उदयपुर में कबीरपंथी संस्था उदयपुर की ओर से आयोजित सद्गुरु कबीर चरितामृत कथा के तीसरे दिन कथाकार धर्माधिकारी सुधाकर साहेब ने माता-पिता और गुरु के महत्व को समझाते हुए कहा कि कोई व्यक्ति कितना ही बड़ा संत, त्यागी या तपस्वी क्यों न बन जाए, वह माता-पिता से बड़ा कभी नहीं हो सकता। सुहालका भवन में आयोजित कथा में उन्होंने सद्गुरु कबीर साहेब की महिमा, धनी धर्मदास साहेब के प्रसंगों और गुरु से प्राप्त होने वाले आत्मज्ञान के महत्व पर प्रकाश डाला।

कथा के दौरान धर्माधिकारी सुधाकर साहेब ने काशी नरेश वीर सिंह वाघेला और गोरखनाथ जी से जुड़े प्रसंग भी प्रस्तुत किए। उन्होंने तत्वा-जीवा प्रसंग को संवेदनापूर्ण ढंग से सुनाया। तत्वा और जीवा दोनों भाई साधु-संतों की सेवा किया करते थे। उन्होंने अपने जीवन में यह संकल्प लिया था कि वे उन्हीं संत को अपना गुरु बनाएंगे, जो पूर्ण और सच्चे संत होंगे।

दोनों भाइयों ने संत की परीक्षा लेने के लिए एक उपाय किया। उन्होंने वटवृक्ष की सूखी डाल को जमीन में गाड़ दिया और कहा कि जिस संत के चरण पखारने के बाद उस जल से डाल के पत्ते हरे हो जाएंगे, वे उसी संत को अपना गुरु मानेंगे। इसके बाद उन्होंने अनेक संतों के चरण पखारे और उस जल को सूखी डाल पर डाला, लेकिन डाल सूखी ही रही। अंततः यह विषय संत समाज में गंभीर चर्चा का कारण बन गया।

इसके बाद सभी संतों ने ऐसी पुकार की, जिससे सद्गुरु साहेब वहां प्रकट हुए। सद्गुरु कबीर साहेब के चरण पखारकर जब उनके चरणों का जल सूखी डाल पर डाला गया, तो वह हरी-भरी हो गई। कबीर साहेब के दिव्य स्वरूप को देखकर दोनों भाई अत्यंत प्रसन्न हुए और उन्होंने सद्गुरु कबीर साहेब को अपना गुरु बना लिया।

धर्माधिकारी सुधाकर साहेब ने माता-पिता के महत्व को सरल भाषा में समझाते हुए कहा कि कोई भी व्यक्ति कितना ही बड़ा संत, त्यागी या तपस्वी क्यों न हो जाए, वह माता-पिता से बड़ा नहीं हो सकता। उन्होंने कहा कि भक्त के माता-पिता धन्य हैं, क्योंकि उनके अंश से शरीर का निर्माण होता है और उसी शरीर से भगवान की भक्ति की जाती है। जो लोग अपने माता-पिता की प्रेमपूर्वक सेवा करते हैं, उनके माता-पिता सर्वथा धन्य हैं।

उन्होंने गुरु के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि आत्मज्ञान गुरु से प्राप्त होता है, जिससे जीवन का कल्याण होता है। भक्त को आत्मज्ञान, मोक्ष का रास्ता और भक्ति सद्गुरु के आशीर्वाद से मिलती है। सच्चे भक्त का शरीर, इंद्रियां और अंतःकरण—मन, बुद्धि, चित्त तथा अहंकार—सभी धन्य हैं, क्योंकि वे पाप से दूर रहकर पुण्य और सत्कर्म में लगे रहते हैं। ऐसे सत्पुरुष धन्य हैं, जिनसे आत्मदेव का कल्याण होता है।

कथा में महंत तपसी साहेब, भंवर लाल, बालचंद, राम प्रसाद, चंदन, गौरव सुवालका, लोकेश चौधरी, कैलाश प्रजापत, गोपाल साहू, राजेश साहु, गजेंद्र, प्रकाश, राधाकिशन सेन, बद्रीसिंह, बंशीलाल सेन, भगवती चौधरी, राम लाल चौधरी सहित सैकड़ों हंस और भक्तगण उपस्थित थे। कथा के तीसरे दिन माता-पिता की सेवा, सद्गुरु के प्रति समर्पण और आत्मज्ञान के महत्व से जुड़े प्रसंग प्रमुख रहे।

Vishnu Lohar, Jhadol

Vishnu Lohar, Jhadol

नाम: विष्णु लोहार

वर्तमान पद: संवाददाता (प्रातःकाल, झाड़ोल)

कार्यक्षेत्र: झाड़ोल, उदयपुर (राजस्थान) - मुख्य रूप से झाड़ोल और गोगुंदा विधानसभा क्षेत्र एवं आसपास का ग्रामीण अंचल

अनुभव: करीब 10 वर्ष

बीट और विशेषज्ञता 

  • स्थानीय एवं ग्रामीण समाचार: झाड़ोल व गोगुंदा विधानसभा क्षेत्र, ग्रामीण पंचायतों, सामाजिक गतिविधियों तथा जनहित से जुड़े मुद्दों की नियमित कवरेज।
  • राजनीति: स्थानीय निकाय, पंचायत, विधानसभा क्षेत्र की राजनीतिक गतिविधियां, जनप्रतिनिधियों के कार्यक्रम एवं राजनीतिक घटनाक्रम।
  • क्राइम: पुलिस कार्रवाई, अपराध संबंधी घटनाएं, कानून-व्यवस्था एवं न्यायिक मामलों की रिपोर्टिंग।
  • प्रशासन: सरकारी विभागों की कार्यप्रणाली, जनसुनवाई, विकास कार्य, शिविरों एवं प्रशासनिक निर्णयों की कवरेज।
  • शिक्षा: विद्यालयों, महाविद्यालयों, शिक्षा योजनाओं, विद्यार्थियों की उपलब्धियों एवं शिक्षा संबंधी समस्याओं पर रिपोर्टिंग।
  • स्वास्थ्य: स्वास्थ्य सेवाएं, चिकित्सा शिविर, सरकारी स्वास्थ्य योजनाएं, जनस्वास्थ्य एवं जागरूकता विषयक समाचार।
  • बिज़नेस एवं व्यापार: स्थानीय व्यापार, बाजार गतिविधियां, छोटे व्यवसाय, उद्यमिता एवं आर्थिक गतिविधियों से जुड़े विषय।
  • सामाजिक एवं जनहित मुद्दे: ग्रामीण समस्याएं, नागरिक सुविधाएं, सामाजिक सरोकार, सरकारी योजनाएं, ग्रामीण विकास तथा जनकल्याण से जुड़े विषयों की विशेष कवरेज।

शैक्षणिक योग्यता (Education)

  • वाणिज्य स्नातक (B.Com)
  • वाणिज्य स्नातकोत्तर (M.Com)
  • B.Ed (बैचलर ऑफ एजुकेशन)
  • BSTC (बेसिक स्कूल टीचिंग सर्टिफिकेट)

Next Story