करौली जिले में पांचना बांध से जल निकासी शुरू होने के बाद भी विवाद थमता नजर नहीं आया। दो समाजों के लोगों ने जिले के विभिन्न स्थानों पर सड़क जाम कर प्रदर्शन किया, जिससे प्रशासन देर रात तक हालात सामान्य नहीं करा सका। प्रदर्शन के चलते रोडवेज बसों के पहिए थम गए और जरूरी कार्यों से यात्रा करने वाले लोगों के साथ-साथ आस्था धाम केला देवी के दर्शनार्थ आने-जाने वाले श्रद्धालुओं को भी भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा।



विगत 20 वर्षों से पांचना बांध से जल निकासी को लेकर विवाद बना हुआ है। पिछले माह जून में कमांड एरिया के किसानों ने हाई कोर्ट के निर्देश के बावजूद बांध से नहरों में पानी नहीं छोड़े जाने के विरोध में खण्डीप गांव में 20 दिन तक धरना-प्रदर्शन किया था। इससे पहले पांचना बांध के समीपवर्ती 39 गांवों के किसानों ने गुडला पांचना लिफ्ट परियोजना का कार्य शुरू कर पहले बांध के समीपवर्ती गांवों तक पानी पहुंचाने की मांग को लेकर 48 से 50 दिन तक बांध के पानी की चौकसी की थी। इस पूरे घटनाक्रम ने राजनीतिक हलचल भी तेज कर दी थी।

दोनों समाजों के बीच सामाजिक सौहार्द बनाए रखने के उद्देश्य से गृहराज्यमंत्री एवं जिला प्रभारी जवाहर सिंह बेढम तथा कृषि मंत्री डॉ. किरोडीलाल मीणा ने आपसी समझाइश का प्रयास किया। इसके बाद पांचना बांध के समीपवर्ती 39 गांवों के संघर्षरत किसानों, कमांड एरिया के किसानों और नदी बहाव क्षेत्र के किसानों की 11-11 सदस्यीय समितियां गठित की गईं। 30 जून को जयपुर में आयोजित हाईलेवल बैठक में सिंचाई मंत्री सुरेश सिंह रावत, कृषि मंत्री डॉ. किरोडीलाल मीणा, गृहराज्यमंत्री जवाहर सिंह बेढम, संभाग स्तरीय अधिकारियों, करौली जिला कलेक्टर अक्षय गोदारा, पुलिस अधीक्षक लोकेश सोनवाल, सवाई माधोपुर जिला कलेक्टर कानाराम, पुलिस अधीक्षक ज्येष्ठी मैत्रीय तथा तीनों समितियों के किसान सदस्यों की मौजूदगी में बैठक हुई। बैठक में सर्वसम्मति से बांध के कैचमेंट एरिया में लिफ्ट परियोजना की स्वीकृति, कमांड एरिया की नहरों में जल निकासी तथा गंभीर नदी क्षेत्र के किसानों के लिए भी पानी छोड़े जाने पर सहमति बनी।



इसके बाद 6 जुलाई को सिंचाई मंत्री सुरेश सिंह रावत और करौली जिला प्रभारी एवं गृह राज्य मंत्री जवाहर सिंह बेढम ने गुडला पांचना लिफ्ट परियोजना का शिलान्यास किया। साथ ही कमांड क्षेत्र के किसानों के लिए पांचना बांध से नहरों के गेट खोलकर पानी छोड़ा गया तथा गंभीर नदी क्षेत्र में भी पानी की निकासी शुरू की गई। हालांकि, विगत 20 वर्षों से कमांड क्षेत्र की नहरों में पानी नहीं छोड़े जाने के कारण नहरों के गेटों में तकनीकी खराबी आ गई थी। जल संसाधन विभाग ने इन गेटों की मरम्मत के लिए दैवली और मथुरा से तकनीकी टीम बुलाकर ठीक करवाया, लेकिन उससे पुर्व ही विवाद फिर उभर आया।

कमांड क्षेत्र के किसानों ने आरोप लगाया कि नहरों में मानकों के अनुरूप पानी नहीं छोड़ा जा रहा है और उनके साथ कुठाराघात किया जा रहा है। इसी आरोप को लेकर करौली-हिण्डौन सड़क मार्ग स्थित टोडूपुरा मोड़ (कटकड मोड़) तथा हिण्डौन-गंगापुर कटकड पुलिया पर सड़क जाम कर दी गई। इसके अलावा कोंडर मोड़ और गुडला गांव में भी जाम लगाया गया। दोनों समाजों के लोग आमने-सामने आ गए और सोशल मीडिया पर अभद्र टिप्पणियों का दौर भी शुरू हो गया, जिससे आक्रोश और बढ़ गया।

जिला प्रशासन ने प्रदर्शनकारियों को समझाने के लगातार प्रयास किए, लेकिन शाम तक भी जाम नहीं खुल सका। कृषि मंत्री डॉ. किरोडीलाल मीणा, करौली जिला कलेक्टर अक्षय गौदरा और करौली पुलिस अधीक्षक लोकेश सोनवाल ने देर रात तक वार्ता के प्रयास किए, लेकिन बातचीत सफल नहीं हो सकी। इसके चलते प्रशासन प्रदर्शनकारियों के सामने स्वयं को बौना साबित करता नजर आया। सड़क जाम के कारण रोडवेज बसों का संचालन प्रभावित रहा और बस स्टैंड पर बसों के पहिए थम गए। आवश्यक कार्यों के लिए यात्रा करने वाले यात्रियों तथा आस्था धाम केला देवी के दर्शनार्थ आने वाले श्रद्धालुओं को भी भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा। पूरे घटनाक्रम के बीच सबसे बड़ा सवाल यह बना हुआ है कि आखिर प्रशासन ऐसी कौन सी मजबूरी में है कि वह आमजन और बाहरी यात्रियों की पीड़ा को समझते हुए भी प्रदर्शनकारियों के सामने प्रभावी कार्रवाई करने में असहाय नजर आ रहा है।

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Pratahkal Bureau

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