कानोड़। प्रकृति के कण-कण में जब नव-चेतना का संचार होता है और अमराइयों में बौर आने लगते हैं, तब समझ लेना चाहिए कि ऋतुराज बसंत का आगमन हो गया है। इसी पावन अवसर पर नगर पालिका क्षेत्र के आदर्श विद्या मंदिर उच्च प्राथमिक विद्यालय में बसंतोत्सव का पर्व बड़े ही हर्षोल्लास और आध्यात्मिक ऊर्जा के साथ मनाया गया। विद्यालय प्रांगण वैदिक मंत्रोच्चार से गुंजायमान हो उठा, जिससे संपूर्ण वातावरण भक्तिमय और सकारात्मकता से सराबोर नजर आया। कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ दीप प्रज्वलन और विद्या की अधिष्ठात्री मां सरस्वती की विशेष पूजा-अर्चना एवं वंदना के साथ किया गया।

इस गरिमामयी समारोह की अध्यक्षता संस्था प्रधान धीरज जोशी द्वारा की गई, जबकि मुख्य वक्ता के रूप में सेवानिवृत्त शिक्षक एवं विद्वान आचार्य श्री फतह लाल शर्मा उपस्थित रहे। कार्यक्रम के संयोजन का दायित्व माया चौहान ने बखूबी निभाया। मुख्य वक्ता शर्मा ने विद्यार्थियों और उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए इस पर्व की पौराणिक महत्ता पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि माघ मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि का विशेष आध्यात्मिक महत्व है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इसी दिन देवी सरस्वती प्रकट हुई थीं और उन्होंने मौन संसार को ज्ञान, स्वर तथा शब्द प्रदान किए थे, जिसके कारण ब्रह्मा जी ने उन्हें 'सरस्वती' के नाम से संबोधित किया।

वक्ता शर्मा ने आगे कहा कि इस पावन तिथि पर मां शारदे का श्रृंगार विशेष रूप से पीतांबरी परिधानों में किया जाता है। उन्होंने विद्यार्थियों को प्रेरित करते हुए बताया कि बसंत पंचमी के दिन 'ऐं' मंत्र का जाप करना बौद्धिक विकास के लिए अत्यंत फलदायी होता है। यह दिन न केवल ज्ञानार्जन के लिए श्रेष्ठ है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण, पौधारोपण और किसी भी नए मांगलिक कार्य की शुरुआत के लिए भी सर्वश्रेष्ठ मुहूर्त माना जाता है। इसी क्रम में संस्था प्रधान धीरज जोशी ने अतिथियों का स्वागत करते हुए बताया कि पौराणिक आख्यानों के अनुसार, ब्रह्मा जी द्वारा सृष्टि की रचना के समय मां सरस्वती की उत्पत्ति इसी दिन हुई थी। आज के दिन ज्ञान, समृद्धि और सृजनशीलता—इन तीनों शक्तियों का संगम होता है, जिनकी संयुक्त रूप से आराधना की जाती है।

उत्सव के दौरान विद्यालय के छात्र-छात्राओं ने अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करते हुए विभिन्न सांस्कृतिक और साहित्यिक प्रस्तुतियां दीं, जिन्होंने उपस्थित दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। पीले और श्वेत वस्त्रों में सजे विद्यार्थियों ने इस उत्सव को जीवंत बना दिया। कार्यक्रम के अंत में वक्ताओं ने इस बात पर जोर दिया कि ऐसे आयोजनों से नई पीढ़ी अपनी समृद्ध सनातन संस्कृति और परंपराओं से रूबरू होती है। यह उत्सव केवल एक तिथि विशेष नहीं, बल्कि हमारे जीवन में ज्ञान के प्रकाश और नवीनता के संचार का प्रतीक है, जो समाज को बौद्धिक और सांस्कृतिक रूप से सशक्त बनाने का संदेश देता है।

Bharat Jaroli, Udaipur

Bharat Jaroli, Udaipur

नाम: भरत कुमार जारोली

वर्तमान पद: संवाददाता (प्रातः काल)

कार्यक्षेत्र: कानोड़ (तहसील: कानोड़, जिला: उदयपुर, राजस्थान)

बीट : स्थानीय समाचार, राजनीति, क्राइम, प्रशासन, शिक्षा, स्वास्थ्य, बिज़नेस एवं सभी विषय

परिचय 

भरत कुमार जारोली राजस्थान के उदयपुर जिले के अंतर्गत आने वाले कानोड़ तहसील और उसके आसपास के क्षेत्रों के वरिष्ठ संवाददाता हैं। वह अपने क्षेत्र में पुलिस थाना, अस्पताल, स्थानीय प्रशासन, राजनीति, शिक्षा, स्वास्थ्य और व्यापारिक गतिविधियों सहित सभी विषयों पर नियमित रूप से समाचार कवर करते हैं।

पत्रकारिता का अनुभव (Work Experience)

भरत कुमार जारोली को पत्रकारिता के क्षेत्र में 35 वर्षों का लंबा और व्यापक अनुभव है। वह साल 1982 से लगातार 'प्रातः काल' दैनिक समाचार पत्र के साथ जुड़े हुए हैं। इससे पूर्व वह 'राजस्थान पत्रिका' (उदयपुर) से जुड़े हुए थे, जहाँ उन्होंने 35 वर्षों तक नियमित रूप से काम किया।

शैक्षणिक योग्यता (Education)

उन्होंने अपनी शिक्षा हायर सेकेंडरी स्कूल से पूरी की है।

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