कानोड़ नगर पालिका चुनाव के परिणाम भाजपा के लिए आत्मचिंतन का विषय बन गए हैं। परिणाम के अनुसार कांग्रेस ने 14 वार्डों में जीत दर्ज की, जबकि भाजपा को महज 6 वार्ड ही मिल सके। सबसे बड़ा झटका ब्रह्मपुरी क्षेत्र में लगा, जिसे भाजपा का गढ़ माना जाता है। पिछले चुनाव में जहां कांग्रेस की जमानत जब्त हुई थी, वहीं इस चुनाव में भाजपा तीसरे नंबर पर रही।

वार्ड 4 से बाहरी प्रत्याशी और पिछला चुनाव हार चुके हितेंद्र सुथार को चुनाव लड़ाने को लेकर क्षेत्र में नाराजगी सामने आई। हठधर्मिता के चलते हितेंद्र सुथार को प्रत्याशी बनाए जाने का आक्रोश पूरे क्षेत्र में भाजपा के प्रति असंतोष में बदल गया। जिलाध्यक्ष से लेकर पार्टी के बड़े पदाधिकारियों ने मान-मनुहार की, लेकिन इसका कोई नतीजा नहीं निकला।

पूर्व नेता प्रतिपक्ष दीपक शर्मा पिछले चुनाव में 158 मतों से विजयी हुए थे, जबकि इस चुनाव में हितेंद्र सुथार को मात्र 122 वोट मिले और उन्हें तीसरे स्थान पर रहना पड़ा। वार्ड 5 को छोड़कर पूरे क्षेत्र में भाजपा को हार का सामना करना पड़ा।

भाजपा की अप्रत्याशित हार के बाद नगर में यह चर्चा का विषय रहा कि विधायक ने मंडल पदाधिकारियों पर अधिक भरोसा किया। चर्चा के अनुसार भाजपा के पार्षद भाजपा सरकार आने पर नगर पालिका नहीं जा सकते थे और सभी जगह मंडल पदाधिकारियों का वर्चस्व जमाया गया। सरकारी स्कूलों और कार्यालयों में भी भाजपा मंडल पदाधिकारियों का दबदबा बढ़ा दिया गया। ऐसे लोगों को भाजपा ने प्रत्याशी बनाया, जिसके चलते भाजपा को ऐतिहासिक पराजय का सामना करना पड़ा।

वहीं, कांग्रेस ने वार्ड के स्थानीय लोगों को मौका दिया, जबकि भाजपा ने दूसरे वार्ड के लोगों और दल-बदलुओं को चुनाव मैदान में उतारा। इसे भाजपा की पराजय का कारण बताया गया। सोशल मीडिया पर कांग्रेस के दुष्प्रचार को भी भाजपा रोक नहीं सकी।

ब्राह्मण मतदाताओं को भाजपा का परंपरागत वोट बैंक माना जाता है। इसी क्षेत्र से पूर्व पालिकाध्यक्ष स्वर्गीय कुसुम लता, पूर्व उपाध्यक्ष दर्शन शर्मा, पूर्व नेता प्रतिपक्ष मनोज व्यास और पूर्व नेता प्रतिपक्ष दीपक शर्मा भारी मतों से विजय होते थे। लेकिन इस चुनाव में मंडल पदाधिकारियों द्वारा इस क्षेत्र की उपेक्षा के चलते भाजपा को अपने ही गढ़ में पराजय का सामना करना पड़ा।

कांग्रेस की पूर्व विधायक प्रिति गजेंद्र सिंह शक्तावत ने ब्रह्म सरोवर के मुद्दे को भी ब्राह्मण मतदाताओं के बीच खूब चलाया। वहीं, कांग्रेस द्वारा मौन रूप से काम करने की बात भी सामने आई। जिस वार्ड 5 में पिछले चुनाव में कांग्रेस को 20 वोट मिले थे, वहां इस चुनाव में कांग्रेस 83 वोटों के साथ दूसरे नंबर पर रही।

तलाबा और केसरपुरा के वार्डों में भी वार्ड 4 के प्रत्याशी के चयन को लेकर नाराजगी के चलते भाजपा को पराजय मिली। ये सभी क्षेत्र भाजपा के गढ़ माने जाते हैं, जहां इस चुनाव में पार्टी को हार का सामना करना पड़ा। कानोड़ नगर पालिका के परिणामों ने भाजपा के स्थानीय संगठन, प्रत्याशी चयन और मंडल पदाधिकारियों की भूमिका को लेकर नगर में चर्चा को और तेज कर दिया है।

Bharat Jaroli, Udaipur

Bharat Jaroli, Udaipur

नाम: भरत कुमार जारोली

वर्तमान पद: संवाददाता (प्रातः काल)

कार्यक्षेत्र: कानोड़ (तहसील: कानोड़, जिला: उदयपुर, राजस्थान)

बीट : स्थानीय समाचार, राजनीति, क्राइम, प्रशासन, शिक्षा, स्वास्थ्य, बिज़नेस एवं सभी विषय

परिचय 

भरत कुमार जारोली राजस्थान के उदयपुर जिले के अंतर्गत आने वाले कानोड़ तहसील और उसके आसपास के क्षेत्रों के वरिष्ठ संवाददाता हैं। वह अपने क्षेत्र में पुलिस थाना, अस्पताल, स्थानीय प्रशासन, राजनीति, शिक्षा, स्वास्थ्य और व्यापारिक गतिविधियों सहित सभी विषयों पर नियमित रूप से समाचार कवर करते हैं।

पत्रकारिता का अनुभव (Work Experience)

भरत कुमार जारोली को पत्रकारिता के क्षेत्र में 35 वर्षों का लंबा और व्यापक अनुभव है। वह साल 1982 से लगातार 'प्रातः काल' दैनिक समाचार पत्र के साथ जुड़े हुए हैं। इससे पूर्व वह 'राजस्थान पत्रिका' (उदयपुर) से जुड़े हुए थे, जहाँ उन्होंने 35 वर्षों तक नियमित रूप से काम किया।

शैक्षणिक योग्यता (Education)

उन्होंने अपनी शिक्षा हायर सेकेंडरी स्कूल से पूरी की है।

Next Story