डॉ. कमल कांत हिरण विश्व के शीर्ष 2% वैज्ञानिकों की सूची में शामिल
उदयपुर के सर पदमपत सिंघानिया विश्वविद्यालय के प्रोफेसर डॉ. कमल कांत हिरण को स्टैनफोर्ड और एल्सेवियर की वैश्विक सूची में मिला स्थान।

तस्वीर में उदयपुर के सर पदमपत सिंघानिया विश्वविद्यालय के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. कमल कांत हिरण दिख रहे हैं।
उदयपुर स्थित सर पदमपत सिंघानिया विश्वविद्यालय के एसोसिएट प्रोफेसर एवं बौद्धिक संपदा अधिकार (IPR) प्रमुख डॉ. कमल कांत हिरण ने अंतरराष्ट्रीय अकादमिक जगत में उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है। उनका नाम विश्व के शीर्ष 2% वैज्ञानिकों की प्रतिष्ठित सूची में शामिल किया गया है। अमेरिका के स्टैनफोर्ड विश्वविद्यालय और नीदरलैंड की वैज्ञानिक प्रकाशन संस्था एल्सेवियर (Elsevier) के सहयोग से अक्टूबर 2026 में जारी इस सूची में स्थान मिलने से विश्वविद्यालय और उदयपुर का गौरव बढ़ा है। जे. के. सीमेंट द्वारा स्थापित सर पदमपत सिंघानिया विश्वविद्यालय में कार्यरत डॉ. हिरण को सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी, विशेष रूप से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और क्लाउड कंप्यूटिंग में उनके शोध योगदान के लिए यह अंतरराष्ट्रीय पहचान मिली है।
यह प्रतिष्ठित सूची एल्सेवियर के स्कोपस (Scopus) डेटाबेस पर आधारित है। इसमें वैज्ञानिकों के शोध प्रकाशनों, उद्धरणों और अकादमिक प्रभाव का मूल्यांकन किया जाता है। वैज्ञानिक प्रभाव के आकलन में कुल उद्धरण, एच-इंडेक्स, एचएम-इंडेक्स तथा प्रथम और अंतिम लेखक के रूप में प्रकाशित शोध के उद्धरण सहित विभिन्न मानकों को शामिल किया जाता है। इस सूची में स्थान प्राप्त करना शोधकर्ताओं के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जाता है।
अपनी उपलब्धि पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए डॉ. हिरण ने इसका श्रेय अपने माता-पिता स्वर्गीय शम्भू सिंह एवं निर्मला देवी के आशीर्वाद, त्याग और संस्कारों को दिया। उन्होंने अपनी पत्नी डॉ. रुचि के निरंतर सहयोग, मार्गदर्शन और प्रेरणा को भी अपनी शैक्षणिक एवं शोध यात्रा का महत्वपूर्ण आधार बताया। उनके अनुसार, परिवार का विश्वास, निरंतर परिश्रम और शोध के प्रति समर्पण इस मुकाम तक पहुंचने की प्रेरक शक्ति रहे हैं।
डॉ. हिरण की इस उपलब्धि से उनके परिवार, विश्वविद्यालय और उदयपुर शहर में हर्ष का वातावरण है। उनकी अंतरराष्ट्रीय पहचान व्यक्तिगत शोध योगदान के साथ सर पदमपत सिंघानिया विश्वविद्यालय में अनुसंधान, नवाचार और अकादमिक उत्कृष्टता के प्रयासों को भी रेखांकित करती है। उनकी सफलता विद्यार्थियों, युवा शोधकर्ताओं और शिक्षाविदों के लिए प्रेरणास्रोत बनी है।
शोध, शिक्षण और नवाचार के क्षेत्र में डॉ. हिरण का पिछले 21 वर्षों से एशिया, अफ्रीका और यूरोप में शिक्षण एवं अनुसंधान का अनुभव रहा है। इस अवधि में उन्होंने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर 41 पुस्तकों का प्रकाशन किया है। उनके 155 शोध-पत्र प्रकाशित हो चुके हैं और 09 पेटेंट प्रकाशित हैं। अनुसंधान, नवाचार और शैक्षणिक अनुभव के सिलसिले में वह 15 से अधिक देशों का दौरा कर चुके हैं।
