खमनोर। पालीवाल समाज की 24 श्रेणियों का पारंपरिक महाकुंभ खमनोर स्थित आराध्य प्रभु श्री चारभुजानाथ मंदिर में श्रद्धा, आस्था और सामाजिक समरसता के साथ संपन्न हुआ। इस गौरवशाली आयोजन में मंगलवार को विधिवत नवध्वजारोहण के साथ समाजोत्थान और एकता के सूत्रों को मजबूत करने पर गहन मंथन किया गया। मंदिर के सेवक सतीश पालीवाल एवं मुकेश पुरोहित द्वारा भगवान चारभुजानाथ का विशेष वस्त्राभूषणों एवं सुगंधित पुष्पों से मनोहारी श्रृंगार किया गया, जिसने भक्तों को मंत्रमुग्ध कर दिया।

आयोजन के मुख्य लाभार्थी गांवगुड़ा मूल के निवासी एवं 24 श्रेणी पालीवाल समाज इंदौर के अध्यक्ष राकेश जोशी, फतेहलाल पालीवाल, उमेश पालीवाल तथा चैतन्यप्रकाश पालीवाल के सानिध्य में सुबह आठ बजे एक भव्य शोभायात्रा निकाली गई। ढोल-नगाड़ों की थाप और भक्तिमय जयकारों के बीच यह शोभायात्रा सदर बाजार, बड़ा चौराहा, मालियों का नोहरा एवं रक्ततलाई मार्ग से होती हुई मंदिर प्रांगण पहुंची। विधि-विधान से महाआरती संपन्न करने के उपरांत गर्भगृह के गुंबद पर मुख्य नवध्वजा आरोहित की गई। इसी क्रम में परिसर स्थित शिव मंदिर, गजानन मंदिर एवं हनुमान मंदिर की ध्वजाएं भी बदली गईं।

धार्मिक अनुष्ठान के बाद आयोजित 24 खेड़ा समागम में जाजम बैठक का विशेष महत्व रहा। परंपरा का निर्वहन करते हुए समाज के कोतवाल द्वारा विभिन्न गांवों से आए प्रतिनिधियों को केसर-जनेऊ वितरित किए गए। कार्यक्रम का संचालन भगवतीलाल पालीवाल एवं सत्यनारायण पालीवाल ने संयुक्त रूप से किया। इस अवसर पर गायत्री परिवार के वरिष्ठ साधक एवं सामाजिक इतिहासविद् घनश्याम पालीवाल ने खमनोर स्थित प्राचीन चारभुजानाथ मंदिर के गौरवशाली इतिहास पर प्रकाश डाला। कवि गिरीश विद्रोही ने समाज सुधार के विषयों पर ओजस्वी कविता पाठ प्रस्तुत किया, वहीं युवा गिरीश पालीवाल ने विवाह योग्य युवक-युवतियों के बायोडाटा संकलन एवं परिवार परिचय पुस्तिका तैयार करने की महत्वाकांक्षी योजना की रूपरेखा साझा की।

सम्मेलन के दौरान 24 श्रेणी पालीवाल सेवा समिति, चारभुजा मंदिर समिति एवं ब्रह्मशक्ति नवयुवक मंडल के पदाधिकारियों ने मुख्य आयोजनकर्ता राकेश जोशी का माल्यार्पण, शॉल एवं उपरणों से अभिनंदन किया। इस आयोजन की व्यापकता का अनुमान इसी से लगाया जा सकता है कि मुंबई, इंदौर, अहमदाबाद, भोपाल सहित मेवाड़ क्षेत्र के 38 गांवों से बड़ी संख्या में समाजजन अपनी उपस्थिति दर्ज कराने पहुंचे। यह समागम न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र बना, बल्कि सामाजिक एकता और संगठनात्मक मजबूती के एक नए अध्याय का साक्षी भी बना।

Pratahkal HQ

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