दिवेर से काकोरी तक गूंजी शौर्य-क्रांति की अमर गाथा, 90 मिनट के मंचन ने जगाया राष्ट्रभाव
उदयपुर में काकोरी क्रांति गाथा का 90 मिनट का मंचन हुआ, जिसमें दिवेर विजय से काकोरी तक वीरों के शौर्य और बलिदान की गाथा गूंजी।

तस्वीर में उदयपुर के आरएनटी मेडिकल कॉलेज सभागार में काकोरी क्रांति गाथा पर आधारित नाट्य मंचन के दौरान मंच पर प्रस्तुति देते कलाकार नजर आ रहे हैं।
मेवाड़ की धरती पर मातृभूमि की स्वतंत्रता के लिए सर्वस्व न्योछावर करने वाले वीरों की शौर्यगाथा स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर उदयपुर में फिर जीवंत हो उठी। महाराणा प्रताप की ऐतिहासिक दिवेर विजय से लेकर अंग्रेजी दासता की बेड़ियां तोड़ने के लिए वर्ष 1925 में काकोरी में क्रांति का शंखनाद करने वाले अमर क्रांतिवीरों की गौरवगाथा 90 मिनट के ओजस्वी नाट्य मंचन के माध्यम से प्रस्तुत की गई।
प्रताप गौरव केन्द्र ‘राष्ट्रीय तीर्थ’ एवं सभ्यता अध्ययन केन्द्र राजस्थान चैप्टर के संयुक्त तत्वावधान तथा पश्चिम क्षेत्र सांस्कृतिक केन्द्र और रवीन्द्रनाथ टैगोर आयुर्विज्ञान महाविद्यालय के सहयोग से आरएनटी मेडिकल कॉलेज के नवीन सभागार में काकोरी क्रांति गाथा का नाट्य मंचन हुआ। क्रांतिवीरों के “इंकलाब जिंदाबाद” और “वंदे मातरम्” के उद्घोषों से सभागार गूंज उठा और वातावरण में राष्ट्रभक्ति का संचार हुआ।
नाटक में अंग्रेजी हुकूमत के अत्याचारों के विरुद्ध क्रांतिकारियों के अदम्य साहस, त्याग और बलिदान को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया गया। मातृभूमि की स्वतंत्रता के लिए हंसते-हंसते फांसी के फंदे को चूमने वाले क्रांतिवीरों राम प्रसाद बिस्मिल, अशफाक उल्ला खां, रोशन सिंह और राजेन्द्र लाहिड़ी के जीवंत दृश्यों ने दर्शकों को भावविभोर कर दिया। सभागार में गूंजते भारत माता के जयकारों के बीच युवाओं में राष्ट्रभक्ति और शौर्य का ज्वार दिखाई दिया।
कार्यक्रम की शुरुआत राष्ट्रगान ‘जन-गण-मन’ से हुई। दीप प्रज्वलन के बाद प्रताप गौरव केन्द्र के निदेशक अनुराग सक्सेना ने दिवेर विजय महोत्सव एवं काकोरी क्रांति गाथा नाट्य मंचन की विस्तार से जानकारी दी। इस अवसर पर अतिथियों ने 16 से 26 सितम्बर तक होने वाले दिवेर विजय महोत्सव के विविध आयोजनों के पोस्टर का विमोचन किया।
युवा शक्ति को संबोधित करते हुए वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप समिति के अध्यक्ष प्रो. भगवती प्रकाश शर्मा ने कहा कि राष्ट्र निर्माण में युवाओं की भूमिका प्रत्येक कालखंड में निर्णायक रही है। मातृभूमि के प्रति समर्पण, त्याग और बलिदान की भावना ने ही भारत के इतिहास को गौरव के अमर अध्याय प्रदान किए हैं। इतिहास रचने में युवा सदैव अग्रणी रहे हैं।
सभ्यता अध्ययन केन्द्र के सह निदेशक डॉ. विवेक भटनागर ने बताया कि कार्यक्रम की अध्यक्षता आरएनटी मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. राहुल जैन ने की। इस अवसर पर संत प्रवर झाड़ोल के महंत गुलाबदास महाराज, अक्षय पात्र फाउंडेशन के अमेय आत्मा कृष्ण दास, पुलिस महानिदेशक गौरव श्रीवास्तव, सभ्यता अध्ययन केन्द्र नई दिल्ली के निदेशक डॉ. रविशंकर, वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप समिति के महामंत्री दीपक शुक्ल, दिवेर महोत्सव संयोजक रमन सूद, सह संयोजक हरीश राजानी, प्रो. देवेन्द्र श्रीमाली सहित शहर के अनेक गणमान्य नागरिक एवं बड़ी संख्या में युवा उपस्थित रहे।
सभ्यता अध्ययन केन्द्र राजस्थान चैप्टर के संयोजक मनोज जोशी ने आभार व्यक्त करते हुए कहा कि भारत माता को पराधीनता की बेड़ियों से मुक्त कराने के संकल्प के साथ 9 अगस्त 1925 को हुए काकोरी कांड की क्रांतिकारी गाथा के 100 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर इस नाट्य मंचन का आयोजन किया गया।
उन्होंने कहा कि काकोरी के युवा क्रांतिकारियों ने अंग्रेजी सत्ता को खुली चुनौती देकर देश के स्वतंत्रता संघर्ष में नई ऊर्जा का संचार किया। उनके अदम्य साहस और बलिदान से प्रेरित होकर देश के असंख्य युवाओं ने स्वाधीनता आंदोलन में भागीदारी की और संघर्ष को नई दिशा मिली।
मनोज जोशी ने कहा कि काकोरी के अमर क्रांतिकारी अंग्रेजी हुकूमत की फांसी की सजा के सामने भी तनिक विचलित नहीं हुए और हंसते-हंसते मातृभूमि के लिए अपना जीवन न्योछावर कर दिया। इसी अमर बलिदान पर आधारित 90 मिनट के नाट्य मंचन ने नई पीढ़ी को स्वतंत्रता संग्राम के संघर्ष, क्रांतिकारियों की यातनाओं, त्याग, साहस और अदम्य जिजीविषा का सजीव अनुभव कराया।
कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगीत वंदेमातरम से हुआ। संचालन डॉ. रेखा महात्मा ने किया।
स्वतंत्रता दिवस के उपलक्ष्य में प्रताप गौरव केन्द्र ‘राष्ट्रीय तीर्थ’ की ओर से दर्शनार्थियों के लिए 14, 15 एवं 16 अगस्त को शुल्क में विशेष छूट रखी गई है। प्रताप गौरव केन्द्र ‘राष्ट्रीय तीर्थ’ के निदेशक अनुराग सक्सेना ने बताया कि इन तीनों दिनों में दर्शनार्थी मात्र 50 रुपये शुल्क में ‘राष्ट्रीय तीर्थ’ का दर्शन कर सकेंगे। स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर आयोजित काकोरी क्रांति गाथा के इस मंचन ने दिवेर विजय से काकोरी तक शौर्य, त्याग और बलिदान की ऐतिहासिक परंपरा को नई पीढ़ी के सामने सजीव रूप में प्रस्तुत किया।

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