गूगल स्कॉलर के अनुसार, डॉ. हिरण के शोध कार्यों को 3,484 से अधिक उद्धरण मिले हैं। उनका एच-इंडेक्स 29 और आई10-इंडेक्स 88 है। कौशल विकास के क्षेत्र में भी उनका योगदान रहा है। अब तक वह 16,000 से अधिक विद्यार्थियों एवं प्रतिभागियों को प्रशिक्षण और कौशल विकास के अवसर प्रदान कर चुके हैं।
उनके शोध कार्यों के संदर्भ और उपलब्धता एमआईटी, स्टैनफोर्ड विश्वविद्यालय, अलबोर्ग विश्वविद्यालय तथा ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों की डिजिटल लाइब्रेरी और अकादमिक संसाधनों में दर्ज हैं। उनका शोध आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, क्लाउड कंप्यूटिंग और उभरती प्रौद्योगिकियों के माध्यम से शिक्षा, अनुसंधान तथा समाज के लिए उपयोगी समाधान विकसित करने पर केंद्रित है।
डॉ. हिरण की उपलब्धि पर सर पदमपत सिंघानिया विश्वविद्यालय के अध्यक्ष डॉ. संजय सिन्हा, प्रो. (डॉ.) प्रसून चक्रवर्ती, प्रो-प्रेसिडेंट (रिसर्च एवं अकादमिक), तथा प्रो. अमित कुमार गोयल, डीन, स्कूल ऑफ इंजीनियरिंग साइंसेज़ ने उन्हें बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। विश्वविद्यालय प्रबंधन ने इस उपलब्धि को संस्थान की शोध संस्कृति, अकादमिक प्रतिबद्धता और नवाचार की भावना के लिए गौरवपूर्ण क्षण बताया। शिक्षा, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी जगत से जुड़े लोगों ने भी उनकी सफलता की सराहना करते हुए इसे युवा शोधकर्ताओं के लिए प्रेरणादायक उपलब्धि बताया।
डॉ. कमल कांत हिरण का विश्व के शीर्ष 2% वैज्ञानिकों की सूची में शामिल होना उनके शोध, शिक्षण और नवाचार से जुड़े कार्यों की अंतरराष्ट्रीय पहचान को दर्शाता है। उनकी उपलब्धि भारतीय शिक्षाविदों की वैश्विक अकादमिक उपस्थिति को रेखांकित करने के साथ सर पदमपत सिंघानिया विश्वविद्यालय और उदयपुर के शैक्षणिक गौरव को भी नई पहचान प्रदान करती है।

Dharnendra Jain( Kherwara)
नाम: धरणेन्द्र जैन
वर्तमान पद: सीनियर रिपोर्टर (प्रातः काल दैनिक, खेरवाड़ा विधानसभा)
कार्यक्षेत्र: खेरवाड़ा विधानसभा क्षेत्र (खेरवाड़ा, ऋषभदेव, और नयागांव उपखंड क्षेत्र, जिला उदयपुर, राजस्थान)
बीट (मुख्य विषय): राजनीति, क्राइम, प्रशासन सहित सभी क्षेत्रों की खबरें
अनुभव: 30 वर्ष से अधिक
परिचय
धरणेन्द्र जैन उदयपुर जिले के खेरवाड़ा विधानसभा क्षेत्र के एक अत्यंत अनुभवी और वरिष्ठ पत्रकार हैं। वर्तमान में वह 'प्रातः काल दैनिक' में सीनियर रिपोर्टर के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। वह मुख्य रूप से खेरवाड़ा, ऋषभदेव और नयागांव उपखंड क्षेत्र को कवर करते हैं। धरणेन्द्र जैन राजनीति, क्राइम, स्थानीय प्रशासन सहित क्षेत्र के सभी प्रमुख विषयों पर नियमित रूप से समाचार लिखते हैं।
पत्रकारिता का अनुभव (Work Experience)
धरणेन्द्र जैन को पत्रकारिता के क्षेत्र में तीन दशकों (30 वर्ष) से अधिक का व्यापक और लंबा अनुभव है:
- वह साल 1995 से पत्रकारिता क्षेत्र में निरंतर कार्यरत हैं।
- उन्होंने वर्ष 1998 से 2018 तक लगातार 20 वर्षों तक 'दैनिक भास्कर' में खेरवाड़ा विधानसभा क्षेत्र के लिए सीनियर रिपोर्टिंग की है।
- वर्ष 2018 से वह लगातार 'प्रातः काल' समाचार पत्र से जुड़े हुए हैं और क्षेत्र की कमान संभाल रहे हैं।
शैक्षणिक योग्यता (Education)
उन्होंने वाणिज्य स्नातक (B.Com) की डिग्री हासिल की है।
