खेताखेड़ा स्कूल में कमरों का गहरा संकट, बारिश में पानी में बैठे रहे छात्र, जर्जर भवन से हादसे का डर
कानोड़ के खेताखेड़ा राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय में कमरों की कमी और जर्जर भवन से शिक्षा व्यवस्था प्रभावित है। बारिश में छात्र घंटों पानी में बैठे रहे।

तस्वीर में दिख रही एक शेड (साइकिल स्टैंड) के नीचे जमीन पर बैठकर पढ़ाई करती छात्राएं और उनके सामने बैठी एक शिक्षिका।
कानोड़ के निकटवर्ती गांव खेताखेड़ा स्थित राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय में बुनियादी सुविधाओं के अभाव ने शिक्षा व्यवस्था को गंभीर संकट में डाल दिया है। कक्षा 1 से 12 तक संचालित इस विद्यालय में कमरों की भारी कमी के कारण विद्यार्थियों को बरामदे, साइकिल स्टैंड और सामान से भरे कमरों में पढ़ाई करने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। वहीं विद्यालय भवन की जर्जर स्थिति ने अभिभावकों की चिंता और बढ़ा दी है, जिन्हें किसी भी समय बड़े हादसे की आशंका सता रही है।
विद्यालय में वर्तमान में केवल चार कमरे उपलब्ध हैं। इनमें एक कमरे का उपयोग कार्यालय के रूप में किया जा रहा है, जबकि एक कमरे में निर्माण सामग्री रखी हुई है। ऐसे में शेष तीन कमरों में ही सभी कक्षाओं का संचालन किया जा रहा है। स्थिति यह है कि कक्षा 11 और 12 के विद्यार्थियों की पढ़ाई साइकिल स्टैंड में करवाई जा रही है। मंगलवार को हुई बारिश के दौरान वहां पढ़ाई तो दूर, तीन घंटे तक विद्यार्थियों के नीचे तक पानी भर गया, जिससे उन्हें पैरों पर बैठकर बारिश थमने का इंतजार करना पड़ा। वहीं कक्षा 6 और 7 के विद्यार्थियों को बरामदे में बैठाकर पढ़ाया जा रहा है, जहां प्लास्टर गिर रहा है। कक्षा 1 से 6 तक के बच्चों को एक ही कमरे में बैठाकर अध्ययन कराया जा रहा है।
विद्यालय में शिक्षकों के कुल 14 पद स्वीकृत हैं, लेकिन वर्तमान में 6 पद रिक्त पड़े हैं। इसके अलावा विद्यालय में प्राचार्य का पद भी खाली है, जिससे प्रशासनिक और शैक्षणिक व्यवस्थाएं प्रभावित हो रही हैं।
विद्यालय भवन की हालत भी अत्यंत खराब बनी हुई है। बारिश के दौरान कमरों की छत से पानी टपकता है, जबकि बरामदे का प्लास्टर गिरने लगा है। इससे विद्यार्थियों और शिक्षकों की सुरक्षा पर भी खतरा मंडरा रहा है।
विद्यालय के तीनों उपयोग में आने वाले कमरे भी पूरी तरह पढ़ाई के लिए उपलब्ध नहीं हैं। एक कमरे में पोषाहार सामग्री रखी गई है, दूसरे कमरे में अलमारियां और पुस्तकालय का सामान रखा हुआ है, जबकि जिस कमरे में कक्षा 1 से 6 तक के विद्यार्थी बैठते हैं, उसमें टेबल, कुर्सियां, दरियां तथा अन्य सामग्री भी भरी हुई है। ऐसे में बच्चों को पर्याप्त स्थान नहीं मिल पा रहा और पढ़ाई प्रभावित हो रही है।
विद्यालय भवन की जर्जर स्थिति और अव्यवस्थाओं से चिंतित होकर अब तक 25 अभिभावक अपने बच्चों की टीसी कटवाकर अन्य विद्यालयों में प्रवेश दिला चुके हैं। अभिभावकों का कहना है कि बच्चों की सुरक्षा और बेहतर शिक्षा को देखते हुए उन्हें यह कदम उठाना पड़ा।
ग्रामीणों एवं अभिभावकों ने शिक्षा विभाग से विद्यालय में नए कक्षों के निर्माण, रिक्त पदों पर शीघ्र नियुक्ति, प्राचार्य की पदस्थापना तथा जर्जर भवन की तत्काल मरम्मत कराने की मांग की है, ताकि विद्यार्थियों को सुरक्षित वातावरण में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिल सके। उनका कहना है कि यदि विभाग द्वारा अनदेखी की गई तो मजबूरन तालाबंदी के साथ चक्काजाम किया जाएगा, जिसकी समस्त जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।
कार्यवाहक प्राचार्य सीमा सुथार ने बताया, "जो भी समस्याएं हैं उनको लेकर कई बार विभाग के अधिकारियों को एसएमसी, एसडीएमसी में प्रस्ताव लेकर भेजा गया है। बारिश में स्थिति बहुत खराब हो जाती है। छुट्टी करने की नौबत भी आ जाती है।"

Pratahkal Bureau
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