गणाधिपति शांति मुनि महाराज की चतुर्थ पुण्यतिथि कानोड़ में मनाई गई
साधुमार्गी शांत क्रांति जैन श्रावक संघ द्वारा आयोजित धर्मसभा में शांति मुनि और महासती प्रभावती महाराज को श्रद्धांजलि दी गई।

कानोड़ के नवकार पौधशाला में आयोजित धर्मसभा के दौरान गणाधिपति शांति मुनि महाराज की तस्वीर, जहां श्रद्धालुओं ने उनके अहिंसात्मक संदेशों को याद किया।
कानोड़ में साधुमार्गी शांत क्रांति जैन श्रावक संघ द्वारा गणाधिपति शांति मुनि महाराज की चतुर्थ पुण्यतिथि मंगलवार को धींगों की घाटी स्थित नवकार पौधशाला में गहन धर्म आराधना के साथ मनायी गई। कार्यक्रम की शुरुआत नवकार महामंत्र के जाप से हुई, जिसमें धर्मानुरागियों ने सामायिक रखी तथा आयम्बल-उपवास कर श्रद्धा व्यक्त की।
आयोजित धर्मसभा में संघ अध्यक्ष पारस नागौरी ने श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि शांति मुनि ने अपने पुण्य पुरुषार्थ से संयम, ज्ञान, तप, सत्य और सहिष्णुता जैसे सद्गुणों की सुगंध समाज में फैलायी। उन्होंने देवलोक प्रयाण कर लिया, किन्तु अपने कृतित्व से संसार को महिमावंत बना गए। युवा संघ के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष अनिल बाबेल ने कहा कि शांति मुनि महाराज की वाणी में हृदय परिवर्तन की अपूर्व क्षमता थी। उन्होंने अपने श्रावकों को होटल से हॉस्पिटल बनाने के लिए प्रेरित कर लोक कल्याण का अनुपम उदाहरण प्रस्तुत किया।
उन्होंने बताया कि छत्तीसगढ़ और उड़ीसा के अनेक मछुआरों का हृदय परिवर्तन कर उन्हें मछली पालन और शिकार जैसे कार्यों से हटाकर कृषि कार्य और मजदूरी की ओर उन्मुख किया। मछुआरों ने अहिंसा का मार्ग अपनाते हुए मत्स्य पालन कार्य को बंद कर कृषि और श्रम को स्वीकार किया। शांति मुनि ने सैकड़ों आत्माओं को संयम के मार्ग पर अग्रसर करते हुए सात्विक जीवन जीने की प्रेरणा दी तथा शताधिक साहित्य का सृजन कर साहित्य जगत की सेवा की।
कार्यक्रम में महिला मंडल द्वारा “शांति चालीसा” का पाठ कर मुनि श्री को श्रद्धा सुमन अर्पित किए गए। इसी दौरान धर्मसभा में महासती प्रभावती महाराज के देवलोक गमन पर श्रद्धांजलि सभा का भी आयोजन किया गया, जिसमें वक्ताओं ने उनके जीवन चरित्र और चोपन वर्षीय साधु जीवन पर प्रकाश डालते हुए समाज में किए गए सुधार कार्यों का उल्लेख किया।
धर्मसभा में उपस्थित सभी श्रावक-श्राविकाओं ने चार-चार लोगस के पाठ का ध्यान कर परमात्मा से दिवंगत आत्माओं को शाश्वत सुखों की प्राप्ति की प्रार्थना की। यह आयोजन न केवल श्रद्धा का प्रतीक बना, बल्कि समाज में अहिंसा, संयम और सात्विक जीवन मूल्यों के प्रसार का सशक्त संदेश भी देकर गया।

Bharat Jaroli, Udaipur
नाम: भरत कुमार जारोली
वर्तमान पद: संवाददाता (प्रातः काल)
कार्यक्षेत्र: कानोड़ (तहसील: कानोड़, जिला: उदयपुर, राजस्थान)
बीट : स्थानीय समाचार, राजनीति, क्राइम, प्रशासन, शिक्षा, स्वास्थ्य, बिज़नेस एवं सभी विषय
परिचय
भरत कुमार जारोली राजस्थान के उदयपुर जिले के अंतर्गत आने वाले कानोड़ तहसील और उसके आसपास के क्षेत्रों के वरिष्ठ संवाददाता हैं। वह अपने क्षेत्र में पुलिस थाना, अस्पताल, स्थानीय प्रशासन, राजनीति, शिक्षा, स्वास्थ्य और व्यापारिक गतिविधियों सहित सभी विषयों पर नियमित रूप से समाचार कवर करते हैं।
पत्रकारिता का अनुभव (Work Experience)
भरत कुमार जारोली को पत्रकारिता के क्षेत्र में 35 वर्षों का लंबा और व्यापक अनुभव है। वह साल 1982 से लगातार 'प्रातः काल' दैनिक समाचार पत्र के साथ जुड़े हुए हैं। इससे पूर्व वह 'राजस्थान पत्रिका' (उदयपुर) से जुड़े हुए थे, जहाँ उन्होंने 35 वर्षों तक नियमित रूप से काम किया।
शैक्षणिक योग्यता (Education)
उन्होंने अपनी शिक्षा हायर सेकेंडरी स्कूल से पूरी की है।
