उदयपुर के झाड़ोल उप कारागृह में बंदियों के साथ अमानवीय व्यवहार और बेरहमी से मारपीट किए जाने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश (एडीजे) एवं जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव कुलदीप शर्मा के जेल निरीक्षण के दौरान बंदियों ने जेल प्रशासन की करतूतों का खुलासा किया।

बंदियों ने दिखाए चोट के निशान, मेडिकल के बाद तीन मामले दर्ज

निरीक्षण के दौरान एडीजे ने जब बंदियों से बातचीत की तो कई कैदियों ने अपने हाथ-पैर और पीठ पर पड़े चोट के निशान दिखाए। बंदियों ने आरोप लगाया कि "जेलर करण गरासिया और कुछ जेल प्रहरी मामूली बातों पर भी उन्हें पट्टों से बेरहमी से पीटते हैं और प्रताड़ित करते हैं।" मामले की गंभीरता को देखते हुए एडीजे ने तुरंत तीन बंदियों से लिखित शिकायत ली और उनका मेडिकल परीक्षण करवाने के निर्देश दिए। मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर झाड़ोल थाने में जेलर और जेल प्रहरियों के खिलाफ तीन अलग-अलग मामले दर्ज किए गए हैं।

जेल की व्यवस्थाओं में मिलीं गंभीर खामियां और बदहाली

निरीक्षण के दौरान जेल की व्यवस्थाओं में भी कई कमियां सामने आईं। बंदियों ने बताया कि "गर्मी के बावजूद कई बैरकों में पंखे खराब पड़े हैं और कुछ जगहों पर पंखे लगे ही नहीं हैं।" कई बंदी दूसरे जिलों के होने के बावजूद उनकी पेशी न तो वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से कराई जा रही है और न ही उन्हें अदालत ले जाया जा रहा है। बंदियों ने यह भी शिकायत की कि "जेल में पढ़ने के लिए अखबार, किताबें या अन्य शैक्षणिक सामग्री उपलब्ध नहीं कराई जाती।" वहीं पानी की टंकी में पर्याप्त पानी नहीं होने के कारण भी बंदियों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

क्षमता से अधिक बंदी और मानवाधिकारों का उल्लंघन

जानकारी के अनुसार झाड़ोल उप कारागृह की क्षमता करीब 100 बंदियों की है, लेकिन वर्तमान में यहां लगभग 136 बंदी रखे गए हैं। क्षमता से अधिक बंदियों के कारण व्यवस्थाएं और अधिक चरमराई हुई हैं। एडीजे कुलदीप शर्मा ने पूरे मामले को बंदियों के मानवाधिकारों का गंभीर उल्लंघन बताते हुए कहा कि "जेलर और जेल प्रहरियों द्वारा की गई मारपीट अत्यंत गंभीर मामला है।" उन्होंने इस संबंध में विस्तृत रिपोर्ट जयपुर मुख्यालय को भेजते हुए दोषियों के खिलाफ नियमानुसार कड़ी कार्रवाई की अनुशंसा की है। अब इस मामले में पुलिस जांच और प्रशासनिक कार्रवाई पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।

Pratahkal Bureau

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