संत-चर्या अपनाना ही सच्चा धर्म, नीयत साफ हो तो कर्म देते हैं श्रेष्ठ फल: कोमल मुनि जी
खेरोदा के चातुर्मास में कोमल मुनि जी ने संत-चर्या, शुद्ध नीयत और सद्कर्मों के महत्व के साथ महापुरुषों के जीवन से प्रेरणा लेने का संदेश दिया।

तस्वीर में खेरोदा कस्बे के एक हॉल में आयोजित धर्मसभा के दौरान संतगण प्रवचन देते हुए और श्रद्धालु बैठकर श्रवण करते नजर आ रहे हैं।
खेरोदा कस्बे में चल रहे चातुर्मास के दौरान मेवाड़ उप प्रवर्तक गुरुदेव कोमल मुनि म.सा. ने धर्मसभा को संबोधित करते हुए कहा कि संतों की चर्चा सुनना अमृत के समान है और यह सहज भी है, किंतु स्वयं संयममय ‘संत-चर्या’ का पालन करना अत्यंत दुर्लभ है। उन्होंने कहा कि सांसारिक और व्यर्थ की बातों में लोग अधिक रुचि लेते हैं, जबकि धर्मकथा के प्रति उदासीनता दिखाते हैं, जो अज्ञानता का परिचायक है।
कोमल मुनि म.सा. ने कहा कि धर्मात्मा का प्रांगण ही उसका सच्चा मार्गदर्शक है और धर्म ही चौरासी लाख योनियों के आवागमन से मुक्ति दिलाता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि नीयत साफ हो और कर्म सही हों, तो थोड़ी सी भी धर्म-क्रिया बड़ा फल देती है, लेकिन गलत कर्मों के साथ की गई क्रियाएं व्यर्थ सिद्ध होती हैं।

Budhi prakash parashar (Udaipur)
नाम: बुद्धि प्रकाश पाराशर
वर्तमान पद: सीनियर पत्रकार (प्रातःकाल)
कार्यक्षेत्र: कस्बा खेरोदा (तहसील: भींडर, जिला: उदयपुर, राजस्थान)
बीट (मुख्य विषय): राजनीति, क्राइम, शिक्षा, प्रशासन, स्वास्थ्य एवं अन्य स्थानीय समाचार
परिचय
बुद्धि प्रकाश पाराशर राजस्थान के उदयपुर जिले के खेरोदा क्षेत्र के एक वरिष्ठ पत्रकार हैं। वह मुख्य रूप से कस्बा खेरोदा, भींडर तहसील और आसपास के ग्रामीण व शहरी इलाकों को कवर करते हैं। उनके कार्यक्षेत्र में स्थानीय राजनीति, कानून-व्यवस्था (क्राइम), शिक्षा, स्वास्थ्य, प्रशासन और जनहित से जुड़े सभी मुख्य विषय शामिल हैं।
पत्रकारिता का अनुभव (Work Experience)
बुद्धि प्रकाश पाराशर जी को मीडिया क्षेत्र में 30 साल का लंबा और व्यापक अनुभव है:
- वह साल 2000 से लगातार 'प्रातःकाल' समाचार पत्र से जुड़े हुए हैं।
- उन्हें 'राजस्थान पत्रिका' के साथ भी काम करने का लंबा अनुभव रहा है।
शैक्षणिक योग्यता (Education)
उन्होंने अपनी शिक्षा स्नातक (Graduate) स्तर तक पूरी की है।
