयपुर जिले के खेरोदा क्षेत्र के एक वरिष्ठ पत्रकार हैं। वह मुख्य रूप से कस्बा खेरोदा, भींडर तहसील और आसपास के ग्रामीण व शहरी इलाकों को कवर करते हैं। उनके कार्यक्षेत्र में स्थानीय राजनीति, कानून-व्यवस्था (क्राइम), शिक्षा, स्वास्थ्य, प्रशासन और जनहित से जुड़े सभी मुख्य विषय शामिल हैं।
पत्रकारिता का अनुभव (Work Experience)
बुद्धि प्रकाश पाराशर जी को मीडिया क्षेत्र में 30 साल का लंबा और व्यापक अनुभव है:
- वह साल 2000 से लगातार 'प्रातःकाल' समाचार पत्र से जुड़े हुए हैं।
- उन्हें 'राजस्थान पत्रिका' के साथ भी काम करने का लंबा अनुभव रहा है।
शैक्षणिक योग्यता (Education)
उन्होंने अपनी शिक्षा स्नातक (Graduate) स्तर तक पूरी की है।
