खराड़ीवाड़ा में महिला किसानों को मिला आधुनिक एवं प्राकृतिक खेती का प्रशिक्षण, समन्वित पोषण प्रबंधन पर दिया गया विशेष जोर
खराड़ीवाड़ा (पहाड़ा) में आयोजित विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम में 25 महिला किसानों को समन्वित पोषण एवं फसल प्रबंधन की आधुनिक एवं प्राकृतिक तकनीकों की जानकारी दी गई। जानिए कैसे यह पहल खेती को अधिक लाभकारी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित हो रही है।

खराड़ीवाड़ा में आयोजित फसल प्रबंधन प्रशिक्षण कार्यक्रम के समापन पर उपस्थित प्रशिक्षक सुखलाल परमार, पंकज कुमार, लेखपाल शीला डोडियार एवं प्रतिभागी महिला किसान।
कृषि को अधिक लाभकारी, टिकाऊ और वैज्ञानिक बनाने की दिशा में महिला किसानों को सशक्त करने के उद्देश्य से सीएमएफ संस्था द्वारा खराड़ीवाड़ा (पहाड़ा) में समन्वित पोषण एवं फसल प्रबंधन विषय पर एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में 25 महिला किसानों ने उत्साहपूर्वक भाग लेकर खेती की नवीन तकनीकों और प्राकृतिक कृषि पद्धतियों की जानकारी प्राप्त की।
प्रशिक्षण कार्यक्रम का संचालन सीएमएफ संस्था के प्रशिक्षक सुखलाल परमार एवं पंकज कुमार ने किया। इस दौरान वृत्ति एग्रो प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड, खेरवाड़ा की लेखपाल शीला डोडियार ने विशेष सहभागिता निभाते हुए महिला किसानों को किसान उत्पादक कंपनी की कार्यप्रणाली, अभिलेख संधारण की प्रक्रिया तथा किसानों को उपलब्ध कराई जा रही विभिन्न सेवाओं की विस्तृत जानकारी दी।
प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को मिट्टी परीक्षण आधारित संतुलित पोषण प्रबंधन, जैविक एवं प्राकृतिक पोषक तत्वों के प्रभावी उपयोग, फसल चक्र अपनाने के लाभ, खरपतवार नियंत्रण की तकनीकों, जल संरक्षण के उपायों तथा कीट एवं रोगों की पहचान एवं उनके समन्वित प्रबंधन संबंधी महत्वपूर्ण जानकारियां प्रदान की गईं। साथ ही नीमास्त्र, जीवामृत और स्थानीय संसाधनों से तैयार किए जाने वाले जैविक घोलों के उपयोग एवं उनसे होने वाले लाभों पर विस्तार से चर्चा की गई।
प्रशिक्षकों ने बताया कि समन्वित पोषण एवं फसल प्रबंधन तकनीकों को अपनाकर किसान खेती की लागत में कमी ला सकते हैं, मिट्टी की उर्वरता को लंबे समय तक बनाए रख सकते हैं तथा उत्पादन और आय में उल्लेखनीय वृद्धि कर सकते हैं। प्रशिक्षण के दौरान महिला किसानों ने सक्रिय सहभागिता करते हुए अपने अनुभव साझा किए और खेती से जुड़ी विभिन्न समस्याओं के समाधान भी प्राप्त किए।
कार्यक्रम के समापन पर महिला किसानों को प्राकृतिक एवं टिकाऊ खेती की दिशा में आगे बढ़ने तथा समूह आधारित कृषि गतिविधियों से जुड़कर आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित किया गया। ग्रामीण क्षेत्र की महिला किसानों के लिए आयोजित यह प्रशिक्षण कार्यक्रम ज्ञानवर्धक और उपयोगी साबित हुआ, जिससे उन्हें कृषि के वैज्ञानिक एवं टिकाऊ तरीकों को अपनाने की नई दिशा मिली।

Pratahkal Bureau
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